बिजनेस स्टैंडर्ड - महाराष्ट्र ने केंद्र पर राज्यों के बीच भेदभाव करने का आरोप लगाया
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, October 20, 2021 09:11 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिंस खबर

महाराष्ट्र ने केंद्र पर राज्यों के बीच भेदभाव करने का आरोप लगाया

सुशील मिश्र / मुंबई September 30, 2021

बाढ़-बारिश, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से परेशान महाराष्ट्र सरकार केंद्र सरकार पर खुलकर आरोप लगा रही है कि वह राज्य को प्राप्त सहायता नहीं दे रही है। राज्य में राहत एवं पुनर्वास के काम में विलंब की वजह केंद्र सरकार की भेदभाव वाली नीति है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण इस साल राज्य में अभी तक 436 लोगों की जान जा चुकी है।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मराठवाड़ा इलाके का जायजा लेने के बाद कहा कि मराठवाड़ा क्षेत्र में भारी बारिश के कारण किसानों की फसल बह गई, लेकिन हम सरकार के रूप में इन किसानों के साथ हैं। प्रशासन को उनकी हर संभव मदद करने का निर्देश दिया है। फिलहाल बचाव और आपातकालीन राहत कार्य में तेजी लाई जाए और राजस्व विभाग और कृषि विभाग के द्वारा नुकसान का मुआयना कर पंचनामा करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। सतत बारिश के कारण कहीं-कहीं बगीचों को नुकसान पहुंचा है और फसलें बह गई हैं। यह एक अभूतपूर्व स्थिति है ।

केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि जब प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करने की बात आती है तो केंद र सरकार को राज्यों के बीच भेदभाव नहीं करना चाहिए। मंत्रिमंडल के मेरे सहकर्मी विजय ने कहा था कि 8,000 से 9,000 करोड़ रुपये बकाया है। कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष नाना पटोले ने भी केंद्र सरकार पर पक्षपात करने और राज्य को जरूरी मदद नहीं करने का आरोप लगाया। जबकि प्रदेश ने पिछले एक साल में कम से कम तीन प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है।

राज्य के राहत एवं पुनर्वास कार्य मंत्री विजय वडेट्टीवार ने कल दावा किया था कि राज्य ने इस साल विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई क्षति से निपटने के लिए 7,700 करोड़ रुपये की सहायता राशि मांगी थी, लेकिन केंद सरकार ने सिर्फ 1,100 करोड़ रुपये दिए। उन्होंने कहा कि यह (7,700 करोड़ रुपये) नुकसान की अनुमानित लागत थी, जो चक्रवात, बेमौसम और अत्यधिक भारी बारिश के कारण हुआ था।

उन्होंने आरोप लगाया कि जुलाई में आई बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केन्द्रीय टीम अभी तक नहीं आयी है, जबकि बाढ़ से 1,659 करोड़ रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचने का आकलन है। उन्होंने दावा किया कि इन प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष और राज्य आपदा मोचन कोष के धन का उपयोग करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के अनुरोध को खारिज कर दिया। जबकि 17 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन में खड़ी फसल इस मानसून में मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण बरबाद हुई है और 27-28 सितंबर को हुई बारिश से राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र में और चार हजार हेक्टेयर में खड़ी फसलों को नुकसान होने का अनुमान है।

वडेट्टीवार के मुताबिक प्राकृतिक आपदाओं के कारण इस साल राज्य में अभी तक 436 लोगों की जान जा चुकी है। जिन 436 लोगों की जान गई है, उनमें से 6 लोगों के शव अब तक नहीं मिल सके हैं। 136 लोग जख्मी हुए हैं। उस्मानाबाद, लातूर, औरंगाबाद और जलगांव में एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस ने मिलकर 100 लोगों को बचाया है । एनडीआरएफ की एक टीम उस्मानाबाद और एक टीम लातूर में तैनात होकर हेलिकॉप्टर से इन दो जिलों में बचाव कार्य कर रही है ।

कोविड-19 के कारण जान गंवाने वालों के परिजन को 50,000 रुपये का भुगतान करने की केंद्र द्वारा उच्चतम न्यायालय को जानकारी देने के सवाल पर अजीत पवार ने कहा कि एक बार जब केंद्र सरकार राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ) में राशि जमा कर देगी, तो हम निर्देशों के अनुसार भुगतान करेंगे। केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह, उच्चतम न्यायालय को बताया था कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने सिफारिश की है कि कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों के परिजन को 50,000 रुपये दिए जाएं। उसने कहा था कि राज्यों द्वारा एसडीआरएफ से अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी।

 

Keyword: महाराष्ट्र सरकार, केंद्र सरकार, भेदभाव, बाढ़, बारिश, भूस्खलन, फसल,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बाजार में तेजी का सिलसिला अभी बना रहेगा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.