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विदेश भेज रहे रकम तो पहले जांच-पड़ताल का करें जतन

संजय कुमार सिंह /  July 21, 2021

पहली बार विदेश रकम भेजने से पहले मन में कई बातें आती हैं। मसलन, रकम कैसे भेजी जाय और इस पर कितना खर्च आएगा आदि। मन में ये बातें उठनी स्वाभाविक हैं, खासकर जब आप मोटी रकम विदेश भेज रहे होते हैं तो चिंताएं और बढ़ जाती हैं। इन तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सबसे पहले रकम भेजने से जुड़े खर्च अच्छी तरह समझ लें और उन माध्यमों या इकाइयों की भी पड़ताल कर लें जिनके जरिये आप रकम भेजेंगे।

कई विकल्प मौजूद

इस समय आप तीन माध्यमों से विदेश रकम भेज सकते हैं। ये हैं बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे वाइज, बुकमाईफॉरेक्स आदि। अगर बड़ी रकम विदेश भेज रहे हैं तो आप सबसे अधिक विश्वसनीय माध्यम चुनना पसंद करेंगे। बैंक विश्वसनीयता के मानदंड पर सबसे अधिक खरे उतरते हैं और हमारे रोजमर्रा का हिस्सा होने के कारण हम इनकी कार्य शैली से भी परिचित होते हैं। आरबीएल बैंक में कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं प्रमुख (व्यापार एवं विदेशी मुद्रा, डेबिट कार्ड, कूटनीतिक मिशन खंड) अमिताभ भटनागर कहते हैं, 'जब आप बैंक के जरिये रकम विदेश भेजने का विकल्प चुनते हैं तो शेष सारी औपचारिकताएं बैंक पूरी करता है। बैंक इस मामले में अधिकृत डीलर 1 श्रेणी में आते हैं और केवल उन्हें ही रकम भेजने के लिए लेनदेन करने का अधिकार होता है। थॉमस कुक जैसी इकाइयां कुछ श्रेणियों के लिए अपवाद हो सकती हैं।' रकम आप आप भले ही किसी भी माध्यम से भेज रहे हैं लेकिन अंतत: पूरी प्रक्रिया बैंक से ही निपटाई जाती है। हाल के दिनों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी रकम विदेश भेजने के कारोबार में उभरे हैं क्योंकि वे ग्राहकों से अपेक्षाकृत कम शुल्क लेते हैं।

खर्च का रखें ध्यान

विश्वसनीयता, खर्च और पारदर्शिता के बाद एक और महत्त्वपूर्ण बात होती है उस माध्यम या प्लेटफॉर्म का चयन जिसके जरिये आप रकम विदेश भेजेंगे। वाइज में प्रमुख (एशिया प्रशांत एवं पूर्व एशिया विस्तार) प्रमुख वेंकटेश साहा कहते हैं, 'जिस इकाई के जरिये आप रकम भेज रहे हैं उससे यह जरूर पूछ लें कि वह कितना शुल्क लेगी। मुद्रा विनिमय दर भी लागू होगी और इसे लेकर भी बात पहले ही कर लें। आप कितनी रकम का भुगतान करेंगे और विदेश में संबंधित व्यक्ति या इकाई को कितनी रकम मिलेगी उसे लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए।'विदेश रकम भेजने से जुड़े खर्च के दो पहलू होते हैं। सबसे पहले तो लेनदेन शुल्क होता है जो लगभग हरेक इकाई लेती है। दूसरा खर्च विदेशी मुद्रा विनियम पर मार्क-अप फीस होती है। जब आप विदेशी मुद्रा में रकम भेजते हैं या लेनदेन करते हैं तो बैंक आदि मार्क-अप फीस के रूप में एक रकम लेते हैं। इस कारोबार से जुड़े सूत्रों के अनुसार बैंकों का लेनदेन शुल्क 1,200 से 3,000 रुपये हो सकता है। बुकमाईफॉरेक्स इस समय लेनदेन शुल्क के रूप में 750 रुपये लेता है। बुकमाईफॉरेक्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी सुदर्शन मोटवानी कहते हैं, 'बैंक डॉलर, यूरो, पाउंड, कनाडाई डॉलर में विनियम पर 1.5-3.0 प्रतिशत मार्क-अप फीस लेते हैं। जिन देशों में बैंकों में नोस्ट्रो रेमिटेंस सुविधा नहीं होती है वहां यह फीस 4 से 6 प्रतिशत तक हो सकती है। हम डॉलर और यूरो जैसे तेजी से लेनदेन पूरा करने वाली मुद्राओं पर 0.4 प्रतिशत मार्क-अप फीस लेते हैं और यह यदा-कदा ही 0.8 प्रतिशत से अधिक होती है।' नोस्ट्रो रेमिटेंस सुविधा या नोस्ट्रो खाता किसी घरेलू बैंक का विदेश में वह खाता होता है जिसमें रकम उस देश की मुद्रा में जमा रहती है।

