बिजनेस स्टैंडर्ड - ओलिंपिक में परचम लहराने का लक्ष्य
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ओलिंपिक में परचम लहराने का लक्ष्य

अरिंदम मजूमदार /  August 13, 2021

साल 2019 के मध्य में नीरज चोपड़ा को कोहनी में गंभीर रूप से चोट लग गई जिसकी वजह से उनके ओलिंपिक में जाने का सपना टूटता हुआ नजर आ रहा था। जेएसडब्ल्यू स्पोट्र्स में स्पोट्र्स एक्सीलेंस और स्काउटिंग की प्रमुख मनीषा मल्होत्रा ने तुरंत ही लोगों से टेलीफोन पर संपर्क करना शुरू कर दिया जो उनकी तुरंत मदद कर सकते थे। 24 घंटे के भीतर चोपड़ा का इलाज मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भारत के प्रमुख ऑर्थोपेडिक सर्जन में से एक दिनशॉ पारदीवाला शुरू कर चुके थे। वहां उनकी दो घंटे की सर्जरी हुई।

इसके बाद वह कर्नाटक के जेएसडब्ल्यू के विजयनगर स्टील संयंत्र में मौजूद एकमात्र निजी प्रशिक्षण केंद्र इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ  स्पोट्र्स में चार महीने के लिए चले गए।

जेएसडब्ल्यू स्पोट्र्स ने चोपड़ा में अपना पूरा निवेश किया और वह मानसिक तौर पर खुद भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध रहे और उनके अभूतपूर्व प्रदर्शन के बलबूते भारत को ट्रैक ऐंड फील्ड में पहला ओलिंपिक स्वर्ण पदक मिल पाया। इस जीत के बाद चोपड़ा की बढ़ती ब्रांड वैल्यू, जेएसडब्ल्यू सीमेंट्स के प्रबंध निदेशक और इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ  स्पोट्र्स के संस्थापक-निदेशक पार्थ जिंदल के लिए भी अच्छी खबर है। जेएसडब्ल्यू स्पोट्र्स को जिंदल देश के पहले मुनाफे वाले खेल उद्यम में तब्दील करने की फिराक में हैं। जेएसडब्ल्यू स्पोट्र्स ने 2015 में चोपड़ा की प्रतिभा की पहचान की और उस वक्त से ही 13 अरब रुपये की हैसियत वाले स्टील समूह को इनके प्रशिक्षण और सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी, कुश्ती में ओलिंपिक कांस्य पदक जीतने वाले बजरंग पुनिया और चोपड़ा के लिए विज्ञापन करार का प्रबंधन करेगी जो 2024 तक पेरिस ओलिंपिक तकजेएसडब्ल्यू के साथ ही जुड़े रहेंगे।

जिंदल का कहना है, 'हमने मुक्केबाजी, कुश्ती, जूडो, एथलेटिक्स और तैराकी जैसे पांच खेलों में प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों की पहचान के लिए एक व्यापक प्रणाली तैयार की है। प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को ढूंढऩे के लिए हमारी टीम जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में मौजूद रहती है। जब भी उन्हें किसी में संभावित प्रतिभा दिखती है हम उस एथलीट के माता-पिता से संपर्क करते हैं और उन्हें जेएसडब्ल्यू स्पोट्र्स में पूर्ण छात्रवृत्ति की पेशकश करते हैं जहां उनके प्रशिक्षण और उनकी पढ़ाई का ख्याल रखा जाता है।' जिंदल ने 2013 में खेल कारोबार में जब प्रवेश किया तब वह यह पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि जेएसडब्ल्यू को एक घर-घर में पहचाने जाने योग्य घरेलू ब्रांड कैसे बनाया जाए। उन्होंने हाल ही में ब्राउन यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी की थी और उनकी पहली परियोजना मार्केटिंग विभाग में थी। उन्हें यह बताया गया कि प्रतिस्पद्र्धी कंपनी टाटा स्टील का टिस्कॉन ब्रांड 10 फीसदी अधिक शुल्क लगाने में सक्षम था क्योंकि कंपनी की अच्छी पहचान थी जबकि जेएसडब्ल्यू के नियोस्टील (उनका कहना है कि यह एक 'बेहतर उत्पाद' है) ने स्वीकृति पाने के लिए काफी संघर्ष किया। 

उनका कहना है, 'हमें सीमेंट के क्षेत्र में भी इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ा जहां हमें बिड़ला जैसे प्रमुख ब्रांड से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी इसीलिए मैंने सोचा कि जेएसडब्ल्यू को एक ऐसे संस्थान का निर्माण करना चाहिए और ओलिंपिक खेलों को चुनना चाहिए। राष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान बनने के साथ-साथ बेहतर ब्रांड निर्माण के लिए भी काम किया जा सकता है।'

