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अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से मौसम का सटीक पूर्वानुमान

संजीव मुखर्जी और नेहा अलावधी /  08 20, 2021

पिछले महीने मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के एक चौक पर करीब 150 गांवों के किसान इकट्ठा हुए और उन्होंने देश की सबसे प्रमुख मौसम पूर्वानुमान एजेंसी भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) का पुतला दहन किया। आखिर इसकी वजह क्या थी? उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी खड़ी फसल बुरी तरह प्रभावित हुई क्योंकि आईएमडी का मॉनसून पूर्वानुमान पूरी तरह गलत साबित हुआ।

हालांकि, इस तरह की शिकायतों का दौर जल्द ही खत्म हो सकता है। आईएमडी ने पूर्वानुमान में इस तरह की गड़बडिय़ों से बचने और जलवायु परिवर्तन की वजह से सामान्य मौसम में आई बाधा का मुकाबला करने के लिए पूर्वानुमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल)जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का तेजी से इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इसने वरिष्ठ अधिकारियों और मौसम वैज्ञानिकों के विभिन्न आंतरिक उप-समूहों का गठन किया है ताकि चक्रवात की तीव्रता की भविष्यवाणी करने, कम समय के दायरे वाले मौसम पूर्वानुमान (तीन घंटे तक के लिए वैध) के साथ-साथ लंबे समय के पूर्वानुमान भी तय करने में एआई और एमएल का सबसे अच्छा इस्तेमाल किया जा सके।

इसके लिए आईएमडी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के साथ इलाहाबाद और वडोदरा में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) और आईआईटी-खडग़पुर के साथ भी करार किया है। इसके अलावा यह वैश्विक तकनीकी दिग्गजों मसलन गूगल और अन्य कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि एआई और एमएल के इस्तेमाल को बेहतर स्वरूप में लाया जा सके।

आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र कहते हैं, 'हर दिन आईएमडी अपने उपग्रहों, एडवांस मौसम स्टेशनों, मौसम गेज और माइक्रो रडार के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से मौसम, हवा के रुझान, समुद्र की सतह के तापमान और वायुमंडल से संबंधित लाखों डेटा हासिल करता है और इसका इस्तेमाल एआई तथा मशीन लर्निंग जैसे उन्नत तकनीकी उपकरणों के जरिये जानकारी लेने के लिए किया जा सकता है।'

गूगल लू, शीत लहरों, बिजली कड़कने, वर्षा और चक्रवात जैसे मौसम की घटनाओं के बारे में जानकारी का तुरंत प्रसार करने के लिए आईएमडी के स्वचालित अलर्ट का इस्तेमाल कर रही है ताकि मौसम के गंभीर होने से जुड़ी जानकारी उन लोगों के लिए जल्द उपलब्ध कराई जा सके जो इससे प्रभावित होते हों। यह चेतावनी गूगल मैप और सर्च पर नजर आती है।

महापात्र का कहना है कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने स्वतंत्र शोधकर्ताओं से भी शोध प्रस्ताव आमंत्रित करना शुरू कर दिया है और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान-पुणे जैसे आईएमडी के संबद्ध संगठनों का एक समूह बनाया है ताकि मौसम पूर्वानुमान में एआई और एमएल के इस्तेमाल की अपनी रणनीति और बेहतर बनाई जा सके। महापात्र बताते हैं, 'अगले दो से तीन वर्षों में हमें इन आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर मौसम का अनुमान लगाने की बेहतर स्थिति में होना चाहिए।' कई तकनीकी कंपनियां मौसम पूर्वानुमान के क्षेत्र में भारतीय ग्राहकों के साथ काम करती हैं। इनमें 'दि वेदर कंपनी' भी शामिल है जो आईबीएम का एक कारोबार है। इसका वैश्विक हाई-रिजॉल्यूशन एटमॉस्फेरिक फोरकास्टिंग सिस्टम (जीआरएएफ) हर घंटे पर अपडेट देने वाली पहली वाणिज्यिक मौसम प्रणाली है जो बिजली की गरज जैसे मामूली परिवर्तन का भी पूर्वानुमान लगा सकती है।

