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कोरोना की तीसरी लहर से पहले जुटा लें आपात कोष

बिंदिशा सारंग /  December 06, 2021

दक्षिण अफ्रीका में कोरोनावायरस की एकदम नई किस्म का पता लगते ही हड़कंप मच गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे ओमीक्रोन नाम दिया है और इसे अब तक का सबसे घातक कोरोनावायरस बताया जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका के कई देशों में इसने हाहाकार मचा रखा है और उसे देखकर पूरी दुनिया डर गई है। जापान ने विदेशियों के अपने यहां दाखिल होने पर पूरी तरह रोक लगा दी है और न्यूयॉर्क शहर ने आपातकाल की घोषणा कर दी है। इस वजह से दुनिया भर में एक बार फिर अनिश्चितता सिर उठाने लगी है। अभी यह तो नहीं पता कि तीसरी लहर भारत में आएगी या नहीं और आएगी तो कितनी घातक होगी मगर इसके लिए पहले ही आर्थिक तैयारी कर लेना समझदारी होगी।

आपात कोष बढ़ाएं

अगर अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर चोट पड़ती है तो दफ्तर से छंटनी भी दोबारा शुरू हो सकती है। ऐसे में किसी को भी नहीं पता कि भविष्य के गर्भ में उसके लिए क्या छिपा है। इसलिए किसी भी अप्रत्याशित या प्रतिकूल स्थिति से निपटने के लिए आपके पास आपात कोष यानी अलग से रखी गई अच्छी खासी रकम होनी ही चाहिए।

वित्तीय योजनाकारों और अनुभवी लोगों से पूछें तो उनके मुताबिक आदर्श स्थिति तो यह होगी कि आपके पास कम से कम छह महीने का मासिक खर्च बतौर आपात कोष किसी बैंक खाते में अलग से रखा हो। मासिक खर्च का मतलब महीने का घर खर्च या राशन का खर्च भर नहीं होता। इसमें आपके सभी तरह के कर्जों की मासिक किस्तें, बीमा का प्रीमियम और बच्चों की स्कूल फीस भी शामिल होनी चाहिए।

जिन लोगों ने अभी तक आपात कोष जुटाने के बारे में विचार ही नहीं किया, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। फिनविन फाइनैंशियल प्लानर्स के मैनेजिंग पार्टनर मेल्विन जोसेफ उन्हें यह कोष तैयार करने का तरीका भी बता रहे हैं। जोसेफ कहते हैं, 'अगर आपके पास पहले से कोई आपात कोष नहीं है तो घबराइए नहीं। अपने निवेश में से कुछ पैसे निकालिए और उन्हें आपात कोष की तरह कहीं रख दीजिए। जब यह कोष तैयार हो जाए तो पहले की तरह निवेश जारी रखिए।'

आपात कोष को कहां रखना है, यह भी अहम है। इस रकम को लिक्विड फंड में रख सकते हैं या बचत बैंक खाते में डाल सकते हैं। इन दोनों तरीकों से आपको रकम जरूरत पड़ते ही हासिल हो जाएगी।

आपात कोष बनाने भर से ही महामारी या आकस्मिक जरूरतों के लिए आपकी तैयारी पूरी नहीं होती। आपके घर पर नकदी भी रखी होनी चाहिए। जब कोई भी स्वास्थ्य संकट गहराने लगता है या महामारी जैसी स्थिति उत्पन्न होती है तो अक्सर अस्पताल पूरा बिल चेक, क्रेडिट/डेबिट कार्ड अथवा ऑनलाइन तरीकों से लेने के लिए तैयार नहीं होते। वे बिल का कुछ हिस्सा नकद चुकाने का दबाव मरीजों पर डालते हैं। इसलिए आपके पास कम से कम एक महीने का खर्च नकदी की शक्ल में होना चाहिए।

निजी स्वास्थ्य बीमा अनिवार्य

पिछले करीब दो साल में कोरोनावायरस की एक के बाद एक दो लहरें आने के साथ ही लोगों को अपने या दूसरों के अनुभव से यह सीख मिली है और निजी स्वास्थ्य बीमा कवर होना बेहद जरूरी है। कंपनी बेशक आपको समूह स्वास्थ्य बीमा में शामिल करती है मगर आपके पास अपने और अपने परिवार के लिए अलग से स्वास्थ्य बीमा होना ही चाहिए। अगर दुर्भाग्य से आपकी नौकरी चली जाती है तो कंपनी के समूह स्वास्थ्य बीमा का लाभ भी उसी दिन खत्म हो जाता है। जोसेफ कहते हैं, 'आप कितनी रकम का स्वास्थ्य बीमा खरीदें, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन से शहर में रहते हैं। मुंबई में रहने वाले किसी परिवार के लिए 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा भी शायद काफी नहीं होगा मगर केरल में रहने वाले परिवार के लिए इतनी रकम का बीमा पर्याप्त होगा।'

