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13-23 प्रतिशत रह सकती है जीडीपी वृद्धि

श्रीमी चौधरी और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली August 17, 2021

अर्थशास्त्रियों ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि दर 13.1 प्रतिशत से 23 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया है। इस माह के अंत तक जीडीपी के आंकड़े आने हैं। पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री प्रïणव सेन ने अनुमान लगाया है कि जीडीपी वृद्धि इस दौरान 17-18 प्रतिशत के बीच रहेगी। बहरहाल उनका कहना है कि वास्तविक वृद्धि बहुत कम रहेगी क्योंकि तिमाही आंकड़ों में गैर सूचीबद्ध कंपनियों के आंकड़े नहीं होते हैं।  

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एसबीआई समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष ने कहा, 'हमारा प्राथमिक अनुमान है कि जीडीपी वृद्धि पहली तिमाही में 17-18 प्रतिशत के बीच रह सकती है।' बहरहाल उनका कहना है कि आदर्श रूप से सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) के आंकड़ों को देखा जाना चाहिए क्योंकि जीडीपी के आंकड़ों को पहली तिमाही में मजबूत कर संग्रह से भी बल मिला है।

इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने भी कहा, 'मात्रा के बारे में हमारे अनुमान और कमाई के आधार पर हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 22 की पहली तिमाही में जीवीए वृद्धि 16-17 प्रतिशत रह सकती है और इसे चालू साल में सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में आर्थिक प्रदर्शन का तुलनात्मक रूप से बेहतर आंकड़ा माना जा सकता है। अप्रत्यक्ष करों में तेज बढ़ोतरी की वजह से हमारा अनुमान है कि जीडीपी वृद्धि दर 19-20 प्रतिशत के उच्च स्तर पर रह सकती है।'   

इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत का कहना है कि जीडीपी वृद्धि 15.3 प्रतिशत रह सकती है। उन्होंने कहा, 'अगर वित्त वर्ष 22 को देखा जाए तो वी आकार की रिकवरी होगी। बहरहाल इसकी वजह यह है कि वित्त वर्ष 21 में -7.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इस साल विश्व की करीब सभी अर्थव्यवस्था में वी आकार की रिकवरी की उम्मीद है। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या वृद्धि की यह रफ्तार आने वाले दो वर्षों में बरकरार रखी जा सकेगी।'

बार्कलेज के भारत के मुख्य अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया ने कहा कि यह वी आकार की रिकवरी होगी और आर्थिक वृद्धि दर 14.9 प्रतिशत रहेगी। बहरहाल घोष को वी आकार की कोई रिकवरी नजर नहीं आ रही है। यह पूछे जाने पर कि जीडीपी के आंकड़ों में संभवत: अर्थव्यवस्था की जमीनी हकीकत नहीं आएगी क्योंकि इसमें सिर्फ सूचीबद्ध कंपनियों की स्थिति शामिल है, उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि वित्तीय बाजारों के प्रदर्शन और अर्थव्यवस्था के बीच तालमेल नहीं है। उन्होंने अनुमान लगाते हुए कहा, 'लेकिन वैश्विक तेजी के कारण शेयर बाजार का प्रदर्शन मजबूत बना रहेगा और नकदी से कंपनियों को अपनी बैलेंस सीट साफ करने में मदद मिलेगी। बहरहाल इस दौरान उपभोक्ताओं की मांग टिकाऊ स्तर पर पहुंच सकती है।' उनका यह भी कहना है कि असंगठित क्षेत्रों खासकर ग्रामीण इलाकों में जून-जुलाई में तेजी देखी गई है, लेकिन रिकवरी अभी भी विषम है। 

केयर रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने  जीडीपी वृद्धि दर 13.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। बहरहाल उनका कहना है कि यह मुख्य रूप से आधार के असर से संचालित है। पहले के वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में 24.4 प्रतिशत का बड़ा संकुचन आया था। उनका कहना है कि इस साल मई-जून में लॉकडाउन की वजह से सेवाएं प्रभावित रही हैं। 

पीडब्ल्यूसी इंडिया में आर्थिक सलाहकार सेवा के लीडर रनेन बनर्जी का कहना है कि जीडीपी वृद्धि दर 22 प्रतिशत के करीब रहेगी। उनका कहना है कि महामारी के पहले के स्तर पर रिकवरी करीब करीब पहुंच चुकी है। अगर तीसरी लहर के कारण कोई अफरातफरी नहीं होती है तो अगली तीन तिमाहियों में वृद्धि दर बेहतर रहेगी और वित्त वर्ष 22 में सालाना वृद्धि 10 प्रतिशत के करीब रह सकती है। सबनवीस का कहना है कि आधार के असर के कारण आईआईपी भ्रमित करने वाला है। उन्होंने कहा कि पीएमआई (पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) अर्थव्यवस्था की सेहत दिखाने के लिए बेहतर संकेतक है। 

कम आधार के कारण पहली तिमाही में आईआईपी 45 प्रतिशत ज्यादा था, जिसमें अप्रैल में 134.63 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बहरहाल विनिर्माण पीएमआई पहली तिमाही में 51.46 रहा है। अप्रैल जून के दौरान सर्विस पीएमआई 47.2 पर था। पीएमआई 50 से कम होना संकुचन और इससे ऊपर होना प्रसार दिखाता है।

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