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रिटर्न दाखिल करिए झटपट ताकि बाद में न रहे कोई झंझट

बिंदिशा सारंग /  October 17, 2021

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आकलन वर्ष 2021-22 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख एक बार फिर बढ़ाने का फैसला किया है। जिन करदाताओं के खातों का ऑडिट नहीं होना है, वे अब 31 दिसंबर तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। पहले उन्हें इसके लिए 30 सितंबर तक की मियाद मिली थी।

कर विभाग के मुताबिक नए आयकर पोर्टल पर रोजाना 1 लाख से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा रहे हैं। हालांकि आखिरी तारीख अब बढ़ा दी गई है मगर तब तक इंतजार करने के बजाय आप जितनी जल्दी अपना रिटर्न भर देंगे उतना ही अच्छा रहेगा।

आयकर रिटर्न दाखिल करने में 20 मिनट से ज्यादा वक्त नहीं लगता। ऑनलाइन रिटर्न भरने में भी इतना ही समय लगता है। मगर कई बार लोग रिटर्न भरते समय कुछ गलतियां भी कर देते हैं। कर विशेषज्ञ अक्सर होने वाली ऐसी गलतियां गिना रहे हैं।

नई कर व्यवस्था या पुरानी ही

इस साल नई या पुरानी कर व्यवस्थाओं में से किसी एक में आयकर रिटर्न दाखिल करने का विकल्प दिया गया है। पुरानी व्यवस्था में करदाता को कटौती तथा रियायत के लाभ मिलते थे। नई व्यवस्था में कर की दर कम है मगर किसी भी तरह की कटौती और रियायत हासिल नहीं होती।

पीएसएल एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स में एसोसिएट पार्टनर सुविज्ञा अवस्थी कहती हैं, 'ज्यादा से ज्यादा कर बचाने के लिए आपके हिसाब से जो भी व्यवस्था अच्छी हो, उसे ही चुन लेना चाहिए। कर कटौती और रियायत हटाने के पीछे सरकार का विचार अनुपालन की प्रक्रिया को कम थकाऊ और जटिल बनाना है। नए बजट में बचत के विकल्पों को कम करने तथा करदाताओं के हाथों में अधिक रकम डालने की कोशिश की गई है।'

लेकिन व्यक्तिगत करदाताओं तथा हिंदू अविभाजित परिवारों को दोनों में से कोई एक व्यवस्था चुनने का विकल्प दिया गया है। टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज के विवेक जालान की राय है, 'कर बचाने वाली योजनाओं में निवेश करने वाले कर्मचारियों को पुरानी व्यवस्था चुननी चाहिए। बाकी लोगों के लिए नई व्यवस्था सही रहेगी।'

नई व्यवस्था चुनी जाए तो 15 लाख रुपये तक की आय पर कर की दर पुरानी व्यवस्था के मुकाबले कम रहेगी। नई व्यवस्था में 2.5 लाख रुपये तक की आय पूरी तरह कर मुक्त है। उसके बाद आय में हर 2.5 लाख रुपये का इजाफा होने पर 5 फीसदी, 10 फीसदी, 15 फीसदी, 20 फीसदी और 25 फीसदी की दर से कर वसूला जाता है और यह सिलसिला 15 लाख रुपये की आय तक चलता रहता है।

सही रिटर्न फॉर्म चुनें

आय की स्रोत के हिसाब से आयकर रिटर्न फॉर्म भी अलग-अलग होते हैं। प्रिवी लीगल सर्विस के मैनेजिंग पार्टनर मोइज के रफीक कहते हैं, 'रिटर्न दाखिल करते समय घोषणा करने में कोई भी गलती हो जाए तो उसे संशोधन के जरिये सही किया जा सकता है मगर उसके लिए जरूरी है कि रिटर्न अंतिम तिथि से पहले दाखिल किया जाए। कोई तथ्य छूट जाए या गलत जानकारी भर गई हो तो आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत उसमें संशोधन किया जा सकता है। लेकिन यदि इस प्रकार का संशोधन करने की नौबत आ गई है तो उसे संबंधित आकलन वर्ष खत्म होने से पहले या आकलन पूरा होने से पहले ही कर दिया जाना चाहिए।' मगर ध्यान रहे कि ऐसा हर मामले में नहीं होता है। यदि रिटर्न गलत फॉर्म में भर दिया गया हो तो उसे बतौर रिटर्न वैध माना जाएगा क्योंकि रिटर्न का ढांचा सही हो सकता है। बाकी किसी भी मामले में रिटर्न में गलती होने पर जुर्माना लग जाएगा।

बचत खाते से ब्याज आय न बताई हो

बैंक में अपने बचत खाते से आम तौर पर सभी को ब्याज के रूप में आय होती है। आयकर रिटर्न दाखिल करते समय इस आय को आय मद में दिखाना आवश्यक है। होस्टबुक्स के संस्थापक एवं चेयरमैन कपिल राणा बताते हैं, 'मगर 60 साल से कम उम्र वाला निवासी नागरिक आयकर अधिनियम की धारा 80टीटीए के तहत 10,000 रुपये तक की कटौती का दावा कर सकता है। अगर निवासी नागरिक की उम्र 60 साल या उससे ज्यादा है तो धारा 80टीटीबी के तहत वह 50,000 रुपये तक की कटौती का दावा कर सकता है।' राणा कहते हैं कि ब्याज से होने वाली आय की जानकारी नहीं दी गई तो इसे गलत जानकारी देना माना जाएगा और करदाता को आयकर विभाग से नोटिस मिल सकता है।

