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पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का काम पटरी पर, अनाज से इसे बनाने को लेकर चिंता

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 10 17, 2021

पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का भारत का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य सही राह पर बढ़ता नजर आ रहा है। अगर लक्षित क्षमता परिचालन में आ जाती है और दाम लंबे समय तक आकर्षक बने रहते हैं तो मिश्रण का काम योजना के मुताबिक रहने की संभावना है

हालांकि मूल्य निर्धारण में अंतर वजह से गन्ना आधारित एथनॉल की तुलना में अनाज आधारित डिस्टिलरी स्थापित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बिजली और स्टीम के अधिक दाम, कच्चे माल की नियमित आपूर्ति प्राप्त करने, खासकर मकई आपूर्ति को लेकर समस्याएं और कन्वर्जन मार्जिन की स्थिरता की वजह से ऐसी चुनौती की संभावना है।

इसके बावजूद कई लोगों को उम्मीद है कि केंद्र द्वारा इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की उत्सुकता की वजह से इसकी राह में आने वाली दिक्कतें आसान हो जाएंगी। लेकिन मौजूदा स्थिति से संभवत: इस बात का पता चलता है कि बाजार में अनाज आधारित डिस्टिलरी से कुल एथनॉल आपूर्ति का 15 प्रतिशत से भी कम आपूर्ति क्यों हो रही है।

आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 तक लगभग 60 लाख टन अतिरिक्त चीनी का का इस्तेमाल एथनॉल उत्पादन में किया जाएगा। ऐसा न करने की स्थिति में इस चीनी का बिना सब्सिडी के निर्यात करना पड़ेगा, क्योंकि विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अंतर्गत भारत दिसंबर 2023 के बाद अपने चीनी निर्यात को सब्सिडी नहीं दे पाएगा।


योजना

वर्ष 2025 तक 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए भारत को 10 अरब से 11 अरब लीटर एथनॉल का उत्पादन करने की आवश्यकता होगी, जिसमें से छह अरब से लेकर साढ़े छह अरब लीटर एथनॉल गन्ने से आएगा और बाकी भाग में मकई तथा अनाज आधारित स्रोतों का योगदान होगा।

इस मात्रा का उत्पादन करने के लिए 12 अरब लीटर एथनॉल वाली क्षमता स्थापित करनी होगी, जिसमें से साढ़े छह अरब से लेकर सात अरब लीटर तक गन्ने से और शेष मकई आधारित डिस्टिलरी से मिलेगा।

वर्तमान में कुल एथनॉल उत्पादन क्षमता लगभग छह अरब लीटर है, जिसमें से गन्ना स्रोतों से उत्पादित एथनॉल 5.25 अरब लीटर रहता है, जबकि मकई आधारित डिस्टिलरी से केवल 0.75 अरब लीटर मिलता है।

भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया 'ऐसा नहीं है कि अनाज से एथनॉल उत्पादन को किसी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि ऐसा इसलिए है, क्योंकि इन्होंने गन्ना आधारित एथनॉल उत्पादन की तुलना में बहुत बाद में शुरुआत की थी और इसलिए इसे रफ्तार पकडऩे में समय लग रहा है।'

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भी यह रफ्तार बहुत तेज होगी, क्योंकि कई राज्यों ने अनाज आधारित डिस्टिलरी स्थापित करने के लिए काफी सब्सिडी दी है, जिससे अतिरिक्त क्षमता निर्माण हो सकता है।


आपूर्ति कार्यक्रम

हाल ही में एक वेबिनार में वर्मा द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, जहां तक चीनी के ​​एथनॉल की ओर रुख किए जाने का संबंध है, तो तीन अरब लीटर एथनॉल की मौजूदा आपूर्ति में 20 लाख टन चीनी का एथनॉल में परिवर्तन किया जाना शामिल है।

अगर उद्योग प्रत्येक वर्ष में उत्पादित अतिरिक्त 50 लाख टन चीनी को हटाने में कामयाब हो जाता है, तो तीन अरब लीटर एथनॉल का और उत्पादन किया जा सकेगा, जिससे छह अरब से लेकर साढ़े छह अरब लीटर एथनॉल उपलब्ध हो जाएगा।

अनाज आधारित डिस्टिलरीज के मामले में इस्मा के अनुमान से पता चलता है कि 4 से 4.5 अरब लीटर एथनॉल उत्पादन मक्के और अनाज से होगा, जिसके लिए हर साल करी 1.6 से 1.7 करोड़ टन फसल की जरूरत होगी।  इस समय भारत में प्रति हेक्टेयर उपज 3 टन है और भारत मेंं साल में 2.8 करोड़ टन मक्के का उत्पादन होता है। अगर भारत में मक्के की उत्पादकता वैश्विक स्तर पर पहुंचकर प्रति हेक्टेयर 5 टन हो जाती है तो इससे सालाना 1.85 करोड़ टन अतिरिक्त मक्का मिल सकेगा, जो अनाज आधारित डिस्टिलरीज की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त होगा।

अगर इसके बावजूद कमी रहती है तो केंद्र के अनाज भंडार के अतिरिक्त अनाज को इस्तेमाल किया जा सकता है, जो अभी भी अस्थाई रूप से किया जा रहा है। वर्मा ने कहा कि हमें अभी लगता है कि मक्के की उत्पादकता में जल्द सुधार होगा क्योंकि एथनॉल उद्योग बेहतरीन खरीदार बनकर सामने आ रहा है। बिहार में मक्के की उत्पादकता पहले ही 6 टन प्रति हेक्टेयर है।


गडकरी फॉर्मूला

इसी वेबिनॉर में  परिवहन मंत्त्री नितिन गडकरी ने पेट्रोल में एथनॉल मिलाए जाने की जोरदार वकालत की और कहा कि बी-हैवी मोलैसिस में पहले से उत्पादित या तैयार चीनी का 15 से 20 प्रतिशत मिलाने का विचार रखा। गडकरी ने कहा कि इससे न सिर्फ अतिरिक्त चीनी का इस्तेमाल हो सकेगा, बल्कि तैयार चीनी को मोलैसिस में मिलाने से बेहतर गुणवत्त्ता का कच्च्चा माल मिलेगा और एथनॉल रिकवरी में सुधार होगा। बहरहाल कई विशेषज्ञों ने कहा कि इसके अपने नुकसान हैं और अतिरिक्त लागत उसमें से एक है।

Keyword: पेट्रोल, एथनॉल, अनाज, गन्ना, डिस्टिलरी, बिजली, विश्व व्यापार संगठन,
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