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एयर इंडिया: बाजार में केंद्रीकरण को बढ़ावा

कृष्ण कांत / मुंबई October 12, 2021

एयर इंडिया निजीकरण की वजह से भारतीय विमानन उद्योग में बाजार संकेंद्रण बढ़ेगा और यह दूरसंचार के मुकाबले ज्यादा रहेगा। वित्त वर्ष 2020 के राजस्व के आधार पर, अपनी तीन एयरलाइनों के साथ टाटा समूह और इंडिगो एयरलाइंस का करीब 80 प्रतिशत से ज्यादा नियंत्रण है। वहीं वित्त वर्ष 2021 के राजस्व के आधार पर यह  81 प्रतिशत होगा।

एयर इंडिया के अलावा, टाटा संस की टाटा एसआईए एयरलाइंस में बड़ी हिस्सेदारी है, जो एयर विस्तारा और एयरएशिया इंडिया का परिचालन करती है।

तुलनात्मक तौर पर, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल की वित्त वर्ष 2021 में दूरसंचार क्षेत्र में 67 प्रतिशत राजस्व भागीदारी थी। विमानन क्षेत्र में, उद्योग में बाजार भागीदारी का आकलन करने वाला हर्फिं डाल-हर्शमान इंडेक्स (एचएचआई) पूर्व के करीब 2,800 और वित्त वर्ष 2018 के 2,300 से बढ़कर करीब 3,500 की नई ऊंचाई पर पहुंचेगा। वित्त वर्ष 2018 में जेट एयरवेज परिचालन में थी।

2,500 एचएचआई के साथ उद्योग या बाजार ज्यादा संकेंद्रित समझा जाता है, जबकि इस सूचकांक के 1,500 और 2,500 के बीच रहने पर स्थिति को उदार समझा जाता है।

वहीं 1,500 से कम एचएचआई का मतलब है कि उद्योग प्रतिस्पर्धी है।

दूरसंचार उद्योग का एचएचआई स्कोर वित्त वर्ष 2021 में करीब 2,900 के आसपास था, जो वित्त वर्ष 2016 के 1,600 से काफी ज्यादा था।

पिछले महीने सरकार ने तीसरी मोबाइल ऑपरेटर वोडाफोन आइडिया के बचाने और नई कंपनियों के प्रवेश को आसान बनाने के लिए उपायों की घोषणा की थी।

अमेरिकी न्याय विभाग (यूएसडीओजे) और यूरोपीय आयोग, दोनों ही उद्योगों में कंपनियों के विलय के आकलन और मंजूरी में एचएचआई का इस्तेमाल करते हैं। तुलनात्मक तौर पर, एयर इंडिया के निजीकरण से भारतीय विमानन उद्योग के लिए एचएचआई स्कोर 2,775 से करीब 730 अंक बढ़कर 3,503 हो जाएगा।

एचएचआई उस स्थिति में शून्य हो जाता है, जब बड़ी संख्या में कंपनियां समान आकार की होती हैं और संपूर्ण तौर पर एकाधिकार के मामले में यह अधिकतम 10,000 पवर पहुंच जाता है। बाजार में कंपनियों की संख्या घटते और कंपनियों के बीच आकार में असमानता बढऩे, दोनों ही स्थिति में एचएचआई स्कोर बढ़ता है।

यह विश्लेषण इंडिगो, एयर इंडिया, स्पाइसजेट, टाटा एसआईए एयरलाइंस (विस्तारा), गो एयर, एयरएशिया इंडिया समेत विभिन्न एयरलाइंस की राजस्व बाजार भागीदारी पर आधारित है।

विस्तारा में टाटा संस की 51 प्रतिशत और एयरएशिया इंडिया में 84 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अब टाटा संस की हिस्सेदारी एयर इंडिया में 100 प्रतिशत हो जाएगी। एयर इंडिया, विस्तारा और एयरएशिया इंडिया ने वित्त वर्ष 2020 में संयुक्त रूप से करीब 40,500 करोड़ रुपये की शुद्घ बिक्री दर्ज की थी, जबकि पूरे उद्योग की संयुक्त शुद्घ बिक्री करीब 95,700 करोड़ रुपये पर थी, जिससे उनकी 42.3 प्रतिशत संयुक्त बाजार भागीदारी का पता चलता है।

इंडिगो 35,800 करोड़ रुपये की शुद्घ बिक्री के साथ एकमात्र सबसे बड़ी एयरलाइन थी, जिसके बाद स्पाइसजेट (12,400 करोड़ रुपये) और गो एयर (7,051 करोड़ रुपये) शामिल थीं। वित्त वर्ष 2021 में, एयर इंडिया, विस्तारा और एयरएशिया इंडिया ने 16,130 करोड़ रुपये की संयुक्त शुद्घ बिक्री दर्ज की, जबकि पूरे उद्योग का संयुक्त राजस्व करीब 38,000 करोड़ रुपये था।

4,061 के एचएचआई स्कोर के साथ पेंट उद्योग भारत में सबसे ज्यादा संकेंद्रित उद्योगों में शामिल है। अधिक एचएचआई स्कोर वाले अन्य उद्योगों में टायर और लौह तथा इस्पात शामिल हैं।

 

Keyword: एयर इंडिया, बाजार, केंद्रीकरण, निजीकरण, विमानन उद्योग, दूरसंचार,
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