बिजनेस स्टैंडर्ड - भारतीय रिजर्व बैंक ने श्रेय को क्यों दिया झटका?
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, December 07, 2021 01:31 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

भारतीय रिजर्व बैंक ने श्रेय को क्यों दिया झटका?

बैंकिंग साख
तमाल बंद्योपाध्याय /  October 26, 2021

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) कोलकाता की दो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की दिवालिया प्रक्रिया को अंजाम देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। ये दो कंपनियां श्रेय इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस  (एसआईएफएल) और श्रेय इक्विपमेंट फाइनैंस (एसईएफएल) हैं। संचालन गुणवत्ता पर उत्पन्न चिंताओं और ऋण भुगतान में असफल रहने के बाद आरबीआई ने 4 अक्टूबर को इन दोनों कंपनियों के निदेशकमंडलों को बर्खास्त कर दिया था। केंद्रीय बैंक के इस कदम से इन कंपनियों के प्रवर्तकों को तगड़ा झटका लगा और उन्होंने सभी 'आवश्यक' कानूनी उपाय करने की बात कही। श्रेय समूह ने 6 अक्टूबर को बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की किसी पहल पर रोक लगाने का अनुरोध किया। मगर उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी जिसके बाद आरबीआई निगमित ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया प्रक्रिया शुरू कराने के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), कोलकाता पीठ पहुंच गया। पीठ ने आरबीआई का प्रस्ताव सुनवाई के लिए तत्काल स्वीकार कर लिया। 12 अक्टूबर को दोनों कंपनियों के अंकेक्षकों को अप्रैल 2022 से दो वर्षों के लिए किसी भी नियमित इकाई में अंकेक्षण करने से प्रतिबंधित कर दिया गया।

श्रेय समूह के संचालन और इसकी कारोबारी गतिविधियों को लेकर पहले भी ऐसे मामले उठ चुके हैं। दोनों कंपनियों के निदेशकमंडलों ने जुलाई 2019 में इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस कंपनी का ऋण, पट्टा एवं ब्याज उपार्जन कारोबार इक्विपमेंट फाइनैंस कंपनी को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी थी। दोनों कंपनियों के निदेशकमंडलों ने इसके लिए 'स्लंप सेल' को जरिया बनाया था। मगर इस समूह के ऋणदाताओं ने इसे अपनी मंजूरी नहीं दी।

स्लंप सेल किसी कंपनी का कारोबार, हिस्सा आदि स्थानांतरित करने का जरिया है। इसके तहत संबंधित कंपनी की परिसंपत्ति एवं देनदारियां एक एकमुश्त रकम के बदले स्थानांतरित कर दी जाती हैं। इस प्रक्रिया में प्रत्येक परिसंपत्ति एवं देनदारी का मूल्यांकन नहीं होता है। स्लंप सेल के बाद इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस कंपनी का बहीखाता वित्त वर्ष 2018 के 18,134 करोड़ रुपये से कम होकर वित्त वर्ष 2019 में 15,577.94 करोड़ रुपये रह गया। वित्त वर्ष 2020 में यह और कम होकर 3,860 करोड़ रुपये तक सिमट गया। इसी दौरान इक्विपमेंट फाइनैंस कंपनी का बहीखाता 24,805 करोड़ रुपये से बढ़कर 26,607.32 और फिर 37,038.74 करोड़ रुपये हो गया।

इससे बैंकिंग नियामक को कोई खास परेशानी नहीं हुई मगर पूंजी में आई कमी ने इसके कान खड़े कर दिए। किसी इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस कंपनी के लिए कम से कम 300 करोड़ रुपये पूंजी और 15 प्रतिशत पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीएआर) की शर्तों का पालन करना आवश्यक हैं। वित्त वर्ष 2019 में एसआईएफएल की पूंजी मात्र 127 करोड़ रुपये थी जो 2020 तक बढ़कर 153 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2010 में सीआरआर 0.94 प्रतिशत था जो वित्त वर्ष 2020 में सुधर कर 8.86 प्रतिशत हो गया। वित्त वर्ष 2018 में कंपनी की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) इसकी कुल परिसंपत्तियों का करीब 40 प्रतिशत तक हो गईं जो वित्त वर्ष 2019 तक कम होकर 30 प्रतिशत रह गईं।

