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लखीमपुर हिंसा मामले में केंद्रीय मंत्री की बर्खास्तगी का बढ़ा दबाव

भाषा /  October 10, 2021

लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा के मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शनिवार को करीब 12 घंटे की पूछताछ के बाद आशीष को गिरफ्तार कर लिया और आधी रात के बाद उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व कर रहे पुलिस उप महानिरीक्षक (मुख्यालय) उपेंद्र अग्रवाल ने बताया, 'मिश्रा ने पुलिस के सवालों का उचित जवाब नहीं दिया और जांच में सहयोग नहीं किया। वह सही बातें नहीं बताना चाह रहे हैं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।'  आशीष को आधी रात के बाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में पेश किया गया। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी (एसपीओ) एसपी यादव ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आशीष को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में लखीमपुर खीरी जिला जेल भेज दिया है। यादव ने बताया कि आशीष की पुलिस रिमांड के लिए अर्जी दी गई थी और अदालत ने इस अर्जी पर सुनवाई के लिए 11 अक्टूबर की तारीख तय की है।

वहींं  दूसरी ओर  अजय मिश्रा टेनी रविवार की सुबह अपने सांसद कार्यालय पर पहुंचे लेकिन उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी। उन्होंने इस मामले में किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

हाल में उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मामले में राज्य सरकार की कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई थी। लखीमपुर खीरी की हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत के मामले में आशीष और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या समेत अन्य संबंधित धाराओं में तिकुनिया थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। घटना के बाद आशीष पर आरोप लगा कि वह उन वाहनों में से एक में सवार था जिसने गत रविवार को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे पर प्रदर्शन कर रहे चार किसानों को कुचल दिया था, जिसके बाद प्राथमिकी में उसका नाम जोड़ा गया। आशीष शुक्रवार को लखीमपुर खीरी में पुलिस के सामने पेश नहीं हुआ था इसलिए उसके घर के बाहर दूसरा नोटिस चस्पा किया गया था।


दूसरी प्राथमिकी

लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा मामले में दर्ज की गई दूसरी प्राथमिकी में कहा गया है कि कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों में मौजूद खराब तत्त्वों ने एसयूवी सवार भाजपा के कार्यकर्ताओं पर हमला किया लेकिन प्राथमिकी में किसानों के गाड़ी से कुचले जाने अथवा केंद्रीय राज्य मंत्री के बेटे आशीष के कार में मौजूद होने संबंधी कोई जिक्र नहीं है। प्राथमिकी कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं को पीट-पीट कर मारने के संबंध में 4 अक्टूबर को तिकुनिया पुलिस थाने में दर्ज की गई।

दूसरी प्राथमिकी में केवल एक अज्ञात दंगाई का जिक्र है,जिस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302(हत्या), 324 (खतरनाक हथियार से नुकसान पहुंचाना) तथा अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि पहली प्राथमिकी के तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है,जिसमें आशीष मिश्रा भी शामिल है।


बर्खास्तगी की मांग

केंद्रीय मंत्रिपरिषद से अजय मिश्रा को बर्खास्त करने और उनके बेटे की गिरफ्तारी की मांग को लेकर विपक्ष और किसान नेताओं ने रविवार को भी सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर दबाव बनाए रखा। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत किसान नेताओं ने इस मामले को लेकर भाजपा पर निशाना साधा।

प्रियंका ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में उन पर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा प्रहार किया और कहा कि गृह राज्य मंत्री पद से अजय मिश्रा की बर्खास्तगी तक उनकी पार्टी की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने सोनभद्र, उन्नाव, हाथरस की घटनाओं और कोरोना महामारी की दूसरी लहर के समय की स्थिति का जिक्र करते हुए केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकारों पर निशाना साधा। कांग्रेस महासचिव ने कहा, 'इस देश में गृह राज्य मंत्री के बेटे ने किसानों को गाड़ी के नीचे कुचल दिया लेकिन प्रशासन उसे बचाने में लगा रहा। ऐसा कहीं नहीं हुआ होगा कि हत्या के आरोपी को पुलिस निमंत्रण दे कि आपसे पूछताछ करनी है।' उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री लखनऊ  में उत्सव मनाने आए, लेकिन किसानों के आंसू पोछने के लिए सिर्फ दो घंटे की दूरी पर लखीमपुर खीरी तक नहीं जा सके।' प्रियंका ने किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा, 'जब तीनों कानून लागू होंगे तो किसानों की जमीन और फसल छीन ली जाएगी।'

दूसरी तरफ भाजपा के सांसद वरुण गांधी ने रविवार को आरोप लगाया कि लखीमपुर खीरी में पिछले दिनों हुई हिंसा की घटना को हिंदू बनाम सिख बनाए जाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह कोशिश ना सिर्फ अनैतिक व गलत धारणा पैदा करने वाली है बल्कि खतरनाक भी है।    

Keyword: लखीमपुर हिंसा, बर्खास्तगी, अजय मिश्रा टेनी, आशीष मिश्रा, न्यायिक हिरासत, एसआईटी,
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