आय और टीडीएस तथा फॉर्म 26एएस में अंतर

आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म 26एएस पर नजर डालना कतई न भूलें। फॉर्म 26एएस में आय से जुड़ा समूचा ब्योरा, स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस), चुकाए गए अग्रिम कर, खुद आकलन कर भरा गया कर आदि दिया गया होता है। वास्तव में यह किसी भी वित्त वर्ष के दौरान कमाई गई आय के पूरे विवरण वाला वार्षिक कर स्टेटमेंट होता है। इसीलिए आयकर रिटर्न में आपने जो भी ब्योरा भरा है, वह फॉर्म 26एएस में दिए गए आय के ब्योरे से मिलना चाहिए।

निवेश एवं कर परामर्श फर्म फिनटू के संस्थापक मनीष पी हिंगर कहते हैं, 'आपने जो आय घोषित की है, अगर वह फॉर्म 26एएस में दी गई राशि से मेल नहीं खाती है तो आपको आयकर विभाग से नोटिस हर हाल में मिलेगा। यदि रिटर्न में दिखाई गई राशि वास्तविक राशि से कम है तो यह माना जाएगा कि आपने वास्तविक आय को कम कर दिखाने की कोशिश की है।'

लाभांश आय का खुलासा नहीं

आकलन वर्ष 2021-22 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करते समय लाभांश आय को कर योग्य आय के रूप में दिखाना होगा। टैक्समैन के उप महाप्रबंधक नवीन वाधवा बताते हैं, 'पहले शेयरधारक के हाथ में आने वाले लाभांश को कर से छूट मिली हुई थी। अब यह कर योग्य हो गया है और 'अन्य स्रोतों से आय' के तहत इसका खुलासा करना पड़ता है।' आयकर रिटर्न फॉर्म में लाभांश आय को तिमाहीवार ब्योरा देना होगा यानी 15 जून, 2020 तक मिले लाभांश, 16 जून से 15 सितंबर, 2020 तक मिले लाभांश, 16 सितंबर से 15 दिसंबर, 2020 तक, 16 दिसंबर, 2020 से 15 मार्च, 2021 तक और 16 मार्च से 31 मार्च, 2021 तक मिले लाभांश की जानकारी देनी होगी। वाधवा समझाते हैं, '5,000 रुपये से अधिक लाभांश मिला होगा तो उस पर 10 फीसदी टीडीएस भी वसूला जाएगा। इसलिए ऐसी आय का खुलासा नहीं करने पर कर विभाग से नोटिस मिल सकता है।'

करमुक्त आय का ब्योरा

कुछ खास तरह की आय कर से मुक्त होती हैं और उन्हें आयकर अधिनियम की धारा 10 के तहत यह छूट मिली हुई है। मगर करदाता को इस तरह की आय का ब्योरा भी अपने आयकर रिटर्न में देना होगा। मिगलानी, वर्मा ऐंड कंपनी (एडवोकेट्स, सॉलिसिटर्स ऐंड कंसल्टेंट्स) के मैनेजिंग पार्टनर निखिल वर्मा याद दिलाते हैं, 'ध्यान रहे कि यह ब्योरा फॉर्म 26एएस में दिए गए ब्योरे से एकदम मिलता हो। आयकर विभाग विभिन्न स्रोतों से आपकी आय और कर संबंधी ब्योरा इक_ा कर फॉर्म 26एएस में डालता है। अगर करदाता आयकर रिटर्न में यह नहीं बताता है कि उसकी कौन सी आय करमुक्त है तो उसके लिए भविष्य में उस आय का स्रोत बताना मुश्किल हो सकता है।'


ई-सत्यापन न भूलें

आयकर रिटर्न को भरा हुआ या दाखिल किया हुआ तभी माना जाता है, जब करदाता रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका सत्यापन कर देता है। सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) आपके रिटर्न को स्वीकार तभी करेगा और उसकी प्रोसेसिंग तभी होगी, जब उसका सत्यापन कर दिया जाएगा।

ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि सत्यापन का काम रिटर्न दाखिल करने के बाद 120 दिन के भीतर कर देना चाहिए। वाधवा बताते हैं, 'आयकर रिटर्न डिजिटल हस्ताक्षर, ई-सत्यापन कोड, आधार के जरिये एकबारगी पासवर्ड (ओटीपी) की मदद से किया जा सकता है अथवा उसकी पावती को सीपीसी, बेंगलूरु भेजकर ऐसा किया जा सकता है। अगर आप रिटर्न का ई-सत्यापन नहीं करते हैं अथवा डाक के जरिये उसे बेंगलूरु नहीं भेजते हैं तो आपके रिटर्न को अवैध मान लिया जाएगा।'

वर्मा कहते हैं, 'फॉर्म में शायद सबसे जटिल हिस्सा पूंजीगत लाभ कर का होता है और उसका ब्योरा भरते समय करदाता को बहुत सतर्कता बरतनी चाहिए। इस हिस्से में छोटी सी गलती कर दी तो करदाता को ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है।'

इसलिए पक्का कर लें कि आपने समय रहते रिटर्न भर दिया है। संशोधित रिटर्न भरने की कोई सीमा नहीं है यानी आप कितनी भी बार उसे दाखिल कर सकते हैं। लेकिन धारा 143(3) के तहत जांच पूरी होने के बाद रिटर्न में किसी तरह का बदलाव नहीं हो सकता। इसीलिए आखिरी तारीख यानी 31 दिसंबर तक इंतजार मत कीजिए।

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