बिजनेस स्टैंडर्ड - आंकड़ों की कमी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, August 01, 2021 06:12 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

आंकड़ों की कमी

संपादकीय /  June 29, 2021


देश के नागरिकों और कारोबारियों को महामारी की दिक्कत से संरक्षित करने के लिए नीतियां बनाने वाले नीति निर्माताओं के समक्ष एक बड़ी बाधा यह है कि उनके पास उच्च गुणवत्ता वाले आंकड़ों का अभाव है। जब यही पता नहीं होगा कि इस असाधारण संकट ने आम परिवारों और कारोबारी गतिविधियों को किस तरह प्रभावित किया है तो इस संबंध में नीतियां बनाना भी निश्चित रूप से कठिन है। रोजगार की उपलब्धता से लेकर प्रवासन और खपत के चयन तक सभी क्षेत्रों पर महामारी के प्रभाव का आकलन करने के लिए आंकड़े जरूरी हैं। निजी क्षेत्र के कुछ आंकड़ों का इस्तेमाल करके समृद्धि या आर्थिक सुधार को लेकर व्यापक संकेत निकालने का प्रयास किया गया है। अर्थशास्त्रियों और निवेशकों ने भी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग द इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) कंज्यूमर पिरामिड्स हाउसहोल्ड सर्वे या सीपीएचएस का रुख किया। सीपीएचएस ने महामारी के असर के बारे में कठोर निष्कर्ष दिए हैं। इनके मुताबिक महामारी के कारण 97 फीसदी परिवारों की आय प्रभावित हुई जबकि दूसरी लहर के दौरान एक करोड़ लोग बेरोजगार हुए। ये आंकड़े महामारी की गंभीरता बताते हुए राहत और बचाव के प्रयासों की जरूरत पर बल देते हैं।

यद्यपि सीपीएचएस को लेकर स्वयं सरकार और वाम रुझान वाले अकादमिक विद्वानों के बीच विवाद रहा है। ज्यां द्रेज और अन्य विद्वानों ने सीपीएचएस द्वारा अपनाई गई प्रविधि की आलोचना करते हुए कहा कि उसके नमूने अधिक संपन्न वर्ग की ओर झुकाव रखने वाले थे। कहने का तात्पर्य यह है कि जिन परिवारों का सर्वेक्षण किया गया वे शहरी इलाकों की मुख्य सड़कों पर रहने वाले थे, ऐसे में शायद पीछे की गलियों में और अंदरूनी इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों का सर्वे में व्यवस्थित प्रतिनिधित्व नहीं हो सका। सीएमआईई ने इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया में कहा है कि सर्वे इतने बड़े पैमाने पर किया गया कि उसमें अंदरूनी गलियों में रहने वाले परिवारों का प्रतिनिधित्व निश्चित तौर पर हुआ है। चाहे जो भी हो स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों की आलोचना सही है और उसका इस्तेमाल सीपीएचएस में सुधार के लिए किया जाना चाहिए। सरकार के अर्थशास्त्रियों ने सीपीएचएस के आधार पर ही हमला बोला है। इससे संकेत निकलता है कि उन्हें नहीं लगता कि यह अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर पेश करता है। उनका कहना है कि सीपीएचएस के आंकड़ों में एक पहेलीनुमा बात यह है कि हाल के दिनों में सीपीएचएस उत्पादन वृद्धि से नकारात्मक रूप से संबद्ध दिखता है। परंतु जैसा कि सीएमआईई का संकेत है उन्होंने वास्तविक नहीं सांकेतिक उत्पादन का प्रयोग किया है। उनकी यह दलील भी है कि सरकार द्वारा संचालित पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे अथवा पीएलएफएस के उलट सीपीएचएस रोजगार की अधिक सामान्यीकृत तथा कड़ी परिभाषा इस्तेमाल करता है: क्या प्रतिभागी उस दिन या एक दिन पहले रोजगारशुदा था? जबकि पीएलएफएस यह सवाल पूछता है कि क्या प्रतिभागी पिछले सात दिनों में एक घंटे के लिए भी रोजगारशुदा था। इन सवालों को लेकर अर्थशास्त्रियों में असहमति हो सकती है लेकिन यह अंतर सीपीएचएस द्वारा चिह्नित व्यापक रुझानों को नहीं नकार सकता। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था के पर्यवेक्षकों द्वारा इसकी अनदेखी करने की कोई वजह नहीं।

यदि सरकार सीपीएचएस के आंकड़ों के प्रयोग को लेकर चिंतित है तो उसे आंकड़ों की आलोचना में कम समय लगाना चाहिए और आर्थिक आंकड़ों के संग्रह और उन्हें जारी करने में सुधार पर अधिक ध्यान देना चाहिए। खासतौर पर उच्च तीव्रता वाले आंकड़े। उदाहरण के लिए पीएलएफएस के आंकड़े काफी अंतराल के बाद जारी होते हैं और ये इतने अनियमित हैं कि इन्हें किसी सार्थक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। भारत को सांख्यिकी के क्षेत्र में 21वीं सदी के उपयुक्त उपाय अपनाने होंगे। अमेरिका का ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिसटिक्स बेरोजगारी का अनुमान चालू जनसंख्या सर्वेक्षण के आधार पर करता है जो स्थायी जनगणना कर्मचारियों की सहायता से देश के 60,000 परिवारों से संपर्क करता है। भारत में भी ऐसी प्रणाली अपनाने की आवश्यकता है।

Keyword: नागरिक, नीतियां, नीति निर्माता, आंकड़ों का अभाव, सीएमआईई, सीपीएचएस,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार का खर्च घटने से जीडीपी पर पड़ेगा असर?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.