बिजनेस स्टैंडर्ड - बिजली क्षेत्र की विफलता
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, August 03, 2021 12:11 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

बिजली क्षेत्र की विफलता

संपादकीय /  07 01, 2021

देश में विद्युत वितरण सुधार के लिए तीन लाख करोड़ रुपये की योजना इस बात को रेखांकित करती है कि तमाम राज्यों समेत देश का राजनीतिक वर्ग इस क्षेत्र की बुनियादी ढांचागत कमी को दूर कर पाने में विफल रहा है और वह है: शुल्क दरों में सुधार। इस योजना की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वर्ष फरवरी के बजट भाषण में की थी जिसे बुधवार को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। इस नए कार्यक्रम का नाम- रिफॉर्म बेस्ड ऐंड रिजल्ट लिंक्ड रीवैंप्ड डिस्ट्रिब्यूशन स्कीम, इसके उद्देश्य को सामने रखता है। सन 2015 में उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की यह दूसरी योजना है लेकिन बीते 15 वर्षों में यह इस तरह की पांचवीं योजना है। इससे पता चलता है कि कैसे इस बीच तमाम केंद्र और राज्य सरकारें राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र के मूल्य सुधार से हिचकती रहीं और लक्षित लाभार्थियों की सब्सिडी कम करने से भी पीछे हटती रहीं।

उदय योजना के तहत वित्तीय सहायता मुहैया कराई गई जो प्रमुख रूप से राज्य सरकारों द्वारा जारी किए गए बॉन्ड के रूप में थी। इन्हें सरकारी बैंकों ने खरीदा और इनके माध्यम से 2019 तक वित्तीय और परिचालन सुधार किए जाने थे। व्यापक लक्ष्य यही था कि समग्र तकनीकी और वाणिज्यिक (एटीऐंडसी) नुकसान को 15 फीसदी तक लाया जाए और आपूर्ति की समग्र लागत तथा एसीएस-एआरआर के नाम से प्रचलित कुल हासिल सालाना राजस्व के अंतर को समाप्त किया जाए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बॉन्ड जारी किए गए जबकि वितरण कंपनियों के प्रदर्शन में कोई खास सुधार नहीं हुआ। एटीऐंडसी नुकसान बढ़कर 21.7 फीसदी हो गया जबकि एसीएस-एआरआर का अंतर 50 पैसे प्रति यूनिट हो गया। यहां तक कि एसीएस-एआरआर अंतर में मामूली सुधार भी मोटे तौर पर इसलिए हुआ क्योंकि बिजली की कीमतों में सार्थक और पारदर्शी सुधार के बजाय उद्योग जगत समेत प्रीमियम उपभोक्ताओं के लिए शुल्क दरों में भारी इजाफा किया गया। यह तब जबकि बिजली क्षेत्र पर उत्पादकों का बकाया बढ़ता जा रहा था। खासकर स्वतंत्र विद्युत उत्पादकों और राज्य सरकारों से मिलने वाली प्रत्यक्ष शुल्कवाली बिजली सब्सिडी 2016 से करीब 32 फीसदी बढ़ी है।

नई योजना ने मूल उदय केलक्ष्य को 2024-25 तक बढ़ा दिया है और बिजली क्षेत्र की अन्य सभी सुधार योजनाएं इसमें समाहित होंगी। उदाहरण के लिए ग्रामीण विद्युतीकरण, पारेषण नेटवर्क सुधार और कृषि क्षेत्र के लिए स्वच्छ ऊर्जा नेटवर्क जैसी योजनाएं। परंतु इसमें कुछ उपयुक्त समायोजन किए गए। ऋण वितरण को कुछ न्यूनतम बुनियादी मानकों से जोड़ा गया है और फंड जारी करने के पहले हर वर्ष इसकी समीक्षा की जाएगी। असल परीक्षा यह है कि सरकार अपने इरादों में कितनी कामयाब हो पाती है। मई 2020 में जब स्पष्ट था कि उदय के लक्ष्य हासिल नहीं होंगे, तब वितरण कंपनियों को 1.2 लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज दिया गया ताकि वे अपना बकाया निपटा सकें। आवंटन इस आधार पर किया गया कि महामारी के कारण मांग में अचानक कमी आई। इस बार स्मार्ट मीटरिंग और कृषि फीडरों को अलग और सौर ऊर्जा चालित करने पर जोर है। दोनों पहल अहम हैं क्योंकि सौर पंप सेट राज्यों को कृषि क्षेत्र की भारी बिजली सब्सिडी से बचा सकते हैं। इससे वितरण कंपनियों को बिजली की कीमत पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। गरीबों को सस्ती बिजली भी दी जा सकेगी। नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि यदि उपरोक्त काम हो सका तो कृषि क्षेत्र की बिजली सब्सिडी चार-पांच साल में समाप्त हो जाएगी। असल प्रश्न यह है क्या राजनीतिक प्रतिष्ठान इससे जुड़े राजनीतिक लाभ को यूंही जाने देगा? आजादी के बाद से ही देश में बिजली की कीमत के साथ चुनावी लाभ जुड़े हैं।

Keyword: बिजली क्षेत्र, विफलता, विद्युत वितरण, उदय, एटीऐंडसी, शुल्क दर,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 पीएमआई, निर्यात के आंकड़ों में तेजी अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.