बिजनेस स्टैंडर्ड - मकान खरीदते वक्त अनुमानित किराये का जरूर रखें ध्यान
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, October 20, 2021 03:38 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

मकान खरीदते वक्त अनुमानित किराये का जरूर रखें ध्यान

संजय कुमार सिंह /  July 21, 2021

दिल्ली में पेशे से वकील असित तिवारी ने नोएडा के सेक्टर 133 में अपना घर किराये पर दे रखा था। कोविड-19 महामारी शुरू होने के दो महीने बाद उनका किरायेदार अपने शहर चला गया। तब से तिवारी का मकान खाली पड़ा है और किराये के रूप में आने वाली आय बंद हो गई है, जबकि दूसरी तरफ उन्हें आवास ऋण की किस्त भरने के साथ ही जायदाद कर और अन्य दूसरे खर्चों के मद में भुगतान करना पड़ रहा है।

जनगणना आंकड़ों के अनुसार देश के बड़े शहरों में करीब 11-25 प्रतिशत आवासीय मकान खाली पड़े हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया में कार्यकारी निदेशक-मूल्यांकन एवं सलाह, खुदरा एवं आतिथ्य- गुलाम जिया कहते हैं, 'औसतन किराये (रेंट) से होने वाली कमाई केवल 2.0-2.5 प्रतिशत होती है। जायदाद कर एवं रखरखाव शुल्क की गणना करने के बाद यह कम होकर1.5-2.0 प्रतिशत रह जाती है। कई मकान मालिक इस डर से मकान किराये पर नहीं लगाते कि किरायेदार मकान हथिया लेगा।'

क्या किराया आय के लिए करना चाहिए निवेश?

इस विषय पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि किराये पर चढ़ाने के मकसद से मकान खरीदने के लिए फिलहाल दो वर्षों तक इंजार करना चाहिए। जिया कहते हैं, 'लोग आम तौर पर पंूजी बढ़ाने के लिए आवासीय जायदाद में निवेश करते हैं। हालांकि पिछले पांच वर्षों से मकान की कीमतें कम हो रही हैं और कम से कम अगले दो वर्षों में इनमें सुधार की गुंजाइश नजर नहीं आ रही है।'

दूसरे विशेषज्ञों का मानना है कि जायदाद में निवेश करने का यह अच्छा समय है। नोब्रोकर डॉट कॉम के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी अमित अग्रवाल कहते हैं, 'जायदाद की कीमतें काफी लंबे समय से स्थिर हैं और अब इनमें और अधिक गिरावट आने की गुंजइश नहीं बची है। ऐसे में आप चाहें तो दीर्घ अवधि के लिए जायदाद खरीद सकते हैं।' अग्रवाल के अनुसार 10 वर्ष की अवधि में पूंजी एवं किराये से प्राप्त रकम में क्रमश: सालाना 7-8 प्रतिशत और 2-3 प्रतिशत तेजी की उम्मीद की जा सकती है जिससे कुल प्रतिफल बढ़कर 10-11 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। डेवलपर कीमतों को लेकर मोल-भाव करने के लिए तैयार हैं और आकर्षक भुगतान योजनाओं की भी पेशकश कर रहे हैं।

दो अन्य बातें भी जायदाद में निवेश करने के पक्ष में जाती हैं। अग्रवाल कहते हैं, 'समय-समय पर किराया भी बढ़ता है, इसलिए महंगाई के लिहाज से भी देखें तो कोई नुकसान नहीं है। मकान खरीदने में आप अपनी केवल 30 प्रतिशत पूंजी लगाते हैं और शेष 70 प्रतिशत रकम ऋण लेकर मकान खरीदते हैं और फिर इसे किराये पर देकर नियमित रकम भी अर्जित कर सकते हैं। दूसरी तरफ, जायदाद खरीदने में लगी कुल पूंजी भी बढ़ती रहती है।'

जगह का जरूर रखें ख्याल

निवेश करने पहले इस पर जरूर सोच-विचार कर लें कि जायदाद कहां खरीदनी चाहिए। अग्रवाल कहते हैं, 'ऐसी जगह जायदाद खरीदें जहां कार्यालयों के अलावा आईटी पार्क या व्यावसाय केंद्र मौजूद हैं और जहां बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं।' इसके साथ ही ऐसी जगह सार्वजनिक परिवहन परिवहन सुविधाएं जैसे मेट्रो की भी पहुंच होनी चाहिए। जहां तक अपार्टमेंट के आकार का प्रश्न है तो अनुमानित किराये का हिसाब-किताब लगाकर निर्णय लें। स्क्वायर याड्र्स में मुख्य कारोबारी अधिकारी अल्ताफ अहमद कहते हैं, 'हरेक जगह कुछ खास तरह के लोग होते हैं जो एक निश्चित किराया देने के लिए तैयार रहते हैं। पहले यह जान लें आपके क्षेत्र में किराया कितना चल रहा है और तब उसी आकार का फ्लैट खरीदें।'

जारी रहनी चाहिए किराये से आय

अगले कुछ महीनों तक किराये से बहुत अधिक रकम आने की उम्मीद नहीं रखें और एक-दो हजार रुपये कम भी मिल रहे हैं तो नहीं घबराएं। क्लियरटैक्स के संस्थापक एवं सीईओ अर्चित गुप्ता कहते हैं, 'मकान मालिक को खाली मकान के लिए भी कर भुगतान करना पड़ता है, इसलिए कुछ न कुछ रकम किराये के रूप में आती रहे तो अच्छी बात है।' अहमद सिक्योरिटी डिपॉजिट भी बहुत अधिक नहीं मांगने की सलाह देते हैं। अहमद के अनुसार बतौर किराया ठीक-ठाक रकम हासिल करने के लिए अगल-बगल अंतिम पांच महीनों के किराये के रुझान का पता लगाएं। प्रॉप्सएएमसी जैसे इकाइयां ऐसे आंकड़े रखती हैं।

समझौते पर करें हस्ताक्षर

अपनी जायदाद खोने के डर से बचने के लिए एक अच्छे वकील की मदद से एक पुख्ता समझौता तैयार कराएं। खेतान ऐंड कंपनी में पार्टनर हर्ष पारीख कहते हैं, 'लीज एग्रीमेंट के बजाय लीव ऐंड लाइसेंस एग्रीमेंट के जरिये मकान किराये पर दें। लीव ऐंड लाइसेंस के जरिये जायदाद अस्थायी तौर पर इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है जबकि लीज एग्रीमेंट से आप कुछ अधिकार किरायेदार को दे देते हैं।'

Keyword: मकान खरीद, किरायेदार, आवास ऋण, किस्त, प्रतिफल,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बाजार में तेजी का सिलसिला अभी बना रहेगा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.