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देश के 11.1 करोड़ घरों को नल से पेयजल का इंतजार

अभिषेक वाघमारे और रुचिका चित्रवंशी /  August 27, 2021

देश के एक-तिहाई गांवों में पेयजल की आपूर्ति के लिए पाइप वाला बुनियादी ढांचा नहीं है। वहीं एक-तिहाई घरों में पेयजल की आपूर्ति के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा है तो घरों में नल वाला पेयजल मिलना भी एक सपना ही है। सरकार ने ग्रामीण पेयजल योजना पर इस साल 50,000 करोड़ रुपये लगाने का वादा किया है। 

करीब 11.1 करोड़ घरों में अब भी नल वाला पानी नहीं मिल पाता है। ऐसे में अगर अगले तीन सालों में ग्रामीण परिवारों को 100 फीसदी नल-जल कनेक्शन का लक्ष्य पूरा करना है तब जल जीवन मिशन (जेजेएम) के क्रियान्वयन में तेजी लाने की जरूरत है। योजना के क्रियान्वयन की रफ्तार 2020-21 (वित्त वर्ष 2021) के मुकाबले बेहतर होने की उम्मीद है जो अच्छा साल साबित हुआ था जब 3.2 करोड़ नल वाले पेयजल का कनेक्शन लगाया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर 2024 तक सभी घरों में पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य की घोषणा की जिसके बाद भारत सरकार ने 2019 में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) को जेजेएम से जोड़ दिया। 

इस घोषणा के बाद योजना ने रफ्तार पकड़ी। पेयजल नलों वाले घरों की संख्या छह सालों में 2.2 करोड़ से बढ़कर 2019-2020 (वित्त वर्ष) तक 4 करोड़ हो गई थी और अब अगस्त में इनकी तादाद घटकर 8 करोड़ के करीब हो गई है। पेयजल नलों वाले घरों के दोगुने होने की अवधि छह साल से घटकर 18 महीने हो गई है। इस उपलब्धि की वजह से यह लक्ष्य सार्थक लगता है। ये 8 करोड़ परिवार, ग्रामीण परिवारों का 41 फीसदी हिस्सा हैं। गांवों में अब भी 7.8 करोड़ घरों में पाइप वाले नल लगे हुए हैं लेकिन नल में पानी नहीं आ पाता है। इसके अलावा गांवों में 3.4 करोड़ घर ऐसे हैं जिनमें पाइप वाले पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।

एनआरडीडब्ल्यूपी से जेजेएम तक

जेजेएम के एक प्रमुख अभियान एनआरडीडब्ल्यूपी की शुरुआत 2009 में की गई थी जिसका एकमात्र उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के 35 फीसदी घरों में प्रत्येक व्यक्ति को रोजाना 55 लीटर पानी उपलब्ध कराना था। लेकिन भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने एक ऑडिट में पाया कि अभियान की शुरुआत के आठ साल बाद 2017 तक केवल 17 प्रतिशत ग्रामीण घरों को इस योजना से लाभ हुआ था और यह केवल आधे लक्ष्य तक पहुंचा था।

सीएजी की रिपोर्ट संसद में पेश होने के एक साल बाद जेजेएम ने सभी ग्रामीण परिवारों के लिए इस योजना के दायरे में विस्तार किया और 2024 तक का एक लक्ष्य रखा। इसी साल भारत में आम चुनाव होने वाले हैं और मोदी तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ेंगे। जेजेएम की घोषणा के बाद जमीनी स्तर पर रफ्तार में तेजी आई। वित्त वर्ष 2020 तक रोजाना 2,000 से 10,000 प्रतिदिन के बीच नया नल कनेक्शन लगाया गया जिसकी तादाद वित्त वर्ष 2021 में बढ़कर प्रतिदिन 88,000 से अधिक नल हो गई।