अधिकतर वित्तीय योजनाकार यही सलाह देते हैं कि महानगरों में रहने वाले परिवारों के पास कम से कम 15-20 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा होना ही चाहिए। सृजन फाइनैंशियल एडवाइजर्स की संस्थापक साझेदार दीपाली सेन कहती हैं, 'सामान्य शहरों में रहने वाले लोगों के लिए 5-7 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा भी काफी होगा।'

जो लोग किसी कारण से कॉम्प्रिहेंसिव स्वास्थ्य बीमा कवर नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें कम से कम एक वैकल्पिक बीमा पॉलिसी जरूर खरीद लेनी चाहिए। एमबी वेल्थ फाइनैंशियल सॉल्यूशन्स के संस्थापक एम बर्वे सलाह देते हैं, 'कोरोना रक्षक खरीद लीजिए। यह निश्चित लाभ वाली बीमा योजना है, जो किसी व्यक्ति को कोविड होने पर बीमा की पूरी रकम दे देती है।' सुनिश्चित कर लीजिए कि आपके पास पर्याप्त जीवन बीमा है।

कर्ज का बोझ कम से कम

ऐसी स्थितियों में एक और काम बेहद जरूरी है। अपने ऊपर मौजूद कर्ज के बोझ को यथासंभव कम से कम कर लें। सेन कर्ज में कमी लाने के कुछ पुख्ता उपाय भी समझाती हैं। वह कहती हैंं, 'कुछ कर्ज पूरी तरह खत्म करने की कोशिश करें। आपके पास कहीं भी रकम पड़ी हो तो उसका इस्तेमाल कीजिए और इन कर्ज को समय पूर्व भुगतान के जरिये खत्म कर दीजिए। अगर अतिरिक्त रकम नहीं है तो अपना कोई निवेश खत्म कर लीजिए और उससे मिली रकम को इस काम के लिए इस्तेमाल कीजिए। यह भी नहीं हो सकता तो परिवार के किसी सदस्य से उधार लीजिए। बहुत सारी ईएमआई मुश्किल के समय में सबसे बड़ा सिरदर्द होती हैं।' तो शुरुआत कहां से की जाए? सबसे पहले अपने क्रेडिट कार्ड से शुरुआत कीजिए। जो भी बकाया राशि है, उसे एकमुश्त चुका दीजिए और रोलओवर यानी बकाया को अगले महीने जाने से रोक दीजिए। इसके बाद पर्सनल लोन पर आइए और उसे भी चुका दीजिए। आवास ऋण की बारी सबसे बाद में आनी चाहिए। बर्वे कहते हैं, 'बैलेंस ट्रांसफर की कोशिश भी कर सकते हैं, जिसमें आपके बकाये पर पहले के मुकाबले कम ब्याज दर लग सकती है। लेकिन ऐसा करने से पहले आकड़ों का हिसाब-किताब कर लीजिए और देख लीजिए कि इससे आपकेा अच्छी खासी बचत हो रही है या नहीं। साथ ही यह भी ध्यान रखिए कि समय पूर्व भुगतान करने पर आपको किसी तरह का शुल्क या जुर्माना तो नहीं चुकाना पड़ रहा।'

अटकलों से बचकर रहें

अगर आप शेयर बाजारों में निवेश करते हैं तो तीसरी लहर के बारे में अटकलों से घबराकर बदहवासी में बिकवाली न कर दें। जहां तक संभव हो अपने सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में निवेश जारी रखें। सटोरिया गतिविधियों में किसी भी कीमत पर लिप्त नहीं हों यानी किसी की सुनकर शेयरों और क्रिप्टोकरेंसी में कारोबार शुरू मत कर दें। याद रखिए कि भविष्य की संभावनाएं जितनी अधिक धूमिल होंगी, जोखिम भरी संपत्तियां उतनी ही लुढ़कती जाएंगी। अगर आप उन पर दांव खेलते हैं और आपको घाटा होता है तो आपकी वित्तीय मुश्किलें और भी बढ़ जाएंगी।

Keyword: तीसरी लहर, आपात कोष, निजी स्वास्थ्य बीमा, कर्ज का बोझ,
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