अगले एक साल तक जिंदल और जेएसडब्ल्यू स्पोट्र्स के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) और डेविस कप के पूर्व खिलाड़ी मुस्तफा घोष ने इस कारोबार के लिए मॉडल तैयार करने के मकसद से दुनिया भर के प्रमुख खेल केंद्रों का दौरा किया। इसका नतीजा इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ  स्पोर्ट के रूप में निकला। इसका दायरा 42 एकड़ में फैला था और इसने साल 2014 से ही भारत के लिए कई ओलिंपिक एथलीट तैयार किए हैं।

यह खेल अकादमी अच्छी तरह से चल रही है और जिंदल अधिक दांव लगा रहे हैं। भारत को कुछ सालों में अंडर-17 फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी करनी थी और फुटबॉल महासंघ को लगा कि कॉरपोरेट जगत की उपस्थिति से नए बुनियादी ढांचे को गति मिलेगी। जिंदल ने बोली लगाई और बेंगलूरु फ्रैंचाइजी के लिए अधिकार मिल गए। जिंदल कहते हैं, 'हमें लगा कि भारतीय फुटबॉल के लिए पेशेवर रूप से प्रबंधन वाले फुटबॉल क्लब का होना जरूरी है। दूसरा बेंगलूरु में जेएसडब्ल्यू ब्रांड को स्थापित करने और इसे घर-घर में पहचाना जाने वाला नाम बनाने का भी एक मकसद था।' इसके बाद 2017 में हरियाणा के खिलाडिय़ों को अपने साथ जोड़ा और एक साल बाद उन्होंने जीएमआर ग्रुप से इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की दिल्ली फ्रैंचाइजी डेल्ही कैपिटल्स में 50 फीसदी की हिस्सेदारी हासिल की।

भारत में स्पोट्र्स टीम के माध्यम से पैसा बनाना कभी आसान नहीं रहा। आलम यह रहा कि खेल में अधिक भागीदारी से हमेशा नुकसान ही रहा। जिंदल का कहना है कि आईपीएल और कबड्डïी लीग की फ्रैंचाइजी मुनाफे में है वहीं फुटबॉल फ्रैंचाइजी को अभी पैसा कमाना है। कंपनी ने कमाई के लिए तीन विशेष तरह की योजना बनाई है। सबसे पहले, फ्रैंचाइजी से कमाई करती है। दूसरा, खेल प्रबंधन कारोबार से भी कमाई का जरिया तैयार होता है जहां जेएसडब्ल्यू स्पोट्र्स एथलीट का प्रबंधन करता है जिसमें ऋ षभ पंत और नीरज चोपड़ा जैसे खिलाडिय़ों के नाम शामिल हैं और इनमें से कई ने इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ  स्पोट्र्स में प्रशिक्षण लिया या वे कंपनी की स्पोर्टिंग फ्रैंचाइजी का हिस्सा हैं।

तीसरी बात यह है कि जिंदल अब खेल सामग्री कारोबार में विस्तार करने और जेएसडब्ल्यू से जुड़े मशहूर एथलीट पर वृत्तचित्र बनाने की योजना बना रहे हैं। कंपनी खेल कारोबार में और मुख्य रूप से ई-स्पोट्र्स में स्टार्टअप तैयार करने की भी योजना बना रही है। जिंदल कहते हैं, 'मैं व्यावसायिक पहलू के लिहाज से इस बात में यकीन करता हूं कि खेल का एक अविश्वसनीय भविष्य है विशेष रूप से लाइव स्पोट्र्स में क्योंकि इस क्षेत्र के साथ-साथ खबरों की दुनिया में विज्ञापनदाताओं को लाइव दर्शक मिलते हैं। हम फुटबॉल, क्रिकेट और कबड्डी के जरिये एक बड़ी खेल कंपनी बना सकते हैं।'

यह संस्था भी ज्यादा एथलीट को अपने साथ जोडऩे का विकल्प तलाश रही है जो 2024 के पेरिस और 2028 के लॉस एंजलिस ओलिंपिक में पदक पा सकते हैं। जिंदल का कहना है, 'हमने पहले से ही कुछ ऐसे एथलीटों की पहचान की है जो संभावित ओलिंपिक खिलाड़ी हो सकते हैं। हमारे एथलीटों की सफलता के कारण हमें काफी फंडिंग मिली है, जिसमें जेएसडब्ल्यू से मिली फंडिंग भी शामिल है।' हालांकि इस उद्यम को अब भी जेएसडब्ल्यू समूह से समर्थन की जरूरत है लेकिन जिंदल को उम्मीद है कि 2025 तक यह एक मुनाफे वाला खेल क्षेत्र का उद्यम होगा। वह कहते हैं, 'मेरा सपना भारत में एक खेल कंपनी के लिए पहला सार्वजनिक निर्गम लाने का है।'

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