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अमेरिकी तेजी पर दांव और तकनीकी शेयर

आकाश प्रकाश /  July 26, 2021

वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से ही अमेरिका किसी भी वैश्विक निवेशक के लिए उपयुक्त स्थान रहा है। विडंबना ही है कि जो संकट सबसे पहले अमेरिका में ही उत्पन्न हुआ और जिसने अमेरिका के वित्तीय तंत्र को घुटनों पर ला दिया, वह अमेरिका के लिए इक्विटी रिटर्न के लिए भी निर्णायक साबित हुआ। वर्ष 2008 के बाद बीते 13 वर्ष में अमेरिकी इक्विटी बाजारों ने शेष विकसित विश्व और उभरते बाजारों को 7 फीसदी वार्षिक की दर से पीछे छोड़ दिया। ऐसे में यदि 2008 के आरंभ में अमेरिका में 100 डॉलर की राशि निवेश की गई थी तो वह राशि आज 385 डॉलर हो चुकी है जबकि शेष विश्व में उसका मूल्य केवल 165 डॉलर हुआ।

आज वैश्विक शेयर सूचकांक में अमेरिका का भार 58 फीसदी है जबकि अमेरिका के अलावा विकसित देशों का भार 29 फीसदी और उभरते बाजारों का 13 फीसदी। ऐसा तब है जबकि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अमेरिका की हिस्सेदारी 25 फीसदी है। अमेरिकी बाजार के दबदबे को देखते हुए और उसके शानदार प्रदर्शन की मजबूती और टिकाऊपन तथा नकदी की उपलब्धता को देखते हुए उन लोगों को माफ किया जा सकता है जो सोचते हैं कि वैश्विक विविधता को लेकर परेशान क्या होना? अमेरिका के बाहर निवेश क्यों किया जाए? सच यह भी है कि सभी बड़े वैश्विक बाजार अमेरिका से गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में जोखिम की स्थिति बनने पर हालात तेजी से किसी भी दिशा में जा सकते हैं। जब वित्तीय बाजार तनाव में थे तब विविधता से कोई फायदा नहीं हुआ।

उभरते बाजारों के निवेशकों के लिए समान रूप से प्रासंगिक प्रश्न है परिसंपत्ति वर्ग का आकर्षण। वर्ष 1988 में परिसंपत्ति वर्ग की शुरुआत से आज तक अमेरिकी शेयर बाजार ने पूरे 33 वर्ष की अवधि में उभरते बाजारों को पीछे छोड़े रखा। उभरते बाजारों का प्रदर्शन इस तथ्य के बावजूद कमजोर रहा कि इस अवधि में ज्यादातर वक्त उभरते बाजारों का वास्तविक जीडीपी 3.5 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा जो अमेरिका से तेज था। परंतु यह तेजी आय में तब्दील नहीं हुई।

बीते एक दशक में अमेरिका जहां इक्विटी प्रदर्शन के मामले में सबसे आगे है, वहीं हमेशा से ऐसा नहीं था। हालांकि सन 1970 के दशक और 1980 के दशक के अधिकांश समय में वैश्विक बाजार में अमेरिका का प्रदर्शन काफी कमजोर था। गत 50 वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो 10 वर्ष की अवधि में अमेरिकी शेयर बाजार के अच्छे बुरे प्रदर्शन का 75 फीसदी हिस्सा अगले 10 वर्षों में पुन: पहले जैसी स्थिति में आ गया। यह पलटाव आय वृद्धि और तकनीकी क्षेत्र के प्रदर्शन के उलटने से आया। पूरे 50 वर्ष की अवधि में अमेरिका ने कुल 10.5 फीसदी सालाना प्रतिफल दिया जबकि यूरोप में यह 9.7 फीसदी, जापान में 7.2 फीसदी रहा। अमेरिका ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन वह पिछले दशक जैसा कतई नहीं रहा।

यदि लंबी अवधि के अपेक्षाकृत क्षेत्रीय प्रतिफल में भी वैसा ही माध्य प्रत्यावर्तन देखने को मिलता है तो एक स्वाभाविक प्रश्न यह होगा कि आखिर यह बेहतर प्रदर्शन कैसे हासिल हुआ और इसका किस हद तक अनुमान लगाना संभव है? आंकड़ों पर सरसरी नजर डालने से भी यह पता चल जाता है कि मूल्यांकन क्षेत्रीय स्तर पर लंबी अवधि के प्रदर्शन का अनुमान लगाने में मददगार नहीं है। सापेक्षिक मूल्यांकन की मदद से अनुमान लगाना आसान नहीं है। जेपीएम ने हाल में ऐसा करने का प्रयास किया लेकिन यह कवायद कामयाब नहीं रही। सापेक्षिक प्रतिफल के माध्य प्रत्यावर्तन का संबंध आय वृद्धि में प्रत्यावर्तन से है, न कि चरों के सामान्यीकरण से।

