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राइट्स इश्यू से जुटाई गई रकम में 60,000 करोड़ रुपये की कमी

सुंदर सेतुरामन / मुंबई August 20, 2021

राइट्स इश्यू से जुटाई गई रकम में साल 2021 के पहले सात महीने में काफी ज्यादा कमी दर्ज हुई है। जुलाई 2021 तक बाजार में सिर्फ चार राइट्स इश्यू पेश हुए और इसके जरिये संचयी तौर पर 3,623 करोड़ रुपये जुटाए गए। साल 2020 की समान अवधि में 11 इश्यू पेश हुए थे और कुल मिलाकर 63,537 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। अगर हम रिलायंस इंडस्ट्रीज के राइट्स इश्यू को अलग कर दें तो भी साल 2020 में बाकी 10 इश्यू के जरिये 10,411 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने राइट्स इश्यू से 53,125 करोड़ रुपये जुटाए थे।

विशेषज्ञों ने कहा कि मंदी के बाजार में प्रवर्तक सामान्य तौर पर राइट्स इश्यू का विकल्प चुनते हैं क्योंकि वे अपनी हिस्सेदारी तब नहीं बेचना चाहते जब मूल्यांकन अनाकर्षक हो। आकर्षक मूल्यांकन के समय वे पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) को प्राथमिकता देते हैं।

प्राइम डेटाबेस के संस्थापक पृथ्वी हल्दिया ने कहा, राइट्स इश्यू कोई कंपनी तब लाती है जब प्रवर्तक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचना चाहते और उन्हें रकम जुटाना जरूरी होता है। राइट्स इश्यू में कोई प्रवर्तक बढ़त, विस्तार या अधिग्रहण के लिए रकम खर्च करने के इच्छुक भी होते हैं। कुछ कंपनियां राइट्स इश्यू तब लाती हैं जब उन्हें बाजार कीमत से कम पर इश्यू जारी कर शेयरधारकों को पुरस्कृत करना होता है। हालांकि हिस्सेदारी बेचे बिना मौजूदा शेयरधारकों से रकम इस उम्मीद के साथ जुटाई जाती है कि शेयरधारक आपके साथ खुश हैं और आपको रकम देकर खुशी महसूस कर रहे हैं।

बैंकरों ने कहा, इसके अतिरिक्त पिछले साल कारोबार पर पिछले साल आर्थिक झटका और महामारी के असर का सामना करना पड़ा था। इस पर भी अनिश्चितता थी कि बाजार कर स्थिर होगा। ऐसे में प्रवर्तकों ने सोचा होगा कि हिस्सेदारी बेचे बिना पूंजी जुटाना बेहतर होगा। राइट्स इश्यू के जरिए रकम जुटाने की 97 फीसदी गतिविधियां साल 2020 के पहले सात महीने में हुई जब बाजार कोविड महामारी के असर से जूझ रहा था।

आरआईएल के राइट्स इश्यू की कामयाबी और सेबी की तरफ से नियामकीय ढांचे में बदलाव व बाजार में गिरावट ने पिछले साल राइट्स इश्यू को काफी सहारा दिया। ऐसे लेनदेन को पूरा करने की समयावधि में कमी, इलेक्ट्रॉनिक आवेदन और पात्र शेयरधारकों को राइट्स एनटाइटलमेंट की ट्रेडिंग की अनुमति जैसे कुछ बदलाव ने रकम जुटाने के इस जरिये की काफी मदद की।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के राइट्स एनटाइटलमेंट में काफी वॉल्यूम देखा गया और इसमें उन्हें मौका दिया गया जिनका इरादा राइट्स इश्यू में आवेदन नहीं करने का था और उन्हें आकर्षक कीमत पर एनटाइटलमेंट बेचने की इजाजत मिली।

1990 के दशक में राइट्स इश्यू के जरिए रकम जुटाना सामान्य चलन था। प्राइम डेटाबेस के मुताबिक, 1990 से 1996 के बीच हर साल औसतन 240 राइट्स इश्यू पेश किए गए। हालांकि पिछले 10 साल से पात्र संस्थागत नियोजन या तरजीही आवंटन पूंजी जुटाने का तरजीही जरिया बन गया है। क्यूआईपी की कीमत सेबी के फॉर्मले पर तय होती है, जिसका जुड़ाव बाजार कीमत के साथ होता है। दूसरी ओर राइट्स इश्यू से कंपनियां किसी भी कीमत पर रकम जुटा सकती हैं।

हल्दिया ने कहा, कंपनियां क्यूआईबी लाकर मौजूदा कीमत पर रकम जुटाना चाहेंगी। तेजी के बाजार में शेयरधारकों को पुरस्कृत करना मुश्किल होता है क्योंकि कीमतें बढ़ती रहती हैं। राइट्स इश्यू के साथ समस्या यह है कि जब आप कीमत की घोषणा करते हैं और इश्यू खुलता है तो कीमतें घटती हैं और यह प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाता है। 

बैंकरों ने कहा कि अगर बाजार लगातार बेहतर बना रहता है तो राइट्स इश्यू में सुस्ती बनी रहेगी, लेकिन अगर बाजार में घबराहट दिखने लगेगी तो राइट्स इश्यू में सुधार दिख सकता है।
Keyword: rights issue, reliance industries, market,,
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