बिजनेस स्टैंडर्ड - सही दिशा में अग्रसर जल जीवन मिशन
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सही दिशा में अग्रसर जल जीवन मिशन

विनायक चटर्जी /  August 24, 2021

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 के आम चुनाव में  उतर रहे थे तो उनके पास कहने को कई ऐसे कदम थे जो वंचित तबकों की बेहतरी के लिए उठाए गए थे। इनमें किफायती आवास, शौचालय, बिजली कनेक्शन, रसोई गैस, वित्तीय समावेशन एवं ग्रामीण सड़कों का निर्माण जैसे कई प्रयास शामिल थे। इनमें से कई कार्यक्रम अब भी जारी हैं लेकिन 2024 के आम चुनाव में मौजूदा सरकार के लिए 'हर घर जल' मुहैया कराने के कार्यक्रम को एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा सकता है। 'जल जीवन मिशन' के तहत हर परिवार को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने की पहल इस सरकार की कार्यसूची में काफी ऊपर है। 

गांव के हरेक घर तक नल से जल पहुंचाने की इस योजना को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे ग्रामीण परिवारों को भी नियमित तौर पर अच्छी गुणवत्ता वाला पीने का पानी मुहैया कराया जाएगा। नल से पेयजल घरों तक पहुंचने से महिलाओं की दुश्वारियों में काफी कमी आने की संभावना है जिन्हें साफ पानी की तलाश में काफी दूर तक जाना पड़ता है। ग्रामीण समुदायों को जीवन की गरिमा प्रदान करने में भी यह मददगार होगी। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त, 2019 को लाल किले के प्राचीर से की थी। ग्रामीण भारत में 18.93 करोड़ परिवार हैं जिनमें से सिर्फ 17 फीसदी के ही पास नल का कनेक्शन है। बाकी 15.70 करोड़ परिवार यानी करीब 83 फीसदी ग्रामीण परिवारों को जल जीवन मिशन के दायरे का सवाल खड़ा हुआ। यह संख्या बिजली कनेक्शन देने के लिए निर्धारित लक्ष्य के पांच गुने से भी थोड़ा अधिक है। बड़े लक्ष्य को देखते हुए इस योजना का आवंटन भी करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये रखा गया जिसमें से 2.08 लाख करोड़ रुपये की हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है। 

जुलाई 2021 तक देश भर में इसने अपना 41 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिया था। ऐसा लगता है कि वर्ष 2024 तक यह अपने निर्धारित लक्ष्य को भी हासिल कर पाने में सक्षम है। इस योजना के दो खास आयामों पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। ये हैं-अत्यधिक विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण और सेवा आपूर्ति की गुणवत्ता को एकमात्र सार्थक नतीजा मानने की दृढ़ धारणा।

ग्रामीण समुदाय से भी व्यय के पांच फीसदी हिस्से के बराबर नकद राशि या स्वैच्छिक श्रम के तौर पर योगदान देने की अपेक्षा की गई है। 

मिशन में गांवों के लिए एक पंचवर्षीय कार्य-योजना है जिसे अमलीजामा पहनाने के लिए हरेक गांव में पंचायत के अधीन एक समिति बनाई जाएगी। समिति ही गांव के भीतर जलापूर्ति प्रणाली की योजना बनाने, क्रियान्वयन, परिचालन एवं रखरखाव में अहम भूमिका निभाएगी। क्षमता निर्माण के लिए इनपुट को 184 चिह्नित सेक्टर भागीदारों के जरिये मुहैया कराया जा रहा है जिनमें इस क्षेत्र के जानकार गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), फाउंडेशन, ट्रस्ट एवं प्रतिबद्ध व्यक्ति शामिल हैं। 

जल जीवन मिशन के तहत देश भर में एकदम नए कौशल से लैस प्लंबर, राजमिस्त्री, पंप मैकेनिक एवं गुणवत्ता नियंत्रण विशेषज्ञों को तैयार करने पर जोर दिया गया है जिससे एक व्यापक रोजगार बाजार तैयार होगा। भारत में छह लाख से अधिक गांव हैं। हर गांव में करीब 15 नए रोजगार अवसर पैदा होने के अनुमान से भी देखें तो ग्रामीण भारत में 90 लाख नए रोजगार पैदा होंगे। इसका दीर्घकालिक मकसद यह है कि पानी समितियां जलापूर्ति से संबंधित तकनीकी एवं वाणिज्यिक पहलुओं की देखभाल करने में सक्षम स्थानीय जल निकायों में तब्दील की जाएं। 

इस कार्यक्रम का एक अन्य नवाचारी स्वरूप जलापूर्ति ढांचा खड़ा करना भर न होकर पानी को हर घर तक पहुंचाना भी है। सेवा की आपूर्ति के ऐसे मानदंड अपनाए गए हैं कि हर परिवार को प्रति व्यक्ति एक निर्धारित गुणवत्ता वाला 55 लीटर पेयजल प्रतिदिन मिलेगा। पानी की मात्रा, गुणवत्ता एवं नियमितता जानने के लिए सेंसर-आधारित नियंत्रण व्यवस्था स्थापित की जाएंगी और वे इंटरनेट की मदद से आंकड़े प्रेषित करेंगे। इन आंकड़ों को गांव के स्तर पर गठित सार्वजनिक डोमेन डैशबोर्ड में फीड किया जाएगा। पानी की गुणवत्ता पर निगरानी रखने का काम स्थानीय समुदाय करेगा जिसमें गांव की महिलाओं पर खास जोर दिया जाएगा। राज्य अपनी प्रयोगशालाओं में पानी के नमूनों की जांच नाममात्र के शुल्क पर कराएंगे। घरों में ही पानी की गुणवत्ता परखने के लिए एक पोर्टेबल उपकरण के विकास की कोशिशें भी जारी हैं। 'ग्रे वाटर' निकलने का समाधान और इस पानी को फिर से इस्तेमाल करने लायक बनाना भी इस योजना का एक अहम अवयव है ताकि जल संरक्षण सुनिश्चित करने के अलावा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे को भी दूर किया जा सके। 

आर्सेनिक एवं फ्लोराइड के असर वाले इलाकों, सूखाग्रस्त क्षेत्रों एवं रेगिस्तानी इलाकों पर खास ध्यान दिया गया है। इसके अलावा अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल गांवों एवं सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े आकांक्षी जिलों को भी इस कार्यक्रम में खास जगह दी गई है। समय-समय पर राज्यों एवं जिलों के अधिकारियों के साथ संपर्क की भी व्यवस्था की गई है। 

सवाल है कि जल जीवन मिशन क्या कोई तरीका अपना सकता है? एक सुझाव यह है कि भारत एवं विदेश की वे कंपनियां, ट्रस्ट या फाउंडेशन इस ऐतिहासिक मुहिम में कुछ गांवों को गोद लेकर अपनी भागीदारी करना चाहते हैं, उनके पास तक पहुंचने के लिए एक आक्रामक अभियान चलाया जाए। पानी समितियों के स्थानीय जल निकायों में बदलने पर बिजली, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा को भी उसके दायरे में लाया जा सकता है। 

आखिर में, भूजल के फ्लुराइड, आर्सेनिक, आयरन, खारेपन, नाइट्रेट एवं भारी घातुओं से दूषित होने की तमाम घटनाएं हमारे सामने चुनौती पेश कर रही हैं। इन परिस्थितियों को लंबे समय में दूर करने के लिए विशेष तकनीकी टीम का खड़ा होना पीडि़त समुदायों के लिए एक वरदान ही होगा।
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