बिजनेस स्टैंडर्ड - उधारी के बोझ से पानी है निजात, छोटे कर्ज से करें शुरुआत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, July 05, 2022 02:49 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

उधारी के बोझ से पानी है निजात, छोटे कर्ज से करें शुरुआत

बिंदिशा सारंग /  November 28, 2021

आपने स्क्विड गेम तो देखा ही होगा। यह नेटफ्लिक्स पर आ रहा वही दक्षिण कोरियाई शो है, जो लोकप्रियता के चरम पर है और जिसकी चारों ओर चर्चा हो रही है। इस शो में कुछ ऐसे लोग दिखाए गए हैं, जो गले तक कर्ज में डूब चुके हैं और उससे निजात पाने के लिए जान की बाजी लड़ाने वाला एक खेल खेलने को राजी हो जाते हैं। शुक्र है कि निजी जिंदगी में आपको कर्ज के जाल से निकलने के लिए स्क्विड गेम खेलने की जरूरत नहीं पड़ती।

अगर आप जांचे-परखे तरीके अपनाते हैं तो आराम से कर्ज का बोझ उतार सकते हैं।

इकट्ठा कीजिए सारा कर्ज

कई तरह के कर्ज लेना और समय से उन सबके भुगतान का ध्यान रखना आसान काम नहीं होता। इसलिए सारे कर्ज एक जगह इकट्ठा करना सबसे अच्छी रणनीति रहती है। इसके लिए आपको नया कर्ज लेना पड़ता है और उस कर्ज से पुराने सभी उधार एक साथ चुकाने होते हैं।

बैंकबाजार के मुख्य कार्य अधिकारी (सीईओ) आदिल शेट्टी समझाते हैं, 'दरअसल कर्ज को एक साथ इकट्ठा करने (डेट कंसॉलिडेशन) से आपको बहुत सारे छोटे कर्ज एक साथ लाने में मदद मिलती है। हो सकता है कि इस कर्ज को चुकाने की शर्तें अधिक आसान हों और आपके लिए अधिक अनुकूल हों मसलन ब्याज दर कम हो या मासिक किस्त (ईएमआई) ज्यादा किफायती हों। इससे आपको अपनी कुल उधारी पर नजर रखने में मदद मिलती है और क्योंकि पहले के मुकाबले कम ईएमआई देखनी पड़ती हैं।'

डेट कंसॉलिडेशन लोन में कर्ज का एक समझौता करना पड़ता है। इस समझौते में साफ लिखा होता है कि कर्ज की रकम का इस्तेमाल पहले से मौजूद उधारी चुकाने में ही किया जा सकता है और पुरानी उधारी एक निश्चित समय के भीतर चुकानी होगी। इसमें किसी तरह की देर या हीलाहवाली नहीं की जा सकती। कंसॉलिडेशन अवधि के दौरान यानी एकमुश्त कर्ज अदायगी के दौरान आपको नया कर्ज लेने से रोका भी जा सकता है।

मगर इसमें सारे कर्ज शामिल नहीं होते हैं। ऐंड्रोमीडिया और अपनापैसा के सीईओ वी स्वामीनाथन बताते हैं, 'आप उन्हीं कर्जों को कंसॉलिडेट यानी एक जगह इइकट्ठा कर सकते हैं, जो किसी संपत्ति के एवज में नहीं लिए गए हैं। इसका मतलब है कि बिना जमानत के कर्ज जैसे क्रेडिट कार्ड का बकाया, पर्सनल लोन और शिक्षा ऋण को कंसॉलिडेट किया जा सकता है।' तमाम उधारियों को एकमुश्त कर्ज में समेटने से आपका क्रेडिट स्कोर सुधर जाता है।

स्वामीनाथन कहते हैं, 'रिवॉल्विंग यानी बकाया अगले महीने में चले जाने वाला कर्ज चुका देने से आपको अपने क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल की दर 30 फीसदी से नीचे लाने में मदद मिल सकती है। लगातार समय पर भुगतान करने से कुल कर्ज में कमी आने से आपकी क्रेडिट रेटिंग भी पहले से बेहतर होती जाएगी।'

सबसे महंगा कर्ज पहले


ज्यादातर वित्तीय योजनाकार और कर्ज के मामले में परामर्श देने वाले यही रणनीति अपनाने की सलाह देते हैं। इसमें सबसे पहले अपने सारे कर्ज की फेहरिस्त बनाइए और देखिए कि आप किस पर कितनी दर से ब्याज चुका रहे हैं। सबसे अधिक ब्याज दर वाला यानी सबसे महंगा कर्ज सबसे ऊपर रखिए और सबसे कम ब्याज दर वाला यानी सबसे सस्ता कर्ज सबसे नीचे। अब ऊपर से कर्ज चुकाते जाइए यानी सबसे महंगा कर्ज सबसे पहले निपटा दीजिए।

