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तीन वर्षों का कार्यकाल विस्तार और तीन चुनौतियां

बैंकिंग साख
तमाल बंद्योपाध्याय /  November 08, 2021

प्रिय गवर्नर

बधाई

आप ऐसे पहले गवर्नर नहीं हैं जिनका कार्यकाल बढ़ाया गया है मगर कुछ विशेष बातें आपको एक विशिष्ट पहचान देती हैं। पहला कार्यकाल लगभग पूरा करने और दूसरे कार्यकाल की तरफ बढ़ते हुए अपने कई कीर्तिमान तोड़े हैं। जब आप दिसंबर 2024 में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करेंगे तो आप सर बेनेगल रामा राव के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के इतिहास में कम से कम छह वर्षों तक गवर्नर पद पर बने रहने वाले दूसरे व्यक्ति होंगे। क्या इससे पहले किसी गवर्नर को एक ही बार में तीन वर्षों का कार्य विस्तार दिया गया था? मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने से ढाई महीने पहले विस्तार मिलना ऐसी उपलब्धि है जो संभवत: पहले किसी को नहीं मिली थी।

आपको कार्य विस्तार दिए जाने के कुछ ही दिन बाद एक स्तंभ लिखना मेरे लिए सरल नहीं है। यही वजह है कि मैंने नियमित स्तंभ लिखने के बजाय इस बार एक खुला पत्र लिखने का प्रयास किया है। यह तथ्य कोई अस्वीकार नहीं कर सकता कि बतौर आरबीआई गवर्नर अपने प्रतिकूल हालात देखे हैं। कार्यकाल का पहला वर्ष एनबीएफसी क्षेत्र और येस बैंक के संकट से निपटने में चला गया। येस बैंक को उबरे एक सप्ताह ही हुए थे कि कोविड-19 महामारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर गाज गिरा दी। उत्पन्न हालात को संभालने के लिए आपने ब्याज दरें ऐतिहासिक निचले स्तर पर कर दीं और वित्तीय प्रणाली को नकदी से लबरेज कर दिया। कोविड संकट से निपटने के लिए आपने कई ऐसे कदम उठाए जो लीक से हटकर थे। आपने अक्टूबर में अपने वक्तव्य में स्वयं कहा था कि अप्रैल 2020 के  बाद से आरबीआई ने कम से कम 100 उपाय किए हैं।

नोटबंदी के दौरान आप सरकार का चेहरा बन गए थे। ऐसे में जब आप आरबीआई गवर्नर बनाए गए तो कई लोगों का यह सोचना स्वाभाविक ही था कि केंद्रीय बैंक पर सरकार अपनी पकड़ और मजबूत करेगी। आपको तीन वर्षों का कार्यकाल मिलना इस बात का संकेत है सरकार आपके साथ सहज अनुभव करती है। मगर इससे आपके कटु आलोचकों को यह कहने का मौका कतई नहीं मिलेगा कि आपने केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता के साथ समझौता कर लिया। इन बातों से इतर अब उन चुनौतियों का जिक्र करते हैं तो दूसरे कार्यकाल में आपके समक्ष होंगे।

पहली चुनौती: अब आर्थिक प्रोत्साहन धीरे-धीरे वापस लिए जाने का समय आ गया है। आप कहते रहे हैं कि आर्थिक वृद्धि दर मजबूत बनाने तक आरबीआई अपना उदार रवैवा जारी रखेगा। मगर वैश्विक रुझान आपको इस बात की अनुमति नहीं देंगे। ब्याज दरें ऐतिहासिक निचले स्तर पर रखकर आपने आर्थिक सुधार का मार्ग जरूर प्रशस्त किया है मगर ये असाधारण उपाय वापस लेने में देरी हुई तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं। वैश्विक स्तर पर अल्प अवधि की ब्याज दरें बढ़ रही हैं और बाजारों में इसका असर दिखने लगा हैं। कई तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक एक महीने पहले की तुलना में अब अधिक चौकन्ने हो गए हैं। परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और तेल की बढ़ती कीमतें इस बदलाव को और अधिक हवा दे रही हैं। क्या आप इन बदलती परिस्थितियों को नजरअंदाज कर पाएंगे? अगर आप कदम नहीं उठाएंगे तो अपने पूर्ववर्ती डी सुब्बाराव की तरह ही कहलाएंगे जिन्होंने ब्याज दरें तेजी से घटाई थीं मगर उन्हें बढ़ाने में वह सुस्त रहे थे। वास्तव में अगले तीन वर्षों के दूसरे कार्यकाल में केवल ब्याज दरें बढ़ती रहीं तो भी मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा।

