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एक महीने के खर्च के बराबर नकदी घर में रखें

बिंदिशा सारंग /  November 14, 2021

डिजिटल भुगतान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, खास तौर पर महानगरों और शहरी इलाकों में। लेकिन नकदी का अब भी दबदबा है। इस समय 28.5 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा चलन में है। नोटबंदी के दौरान 18 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा चलन में थी यानी इसमें पिछले पांच साल के दौरान 58.3 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। मोटे तौर पर इन रुझानों को देखते हुए नकदी प्रबंधन के लिए आपकी व्यक्तिगत रणनीति होनी चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि नकदी को तीन हिस्सों में बांटा जाना चाहिए- घर पर रखी नकदी, आपात स्थिति के लिए जमा की गई नकदी और आपके पोर्टफोलियो में नकद रिजर्व।

घर पर नकदी

भले ही आपके पास बहुत से भुगतान ऐप, कार्ड और बैंक खाते हो, लेकिन फिर भी कुछ नकदी घर पर रखना उचित है। टीबीएनजी कैपिटल एडवाइजर्स के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) तरुण बिरानी ने कहा, 'घर पर नकदी एक महीने या अधिकतम दो महीने के खर्च के बराबर होनी चाहिए।' अगर बैंक या एटीएम बंद रहते हैं या बार-बार निकासी संभव नहीं है तो यह धनराशि बहुत मददगार साबित होगी। इस समय घर पर नकदी रखने की कोई सीमा नहीं है। सीजेएस लॉ एसोसिएट्स में प्रबंध साझेदार चिराग जे शाह ने कहा, 'इस समय भारतीय रिजर्व बैंक या भारत सरकार की ऐसी कोई आधिकारिक नीति नहीं है, जो घर पर नकदी रखने की कोई सीमा तय करती है। हालांकि जांच के मामले में व्यक्ति को धन के स्रोत के बारे में बताना होगा।'

आपात कोष

घर पर नकदी के अलावा आपको एक आपात कोष रखना चाहिए, जिसे आप इस्तेमाल कर सकें। एमबी वेल्थ फाइनैंशियल सॉल्यूशंस के संस्थापक एम बर्वे ने कहा, 'कुछ पैसा लिक्विड योजनाओं में रखें ताकि अगर आपको इलाज पर खर्च जैसा कोई भुगतान अचानक करना पड़े तो आप उसका तुरंत इस्तेमाल कर पाएं। यह कोष तीन से छह महीनों के खर्च के बराबर होना चाहिए।'

मासिक खर्च की गणना में ईएमआई और बीमा प्रीमियम को भी शामिल करें ताकि किसी आपात स्थिति में आपको सेवानिवृत्ति कोष जैसे अपने लंबी अवधि के निवेश को नहीं छूना पड़े। बिरानी ने कहा, 'अपने आपात कोष को लिक्विड फंडों, सावधि जमाओं (एफडी) और बचत खाते में रखें।'

वह कहते हैं कि इस समय आर्बिट्राज फंड में निवेश एक अच्छा विचार है क्योंकि वे कर बाद बेहतर प्रतिफल देते हैं। हालांकि इसमें आपको अपना निवेश भुनाने में तीन से पांच दिन का समय लगेगा, जबकि आप किसी लिक्विड फंड में अपना निवेश 24 घंटे के भीतर भुना सकते हैं। एफडी के लिए स्वीप-इन सुविधा चुनें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपको एफडी का प्रतिफल मिलेगा, लेकिन आप एफडी से जुड़े अपने स्वीप-इन बचत या चालू खाते से तुरंत पैसा निकाल पाएंगे।

पोर्टफोलियो में कैश रिजर्व

वारेन बफेट जैसे बहुत से बड़े निवेशक हाथ में मोटी नकदी रखते हैं। लेकिन क्या आपको वही रणनीति अपनानी चाहिए? विशेषज्ञों के इस विषय में अलग-अलग मत हैं। आनंद राठी प्रिफर्ड की हेड (प्रॉडक्ट्स) झरना अग्रवाल कहती हैं, 'अपनी धनराशि को सभी परिसंपत्ति श्रेणियों में निवेश करें। अगर कोई परिसंपत्ति श्रेणी बहुत शानदार प्रदर्शन करती है तो इसमें थोड़ी बहुत मुनाफावसूली करें और इसे उस अन्य परिसंपत्ति श्रेणी में निवेश कर दें, जिसमें आपका निवेश कम है। किसी दुर्लभ मामले में ही किसी मौके के लिए अपने हाथ में नकदी रखें, लेकिन इसे छह महीने से ज्यादा अपने हाथ में नहीं रखें।' अग्रवाल कहती हैं कि पूरी राशि के निवेश से कैश ड्रैग यानी निवेशक के अपनी 100 फीसदी धनराशि को निवेश नहीं करने से पोर्टफोलियो में कमजोरी से बचने में मदद मिलती है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आप आने वाले मौकों को भुनाने के लिए कुछ नकदी रख सकते हैं। बिरानी कहते हैं, 'निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो मेें कोर और सैटेलाइट तरीका अपनाना चाहिए। सैटेलाइट पोर्टफोलियो में लघु अवधि के मौकों का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने के लिए पैसा योजनाबद्ध तरीके से लगाया जाता है, इसलिए आपको कुछ पैसा नकद रखना होगा।' उदाहरण के लिए अगर आपने स्मॉल कैप फंडों (आपके सैटेलाइट पोर्टफोलियो में रखे हुए) में मुनाफावसूली की है तो आप उसे पैसे को कोई उपयुक्त मौका आने तक नकद रख सकते हैं। अपनी निवेश योजना खुद बनाने वाले निवेशकों के लिए बर्वे सुझाव देते हैं कि उन्हें एक आपात कोष बनाना चाहिए और उसके बाद उन्हें अपने पोर्टफोलियो में 5 फीसदी से ज्यादा नकदी नहीं रखनी चाहिए।

Keyword: नकदी, डिजिटल भुगतान, नोटबंदी, ऐप, कार्ड, बैंक खाते, आपात कोष, एफडी,
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