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वित्तीय समावेशन पर ध्यान

संपादकीय /  December 12, 2021

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को अधिक समावेशी और सस्ता एवं सुलभ बनाना चाहता है। केंद्रीय बैंक की इस घोषणा का संबंधित पक्षों ने स्वागत किया है। आरबीआई डिजिटल भुगतान शुल्कों (कार्ड, वॉलेट, वित्त-तकनीक सहित यूपीआई) पर परिचर्चा पत्र लाना चाहता है। केंद्रीय बैंक ने फीचर फोन पर यूपीआई से लेनदेन की सुविधा देने का भी प्रस्ताव दिया है।

फीचर फोन के जरिये सुरक्षित एवं निर्बाध रूप से यूपीआई तक पहुंच और इसके परिचालन की व्यवस्था का खाका तैयार करना तकनीकी रूप से थोड़ा पेचीदा और महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य साबित हो सकता है। मगर योजना का सफल क्रियान्वयन हुआ तो इससे यूपीआई प्रणाली की पहुंच लोगों तक दोगुना बढ़ जाएगी। फिलहाल भारत में 95 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं में केवल आधे ही स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं और केवल उन्हीं लोगों तक यूपीआई सुविधा की पहुंच है।

फीचर फोन का इस्तेमाल करने वाले करीब 45-50 करोड़ लोग ग्रामीण क्षेत्रों और निम्र आय वर्ग से संबंध रखते हैं। इनमें कई लोग जहां रहते हैं वहां इंटरनेट सुविधा भी उपलब्ध नहीं है और अगर है भी तो ठीक ढंग से काम नहीं करती है। ऐसे लोग यूपीआई सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। अगर इन लोगों के लिए यूपीआई सेवा सुलभ हो जाती है तो इससे देश में डिजिटल लेनदेन में कई गुना इजाफा होगा और देश के कोने-कोने तक यूपीआई सुविधा पहुंच जाएगी।

फीचर फोन उपयोगकर्ताओं के लिए यूपीआई आधारित भुगतान योजनाएं शुरू करने के लिए आरबीआई सॉफ्टवेयर एवं बैक-एंड डेटा निपटान ढांचा स्थापित करना चाहता है। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए जरूरी होगी जो इंटरनेट सेवाओं का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इसके साथ ही आरबीआई छोटे आकार के लेनदेन की प्रक्रिया सरल बनाने के लिए यूपीआई प्रणाली में व्यापक बदलाव करना चाहता है। केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए 'ऑन-डिवाइस' यूपीआई वॉलेट का इस्तेमाल करेगा। आरबीआई सरकारी प्रतिभूतियों एवं सार्वजनिक आंरभिक निर्गमों (आईपीओ) में यूपीआई के जरिये सीधे खुदरा लेनदेन सीमा का आकार भी बढ़ाना चाहता है। यह मौजूदा सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने पर विचार कर रहा है।

इस विधि से वित्तीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने की पहल का परिवारों की बचत के संदर्भ में व्यापक असर होगा। इसका कारण यह है कि देश में परिवारों की बचत का महज एक छोटा हिस्सा पूंजी बाजार और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश होता है। ज्यादातर नकद लेनदेन वास्तविक समय में होते हैं मगर फीचर फोन के जरिये यूपीआई का विकल्प मिलने से ऐसे कई लेनदेन डिजिटल माध्यम से होने लगेंगे। फीचर फोन इस्तेमाल करने वाले लोगों के वित्तीय व्यवहार को देखते हुए छोटे आकार के डिजिटल लेनदेन में इजाफा होने से सिक्के एवं छोटे नोट का इस्तेमाल कम हो जाएगा। इससे अनौपचारिक अर्थव्यवस्था की बेहतर तस्वीर भी सामने आ पाएगी। हालांकि यह योजना पूरी तरह फलीभूत करने के लिए तकनीकी तौर पर पूरी प्रक्रिया सुरक्षित एवं सरल रखनी होगी। यह भी ध्यान रखना होगा नई प्रणाली अधिक से अधिक लेनदेन का निपटान करने में सक्षम रहे।

भारत में करीब 89 प्रतिशत लेनदेन (संख्या के हिसाब से) नकद होते हैं। यह नोटबंदी के पूर्व के स्तर से थोड़ा कम है मगर 2010 की तुलना में इसमें सुधार आया है। 2010 में करीब 100 प्रतिशत लेनदेन नकद होते थे। अक्टूबर 2016 की तुलना में नकदी का प्रसार 17 प्रतिशत बढ़ गया है। मगर कोविड-19 महामारी के बीच डिजिटल माध्यम से लेनदेन में इजाफा हुआ है। इस वर्ष अक्टूबर में यूपीआई के माध्यम से 4 अरब (7.7 लाख करोड़ रुपये मूल्य के) से अधिक लेनदेन हुए हैं। अगर केंद्रीय बैंक त्वरित गति एवं मजबूती के साथ इस योजना का क्रियान्वयन कर पाता है तो डिजिटल लेनदेन और तेजी से बढ़ेगा और वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ेगी।

Keyword: वित्तीय समावेशन, आरबीआई, यूपीआई, डिजिटल भुगतान शुल्क, कार्ड, वॉलेट,
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