माईमनीमंत्रा के प्रबंध निदेशक राज खोसला की सलाह ध्यान देने लायक है। वह कहते हैं, 'सबसे पहले क्रेडिट कार्ड के बकाये से शुरू कीजिए क्योंकि आपका सबसे महंगा कर्ज यही होता है। इसके बाद बिना जमानत के कर्ज निपटाइए। इनमें पर्सनल लोन जैसी उधारी आती है। सबसे महंगा कर्ज सबसे पहले चुकाना आपके लिए किफायती भी रहता है क्योंकि आपकी जेब से इस कर्ज का मोटा ब्याज निकलना बंद हो जाता है।'

मगर कर्ज देने वाली संस्थाओं की नजर में अच्छा ग्राहक बने रहने के लिए सबसे पहले आपको एक बात ध्यान रखनी पड़ेगी। कोई भी कर्ज हो, उसकी न्यूनतम बकाया राशि हर हाल में चुकाएं ताकि आप डिफॉल्टर की श्रेणी में न आ जाएं। आप न्यूनतम बकाया राशि हर महीने चुकाते रहते हैं और अचानक आपके पास कुछ रकम बच जाती है तो उस रकम का इस्तेमाल उस कर्ज के समय पूर्व आंशिक भुगतान में करें, जिस पर आपको सबसे ऊंची दर से ब्याज चुकाना पड़ रहा है। उस कर्ज को पूरी तरह चुकाने के बाद अपनी फेहरिस्त उठाएं और सबसे अधिक ब्याज दर वाले अगले कर्ज पर आ जाएं। उसे चुकाएं और फिर बची उधारियों में सबसे महंगी उधारी पर आएं। यह तरीका अपनाएंगे तो आप अपनी उधारियों से जल्द से जल्द मुक्ति पा लेंगे।

डेट स्नोबॉल

यह वित्तीय बाजार का तकनीकी शब्द है। इसमें आप ऊपर बताए तरीके को पूरी तरह भूल जाते हैं और सबसे छोटी उधारी पहले चुकाते हैं। इस तरीके में आप छोटे से बड़े कर्ज की ओर चलते हैं चाहे उन पर ब्याज दर कितनी भी क्यों न हो। आपके जो भी कर्ज चल रहे हैं, उनका न्यूनतम भुगतान कर दीजिए। उसके बाद आपके पास जो भी रकम बच रही है, उससे अपना सबसे छोटा कर्ज सबसे पहले चुकाइए। उस कर्ज की अदायगी के बाद बची हुई उधारियों में से सबसे छोटी उधारी पर आइए और उसे भी निपटा दीजिए।

एमबी वेल्थ फाइनैंशियल सॉल्यूशंस के संस्थापक एम बर्वे इस तरीके के फायदे समझाते हैं। वह कहते हैं, 'यह तरीका हौसला बढ़ाने और बरकरार रखने वाला है। आपका सबसे छोटा कर्ज चाहे कितनी भी छोटी रकम का हो मगर जब आप उसे चुकाकर फारिग हो जाते हैं तो आपकी मनोदशा पर बहुत सकारात्मक असर पड़ता है।' 2016 में हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के लिए शोध करने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि स्नोबॉल यानी सबसे छोटा कर्ज सबसे पहले चुकाने का तरीका वास्तव में सबसे ज्यादा असरदार और कारगर होता है। सबसे कम बकाया रकम वाला उधारी खाता सबसे पहले खत्म करने से लोगों को ज्यादा खुशी मिलती है। उन्हें लगता है कि उन्होंने सही दिशा में पहला कदम बढ़ा दिया है। इससे उन पर तगड़ा असर भी होता है और उन्हें कर्ज खत्म करने के रास्ते पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा भी मिलती है। हालांकि इस बात में कोई शक नहीं कि स्नोबॉल कर्ज से मुक्ति पाने का सबसे महंगा तरीका है और इसमें काफी वक्त भी लग जाता है मगर अब तक यही सबसे ज्यादा कामयाब तरीका साबित हुआ है।

कर्ज से मुक्ति पाने की हड़बड़ी तो सभी को होती है मगर आपको कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए। अगर आपने कुछ ऐसे कर्ज लिए हैं, जिन्हें वक्त से पहले खत्म करने पर प्री-पेमेंट शुल्क लिए जाने की शर्त है तो उन्हें खत्म करने से पहले सोचिए कि यह आपके लिए महंगा सौदा तो नहीं है। मगर आपको लगता है कि तमाम कर्जों की जो ईएमआई आप चुका रहे हैं, उनका जोड़ आपकी मासिक आय के 35-40 फीसदी से अधिक है तो स्क्विड गेम जैसे कर्ज के जाल में फंसने से बचने के लिए ऊपर बताया गया कोई भी तरीका अपना लीजिए और महंगी उधारी से जल्द से जल्द मुक्ति पा लीजिए।

Keyword: निवेश, उधारी, छोटे कर्ज, रणनीति, बैंकबाजार, मासिक किस्त, ईएमआई, क्रेडिट कार्ड,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या ई-चालान का दायरा बढ़ने से छोटे कारोबारियों को होगी मुश्किल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.