विगत 12-13 वर्षों में अमेरिकी सापेक्षिक ताकत सापेक्षिक आय के बेहतर प्रदर्शन से संचालित है। आय का यह बेहतर प्रदर्शन बढ़ते मार्जिन और अमेरिकी सूचकांकों में तकनीकी शेयरों का भार 27 फीसदी है जबकि गैर अमेरिकी सूचकांकों में 12 फीसदी।

अमेरिकी मार्जिन और आय में इजाफा इसलिए हुआ क्योंकि प्रभावी कर दर में कमी आई। वैश्वीकरण ने भी इसमें योगदान किया। तमाम उद्योगों का संकेंद्रण एक अन्य कारक रहा। इस दौरान नई कंपनियां कम बनीं और सूचीबद्धता में कमी आई। विगत 20 वर्ष से अधिक समय में अमेरिका में सूचीबद्ध कंपनियां 6,000 से घटकर 3,000 रह गई हैं। विगत 13 वर्षों के बेहतरीन प्रदर्शन में अमेरिकी कॉर्पोरेट मार्जिन उभरते बाजार और यूरोप की तुलना में 400 आधार अंक बढ़ा है। 

चूंकि दरें और कर दोनों एकदम निचले स्तर पर पहुंच गए थे और कॉर्पोरेट संकेंद्रण भी अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका था इसलिए नए अमेरिकी प्रशासन को देखते हुए यह माना जा सकता है कि अमेरिका में मार्जिन अब कम होगा। मार्जिन सामान्य होने पर आय के मामले में सापेक्षिक बेहतरी भी स्थिर हो जाएगी। 

अमेरिकी सूचकांकों में तकनीकी कंपनियों को मिलने वाली तवज्जो दूसरा मसला है जिस पर विचार किया जाना चाहिए। अमेरिका के बेहतरीन प्रदर्शन में तकनीकी कंपनियों का अहम योगदान रहा है लेकिन वे इकलौती कारक नहीं हैं। तकनीकी क्षेत्र को हटा दिया जाए तो भी अमेरिकी शेयर बाजार का प्रदर्शन गैर अमेरिकी शेयरों से 5 फीसदी सालाना अधिक है। यानी बेहतर प्रदर्शन केवल तकनीकी शेयरों की बदौलत नहीं है लेकिन बीते 50 वर्ष में जब भी तकनीक फैशन में रही और उसने अपने ही बाजार में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, तब-तब अमेरिकी शेयर बाजारों ने वैश्विक बाजार को पीछे छोड़ा। यानी एक तरह से अमेरिका के बेहतरीन प्रदर्शन में तकनीकी कंपनियों का योगदान है। जहां तकनीकी क्षेत्र पहले ही उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है वहां अब और अधिक तेजी बरकरार रहने की आशा नहीं है।

इतिहास को देखते हुए यह मानना उचित है कि आने वाले वर्षों में अमेरिकी शेयर प्रतिफल की यह अपवाद स्वरूप तेजी समाप्त हो जाएगी। मुनाफा मार्जिन और सापेक्षिक आय वृद्धि से संचालित इस वृद्धि को तकनीकी क्षेत्र के बेहतरीन प्रदर्शन का भी साथ मिला है। उभरते बाजारों के शेयर और वैश्विक शेयरों ने बीते दशक में लगातार निराश किया है लेकिन अब उनका भी वक्त आएगा। यह अपरिहार्य है और इस पर दांव लगाया जा सकता है। ठीक उस समय जब माध्य प्रत्यावर्तन को एक चुकी हुई अवधारणा माना जा रहा है, वह वापसी कर रही है। अमेरिकी शेयर बाजार के भार में महत्त्वपूर्ण कमी आने का असर कई सलाहकारों के करियर पर भी पड़ सकता है। एक बार जब बेहतर प्रदर्शन की यह स्थिति बदलेगी तो वह सिलसिला भी वर्षों तक चलेगा। 

(लेखक अमांसा कैपिटल से संबद्ध हैं) 

Keyword: अमेरिकी तेजी, तकनीकी शेयर, प्रदर्शन, वैश्विक वित्तीय संकट, निवेशक,
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