इस बीच, एसईएफएल का सकल एनपीए वित्त वर्ष 2020 तक बढ़कर करीब 36 प्रतिशत पहुंच गया जो वित्त वर्ष 2018 में 11 प्रतिशत से भी कम था। इसी दौरान सीएआर लगभग 14 प्रतिशत से कम होकर -3.4 प्रतिशत रह गया। श्रेय समूह के प्रवर्तक कनोरिया बंधु-हेमंत और सुनील- दोनों कंपनियों के निदेशकमंडल में शामिल थे। कभी भी ऐसा नहीं हुआ जब उनमें कोई भी सभी महत्त्वपूर्ण निदेशकमंडल समितियों में शामिल नहीं थे। ये समितियां उधार देने के सभी निर्णयों में अहम भूमिका निभाती थीं। कुछ इकाइयों ने दोनों कंपनियों से अपने बहीखाते की तुलना में कहीं अधिक अनुपात में ऋण लिए थे। कुछ ऐसे कर्जधारक भी थे जिन्हें निवेश पर 1 प्रतिशत प्रतिफल की दर से एक दशक तक कर्ज चुकाने से अस्थायी छूट दे दी गई और जमा 11-12 प्रतिशत ब्याज का भुगतान इस अवधि की समाप्ति के बाद लिए जाने की व्यवस्था की गई।

दोनों कंपनियों ने जितनी रकम उधार दी थी उसका करीब दो तिहाई हिस्सा संबंधित पक्षों एवं समूह की दूसरी इकाइयों को दिया गया था। सिललिसा यहीं नहीं थमा। आवंटित ऋणों पर केवल ब्याज वसूला जा रहा था और मूलधन जस का तस था। इतना ही नहीं, नए ऋण देकर कई एनपीए खाते बंद करा दिए गए। ये ऋण या तो कर्जधारक से जुड़ी दूसरी इकाइयों को दिए गए या दूसरे खाते में डाले गए मगर किसी न किसी तरह रकम भुगतान में चूक करने वाली इकाइयों के पास ही पहुंच गई। ऐसा प्रतीत होता है कि आरबीआई के पास बहुत अधिक विकल्प नहीं रह गए थे। प्रवर्तकों ने नई पूंजी नहीं जुटाई और न ही फंसे ऋणों के लिए पर्याप्त प्रावधान किए। कंपनी संचालन सुधारने पर भी प्रवर्तकों ने ध्यान नहीं दिया जबकि आरबीआई ने उन्हें ऐसा करने का सख्ता निर्देश दिया था। वित्त वर्ष 2021 के लिए समेकित वित्तीय नतीजों पर सांविधिक ऑडिटरों की रिपोर्ट ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी। रिपोर्ट में शुद्ध परिसंपत्ति में कमी, विभिन्न नियामकीय अनुपातों के अनुपालन में कोताही का जिक्र था। इसमें कारोबार जारी रखने की कंपनियों की क्षमता को लेकर भी आशंका जताई गई।

कुछ वर्ष पहले बीएनपी पारिबा लीज ग्रुप तगड़ा नुकसान झेलने के बाद एसआईएफएल के साथ अपने इक्विपमेंट फाइनैंसिंग संयुक्त उद्यम कारोबार से बाहर हो गई थी। कंपनी पिछले सात वर्षों से इस कारोबार का हिस्सा थी। एक पेचीदा सौदे में एसआईएफएल ने संयुक्त उद्यम एसईएफएल में बीएनपी पारिबा की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके बदले बीएनपी को एसआईएफएल में मात्र 5 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली जिस वजह से उसे अपने शुरुआती निवेश 775 करोड़ रुपये पर भारी नुकसान उठाना पड़ा।

Keyword: रिजर्व बैंक, श्रेय, आरबीआई, एनबीएफसी, दिवालिया प्रक्रिया, एसआईएफएल, एसईएफएल,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आने वाले समय में भारत-रूस के सामरिक संबंध होंगे मजबूत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.