वाइज ने भी शुल्क तय कर रखा है। साहा कहते हैं, 'रकम जितनी अधिक होती है फीस उतनी कम लगती है। औसतन 5 लाख रुपये से अधिक रकम पर यह फीस 1.7 से 1.8 प्रतिशत होती है। अगर रकम छोटी है तो हम करीब 2 प्रतिशत फीस लेते हैं।' विनिमय दर को लेकर साहा कहते हैं कि गूगल पर आप जो विनिमय दर देखते हैं हम उसी अनुसार रकम लेते हैं। आपको सही दर मिल रही है या नहीं आप इसकी पड़ताल ऑनलाइन इंटरबैंक रेट देखकर कर सकते हैं। सेवा प्रदाता आपको जिस विनियम दर की पेशकश कर रहा है आप उससे इसकी तुलना कर सकते हैं। इससे मार्क-अप शुल्क के बारे में आपको अंदाजा हो जाएगा।

नियमों की रखें जानकारी

लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत कोई व्यक्ति हरेक वित्त वर्ष अधिकतम 2,50,000 डॉलर रकम भेज सकता है। इसके अलावा 25,000 डॉलर की भी एक सीमा है जिसके बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए। मोटवानी कहते हैं, '25,000 डॉलर रकम तक 'फॉर्म ए2' में आवश्यक जानकारियां स्वत: आ जाती हैं और हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होती है। रकम इससे अधिक होने पर कागजी हस्ताक्षर की जरूरत होती है।' इस फॉर्म पर एक बार हस्ताक्षर करने के बाद आप 2.5 लाख डॉलर तक रकम भेज सकते हैं।'

इन बातों पर रखें नजर

रकम विदेश भेजते समय सटीक जानकारी दें ताकि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के झमेले में न पडऩा पड़े। सभी दस्तावेज अच्छी तरह पढऩे के बाद स्वयं इसे भरें न कि दूसरो के भरोसे छोड़ दें। रकम विदेश भेजने से पहले सारी कवायद समय रहते शुरू करें। अंतिम समय में यह कार्य करने से हड़बड़ी में आपको रकम भेजने पर अधिक खर्च का बोझ उठाना पड़ सकता है। आप जितनी रकम विदेश भेजना चाहते हैं उस पर आने वाले तमाम शुल्कों के बारे में पहले ही पूछ लें। इसकी वजह यह है कि कुछ मामलों में विदेश में भी बैंक कुछ रकम काट लेते हैं। इससे प्राप्तकर्ता के हाथ में आवश्यक रकम नहीं आएगी। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स में मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन कहते हैं, 'अगर आप किसी दूसरे देश में किसी सेवा प्रदाता को रकम भेजे रहे हैं और उसे जरूरत से कम रकम मिलती है तो वह अपनी सेवा नहीं देगा। इससे एक बार फिर आपको पूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा और एक मामूली रकम भेजने पर भी भारी भरकम शुल्क चुकाना होगा।'

Keyword: विदेश, रकम, एनबीएफसी, वाइज, बुकमाईफॉरेक्स, बैंक, विदेशी मुद्रा विनियम,
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