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अल्पावधि की चिंता से मारुति पर रहेगा दबाव

राम प्रसाद साहू / मुंबई December 19, 2021

नवंबर के अपने उच्चस्तर से देश की सबसे बड़ी यात्री वाहन कंपनी का शेयर 12 फीसदी गंवा चुका है। बाजार हिस्सेदारी में गिरावट का रुख, आपूर्ति के अवरोध और मुनाफे पर दबाव से इस शेयर की दोबारा रेटिंग हो रही है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि गिरावट का रुख पलटने की खातिर कंपनी के लिए अल्पावधि के कोई संकेतक नहीं हैं।

हाल में सीएलएसए ने इस शेयर को डाउनग्रेड कर अंडरपरफॉर्म कर दिया था क्योंंकि कंपनी उच्च लाभ वाले स्पोट्र्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) सेगमेंट में बाजार हिस्सेदारी गंवा रही है। इस नुकसान की वजह एसयूवी के क्षेत्र में पेशकश का अभाव है और उनका मानना है कि वॉल्यूम व मार्जिन पर दबाव रहेगा और वित्त वर्ष 23 व वित्त वर्ष 24 में इसकी और डाउनग्रेडिंग होगी।

वित्त वर्ष 21 की पहली छमाही में 48.1 फीसदी से घटकर कंपनी की बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 22 की पहली छमाही में 43 फीसदी के नीचे आ गई। कंपनी ने हालांकि ज्यादातर अन्य क्षेत्रों में बाजार हिस्सेदारी गंवाई है, लेकिन एसयूवी के क्षेत्र में नए उत्पादों की पेशकश का अभाव बाजार हिस्सेदारी मेंं गिरावट की मुख्य वजह रही है। देसी कॉम्पेक्ट एसयूवी अभी तक सबसे तेज गति से बढऩे वाला क्षेत्र रहा है और उसकी बाजार हिस्सेदारी एक साल पहले की समान तिमाही के 25 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 32 फीसदी के पार निकल गई। वित्त वर्ष 22 की पहली छमाही में मारुति ने इस क्षेत्र में अपनी बाजार हिस्सेदारी 90 आधार अंक गंवाई और यह 14.4 फीसदी रह गई। वित्त वर्ष 2019 में इस क्षेत्र में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 35.4 फीसदी के सर्वोच्च स्तर पर थी।

मारुति के हैचबैक सेगमेंट की बाजार हिस्सेदारी (देसी यात्री वाहन बाजार के अनुपात में) सालाना आधार पर 700 आधार अंक घटकर 39.8 फीसदी रह गई है। नवंबर में देसी बाजार में बिक्री 18 फीसदी घटी और अल्पावधि में यह सुस्त हो सकती है क्योंंकि चिप की किल्लत के कारण मौजूदा माह में उत्पादन में 15 फीसदी की कटौती की गई है। वॉल्यूम हालांकि कम रहा है, लेकिन कंपनी के मुताबिक, मांग मजबूत रही है। कंपनी के पास 2 लाख वाहनों का लंबित ऑर्डर बुक है (दूसरी तिमाही में 3.85 लाख खुदरा बिक्री) और डीलरों की इन्वेंट्री 60,000 वाहन है। सकारात्मक प्रवृत्ति यह है कि सीएनजी में कंपनी की हिस्सेदारी पिछले साल के 12 फीसदी से बढ़कर अभी 17 फीसदी से ज्यादा हो गई है। सीएनजी इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार और इसके परिचालन की घटती लागत से ऐसे वाहनों की मांग ज्यादा है, जो बाजार की अग्रणी कंपनी के लिए सकारात्मक है।

इस शेयर के लिए अहम संकेतक है अगले साल एसयूवी की पेशकश। अपने पोर्टफोलियो में उत्पादों की खाई पाटने के लिए कंपनी अगले तीन साल में 10 नए वाहन पेश करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसमें दो एसयूवी और टोयोटा की साझेदारी में बहुउद्देश्यीय वाहन शामिल है।

बाजार की अग्रणी कंपनी की तरफ से विशिष्टता के साथ पेशकश अहम रहेगी, येस सिक्योरिटीज के दीप शाह ने कहा कि टाटा मोटर्स, किया, एमजी और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तरफ से नए उत्पाद उतारने की आक्रामक योजना से बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी सीमित हो जाएगी। अल्पावधि की मांग, मार्जिन (दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 600 आधार अंक घटकर 4.2 फीसदी) और बाजार हिस्सेदारी अहम कारक होंगे। मध्यम से लंबी अवधि में बाजार की नजर हाइब्रिड (अगले साल पेश होगी) और इलेक्ट्रिक वाहनों की पेशकश पर होगी। प्रतिस्पर्धी कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहन पेश कर रही हैं और वैश्विक स्तर पर बाजार बैटरी वाले वाहनों की ओर जा रहा है, ऐसे में मारुति किनारे पर है। कंपनी ने हाल में संकेत दिया कि वह टोयोटा संग इलेक्ट्रिक वाहन साल 2024 के आखिर या 2025 की शुरुआत में पेश करेगी।

कुछ अवरोध रहे हैं और इस शेयर ने पिछले एक साल में अपनी समकक्ष इंडेक्स के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया है, ऐसे में मूल्यांकन पांच साल के औसत के मुकाबले छूट पर है। सैंक्टम वेल्थ के निदेशक (शोध) आशिष चतुरमोहता का मानना है कि निवेशकों को बाजार की अग्रणी कंपनी का शेयर उचित मूल्यांकन पर मिल रहा है। हालांकि कई तरह की चिंता को देखते हुए निवेशकों को इस शेयर पर विचार से पहले अहम संकेतकों (मसलन नई पेशकश) का इंतजार करना चाहिए।

Keyword: अल्पावधि, यात्री वाहन, बाजार हिस्सेदारी, एसयूवी, डाउनग्रेडिंग, मारुति,
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