यह प्रणाली मौजूदा मॉडलों की तुलना में पूर्वानुमान में लगभग 200 फीसदी सुधार की गुंजाइश दर्शाती है और यह पारंपरिक वैश्विक मॉडल प्रणालियों की तुलना में छह से 12 गुना अधिक बार अपने पूर्वानुमानों को अपडेट करती है। जीआरएएफ  एडवांस आईबीएम पावर9 आधारित सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल करता है ताकि दुनिया भर में लाखों सेंसरों और इन-फ्लाइट डेटा हासिल कर दुनिया भर में और अधिक स्थानीय और सटीक मौसम पूर्वानुमान की सूचना दी जा सके। भारत में जीआरएएफ  का इस्तेमाल विमानन कंपनियों, बीमाकर्ताओं, यूटिलिटी कंपनियों और किसानों के द्वारा किया जाता है।

यहां तक कि एआई और एमएल को अपनाए बगैर आईएमडी की ऑब्जर्वेटरी डेटा संग्रह प्रणाली पिछले कुछ वर्षों में और बेहतर हुई है। लगभग 20 मौसम संकेतकों, उन्नत मौसम स्टेशन से लैस जहाज महासागर की गहराई से डेटा एकत्र करते हैं जबकि 25 से अधिक डॉप्लर रडार भूमि पर जलवायु परिस्थितियों की निगरानी करते हैं।

इन सबके जरिये मौसम विभाग को समुद्र की सतह के तापमान, हवा की गति और उच्च और निम्न दबाव वाले प्रणालियों के बारे में सटीक आंकड़े मिलते हैं जिससे यह चक्रवात, बाढ़ और बिजली के गरजने जैसे गंभीर मौसम के बारे में सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम होता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा साल 2013 और 2016 में दो उच्चस्तरीय मौसम उपग्रहों, इनसेट-3डी और इनसेट 3डी-आर को प्रक्षेपित किया गया था और इसने आईएमडी की अवलोकन और डेटा संग्रह क्षमताओं को भी बढ़ाया है।
विभिन्न वेधशालाओं से एकत्र किए गए आंकड़ों का एक साथ ही डिजिटलीकरण और प्रसंस्करण करने के साथ ही पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के कई संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडलों में डाला जाता है। हालांकि वे एक समान भविष्यवाणियां नहीं करते हैं लेकिन आईएमडी के पास एक ऐसी मजबूत प्रणाली है जो मौसम भविष्यवाणी मॉडल का आकलन कर समान पूर्वानुमान का अंदाजा लगा सकता है। आईएमडी के ऑब्जर्वेशन डेटा के प्रसंस्करण की क्षमता में भी व्यापक सुधार हुआ है क्योंकि इसकी कंप्यूटिंग क्षमता में 1 टेराफ्लॉप से 8.6 टेराफ्लॉप तक कई गुना वृद्धि हुई है। अब यह डेटा फीड होने के तीन घंटे के भीतर पूर्वानुमान बता सकता है जिसमें पहले 12-14 घंटे तक लग जाते थे।
महापात्र कहते हैं, 'दस साल पहले हम 200 किलोमीटर के दायरे तक चक्रवात की सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम थे लेकिन अब हमने इसे कम कर 30 किमी तक कर दिया है। इसी तरह भारी वर्षा के लिए 10 साल पहले हमारा पूर्वानुमान 60 प्रतिशत सटीक होता था लेकिन अब यह बढ़कर 80 प्रतिशत हो गया है। 2030 तक हम इसमें 10-15 फीसदी और सुधार करने की योजना बना रहे हैं।' 
इसके बाद फिर से 2012 तक विभाग को बिजली के गरजने का सही पूर्वानुमान लगाने में ज्यादा सफलता नहीं मिली। वह कहते हैं, 'लेकिन अब किसी मौसमी घटना के तीन घंटे पहले उसके बारे में हमारा पूर्वानुमान लगाने में 80.85 प्रतिशत सटीक होता है।' वह बताते हैं कि कोहरे के लिए भी भविष्यवाणी 80-85 प्रतिशत सटीक रही है।
आईएमडी को अब तक बिजली गिरने जैसी घटना की भविष्यवाणी करने में ज्यादा सफलता नहीं मिली है। महापात्र कहते हैं, 'बिजली गिरने की सही भविष्यवाणी करना मुश्किल है क्योंकि यह किसी छोटे से क्षेत्र में छोटी अवधि में हो जाता है। लेकिन हम इसके लिए भी कोशिश कर रहे हैं।' एक बार जब एआई और एमएल को आईएमडी के सिस्टम में अपनाया जाएगा तब बिजली के कारण होने वाली मौतों (जो भारत में सालाना लगभग 2,000 के करीब होती हैं) में भी कमी आने की संभावना बनेगी।
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