केंद्र ने भी वित्त वर्ष 2020 और वित्त वर्ष 2021 में क्रमश: 10,000 करोड़ रुपये और 11,000 करोड़ रुपये खर्च किए जो पिछले वर्षों में की गई खर्च की राशि का दोगुना है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इस रफ्तार का एक कारण भूजल का इस्तेमाल है। अगले 30-40 सालों में ऐसे गांवों में घरेलू नल-जल व्यवस्था काफी तेजी से होगी। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'जब एक ही गांव में पानी उपलब्ध होता है और कहीं और से पानी नहीं लाना पड़ता है तब कनेक्शन देने में छह से 10 महीने लग जाते हैं। जेजेएम की शुरुआत के बाद से दो साल बीत चुके हैं।' इस योजना को पिछले निवेश से भी लाभ हुआ है। जिन क्षेत्रों में योजना (एनआरडीडब्ल्यूपी सहित) ने आंशिक रूप से प्रगति की थी वहां जेजेएम योजना के तहत मौजूदा जल आपूर्ति प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव लाने, भूजल के इस्तेमाल का इंतजाम करने के साथ ही उन परिवारों को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया गया जो पीछे छूट गए थे। हालांकि, केंद्र की तरफ  से फंडिंग में पांच गुना वृद्धि के बावजूद इस साल रफ्तार कुछ हद कम हुई है। 2021-22 (वित्त वर्ष 2022) में अगस्त तक, इस योजना के लिए 50,000 करोड़ रुपये के आवंटन के बावजूद दैनिक दर घटकर 18,000 हो गई है।

तीन राज्यों में हालात

इन 11.1 करोड़ परिवारों में से करीब 5 करोड़ नल पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में हैं। इन राज्यों में पेयजल का घरेलू कवरेज क्रमश: 10.9 प्रतिशत, 12.2 प्रतिशत और 20.4 प्रतिशत है। बड़े राज्यों में तेलंगाना (100 फीसदी), हरियाणा, बिहार और पंजाब जैसे राज्यों के 80 फीसदी से ज्यादा परिवारों को नल वाला पानी पहुंचाने में सफलता मिली है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्यों में शासन से जुड़े मुद्दे हैं। जहां तक उत्तर प्रदेश की बात है तो राज्य का आकार अपने आप में एक चुनौती है। राज्य में इस दिशा में पहल के लिए पूर्ण विभाग का अभाव है। वहीं पश्चिम बंगाल में राजनीतिक कारणों की वजह से इस योजना की शुरुआत नहीं हुई। 

जल शक्ति मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'मतभेदों को सुलझाया जा रहा है। हम कुछ राज्यों में सुधार देख रहे मिसाल के तौर पर असम में हर दिन 6,000-7,000 नल कनेक्शन जोड़ा जा रहा है।' उत्तर प्रदेश में भी योजना रफ्तार पकड़ रही है। इसका लक्ष्य इस साल के अंत तक 60,000 गांवों में नल वाले पानी की सुविधा मुहैया कराने का है। केंद्र ने हाल ही में राज्य को 2,400 करोड़ रुपये जारी किए हैं जहां 2022 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। 

जल प्रबंधन क्षेत्र में भरोसेमंद शख्स माने जाने वाले और नए मुख्य सचिव की वजह से त्रिपुरा में काम की रफ्तार बढ़ रही है। हालांकि सरकार उन छोटे राज्यों को लेकर चिंतित है जिन्हें तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। एक अधिकारी ने बताया, 'हम झारखंड और छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग स्तर के अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे हैं।'

बिहार जैसे राज्यों ने जेजेएम से पहले ही घरेलू नल के पानी के कनेक्शन में तेजी लाने की कोशिश की है जिन्हें इस दिशा में जल्द कोशिश करने का लाभ मिलेगा। 

करीब 86 प्रतिशत से अधिक कवरेज के साथ, बिहार ने चौदहवें वित्त आयोग की पूंजी का इस्तेमाल किया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'अभी अतिरिक्त आवंटन की जरूरत नहीं है और राज्य के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं।' तिमाही योजना से पता चलता है कि बिहार वित्त वर्ष 2022 में 100 फीसदी लक्ष्य हासिल करने की राह पर है।
Keyword: drinking water, tap water, jjm, jal jiwan mission,
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