दूसरी चुनौती: वित्तीय क्षेत्र में डिजिटल क्रांति से होने वाली उठापटक से निपटने के लिए केंद्रीय बैंक को तैयार करना आपकी दूसरी चुनौती होगी। वित्त-तकनीक (फिनटेक) क्षेत्र की कंपनियां अपनी पैठ तेजी से बढ़ा रही हैं। इस नए दौर में कई बैंकों के सामने कारोबार बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। मैं समझता हूं कि आप इस नए चलन को बढ़ावा देंगे मगर आरबीआई को इस डिजिटल खेल में निर्णायक की भूमिका निभाने के लिए नए कौशल की जरूरत होगी। अन्यथा डिजिटल क्रांति से होने वाली उठापटक वित्तीय क्षेत्र के स्थायित्व के लिए खतरा पैदा कर देगी। इन बदली परिस्थितियों में आरबीआई को ऋण आवंटन को भी अलग नजरिये से देखना होगा। अब केवल बैंक और एनबीएफसी ही अकेले कर्जदाता नहीं रह गए हैं। क्रिप्टोकरेंसी पर भी आपको निर्णय लेना होगा। इन मुद्राओं पर प्रतिबंध लगाना इन्हें नियमित करने की तुलना में आसान होगा क्योंकि ये भुगतान प्रणाली या परिसंपत्ति एवं जिंस इनमें किसी का हिस्सा नहीं हैं। अब यह भी एक सवाल है कि क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगता है तो इनमें निवेश कर चुके लाखों निवेशकों का क्या होगा? इस विषय पर जल्द कोई निर्णय लेना होगा क्योंकि ऐसा नहीं होने पर परिणाम अधिक हानिकारक होंगे। अब केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) का समय भी आ गया है। यह क्रिप्टोकरेंसी की जगह नहीं लेगा बल्कि केवल एक वॉलेट की तरह ही होगा। सीबीडीसी की दिशा में पहल यह संकेत देगी कि आरबीआई डिजिटल युग में नई चुनौतियों से निपटने के लिए मुस्तैद है।

तीसरी चुनौती: आपको बैंकिंग क्षेत्र में कंपनियों के प्रवेश पर निर्णय लेना होगा। पिछले नवंबर में आबीआई के एक आंतरिक समूह ने बैंकिंग क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण बदलाव का संकेत दिया था। आप तब से कोविड महामारी और मंदी से लडऩे में व्यस्त रहे हैं। इस बीच, सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण की घोषणा कर दी है। समाचार माध्यमों में आ रही खबरों के अनुसार आरबीआई के साथ समन्वय के साथ इस विषय पर कार्य चल रहा है। हम सभी ये देखने के लिए उत्सुक हैं कि चीजें किसी तरह बदलती हैं।  

इस पत्र का उद्देश्य आपको यह बताना नहीं है कि क्या किया जाना चाहिए। मैं केवल कुछ विषयों की तरफ उस गवर्नर का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं जो एक अच्छे श्रोता भी हैं।

आपका

तमाल बंद्योपाध्याय

Keyword: कार्यकाल विस्तार, चुनौतियां, गवर्नर, कीर्तिमान, आरबीआई, खुला पत्र,
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