बिजनेस स्टैंडर्ड - ईवी पर समग्र दृष्टिकोण
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ईवी पर समग्र दृष्टिकोण

संपादकीय /  July 29, 2021

भारत सरकार ने बीते कुछ वर्षों के दौरान इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) अपनाने को बढ़ावा देने के लिए कई पहल शुरू की हैं। भारत के शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं और सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देना समझ में आता है क्योंकि इससे वाहनों से होने वाला प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। चूंकि ईवी की बिक्री की गति तेज होने की संभावना है इसलिए विदेशी विनिर्माता भी भारतीय बाजार में रुचि ले रहे हैं। उदाहरण के लिए टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने कहा है कि उनकी कंपनी भारत में इलेक्ट्रिक कार पेश करना चाहती है '...लेकिन भारत में आयात शुल्क किसी भी अन्य बड़े देश की तुलना में सबसे अधिक है।' कंपनी सरकार के साथ भी इस विषय पर चर्चा कर रही है। भारत में 40,000 डॉलर तक की कीमत वाली आयातित कारों पर 60 फीसदी आयात शुल्क लगता है जबकि इससे महंगी कारों पर 100 फीसदी आयात शुल्क लिया जाता है।

ईवी को बढ़ावा दे रहे देश में आसान नीति यही होती कि इलेक्ट्रिक कारों को सस्ता करने के लिए शुल्क में कमी की जाए। बहरहाल, सरकार यदि जानकारी भरा रुख अपनाए तो बेहतर होगा। सरकार को हमेशा यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि किसी भी नीतिगत बदलाव का समग्र प्रभाव क्या होगा। आशा के अनुरूप ही शुल्क को लेकर मस्क की टिप्पणी के बाद प्रतिक्रियाएं भी आईं। हुंडई इंडिया के प्रबंध निदेशक एसएस किम ने उनकी बात का समर्थन किया, वहीं ईवी को लेकर महत्त्वाकांक्षी योजना बना रही ओला के भवीश अग्रवाल इससे असहमत हैं और उनका कहना है कि भारत को स्वदेशी पर जोर देना चाहिए और वैश्विक कंपनियों को मेक इन इंडिया के लिए आकर्षित करना चाहिए। सरकार को वैश्विक कंपनियों के साथ सहयोग कर भारत में संयंत्र स्थापित करने में मदद करनी चाहिए। ओला ई-स्कूटर निर्माण की क्षमता विकसित कर रही है। भारत में वाहनों का तगड़ा विनिर्माण आधार है और उसे व्यापक पैमाने पर ईवी के लिए मूल्य शृंखला विकसित करनी चाहिए।

सरकार ने ईवी को बढ़ावा देने के लिए एफएएमई योजना, वस्तु एवं सेवा कर कम करने और व्यक्तिगत आय कर में छूट जैसे कदम उठाए हैं। सरकार उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजना के तहत भी बैटरियों के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। सीमा शुल्क में कटौती की बात करें तो सभी कारों के मामले में इसमें कटौती का प्रयास किया जाना चाहिए। ऐसा करने से प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता में सुधार होगा। परंतु सरकार को केवल ईवी के लिए शुल्क कटौती से बचना चाहिए क्योंकि यह कदम पारंपरिक वाहन उद्योग के खिलाफ होगा और कंपनियों को बेहतर कारों का निर्माण करने का प्रोत्साहन नहीं मिलेगा। आदर्श स्थिति में सरकार को उन्नत तकनीक के एकतरफा चयन से बचना चाहिए। मसलन हाइड्रोजन ईंधन सेल के क्षेत्र में काफी सुधार हो रहा है जो पर्यावरण के लिए और बेहतर होगा। ईवी के संदर्भ में यह ध्यान देने लायक है कि बिजली का स्रोत अभी भी प्रमुख रूप से कोयला ही है।

ईवी का निर्माण बढ़ाने के पहले कुछ और मसलों को हल करना होगा। भारत को चार्जिंग का मजबूत ढांचा बनाना होगा। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2026 तक 20 लाख ईवी होंगे जिनके लिए 4 लाख चार्जिंग स्टेशनों की जरूरत होगी। अभी देश में 1,800 चार्जिंग स्टेशन हैं। सरकार ने चार्जिंग के लिए दिशानिर्देश दिए हैं और चार्जिंग के लिए लाइसेंस की जरूरत समाप्त की है लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है। व्यापक स्तर पर बिजली की पारदर्शी कीमत अहम मसला होगी। गैर वाणिज्यिक दर पर बिजली की मांग में इजाफा सरकारी बिजली कंपनियों को प्रभावित कर सकता है जबकि वे पहले ही कर्ज में डूबी हैं। सरकार के लिए बेहतर होगा कि वह ईवी को लेकर ज्यादा समग्र व्यवस्था कायम करे। आयात शुल्क केवल एक पहलू है।

Keyword: ईवी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, प्रदूषित शहर, वाहन, प्रदूषण, आयात शुल्क,
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