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ट्विटर और भारत सरकार के टकराव का क्या होगा भविष्य

तकनीकी तंत्र
देवांशु दत्ता /  06 22, 2021

ट्विटर और भारत सरकार के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है और दोनों एक दूसरे की आंखों में आंखे डाले खड़े हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चाहेगी कि ट्विटर वे तमाम ट्वीट हटा दे जो पार्टी और सरकार के प्रतिकूल हैं। जबकि पार्टी चाहेगी कि सरकार के पक्ष में और विपक्ष के विरोध में किए जाने वाले हर ट्वीट को बिना किसी आलोचना के प्रदर्शित किया जाए। निश्चित तौर पर सरकार तमाम तरह के सोशल मीडिया पर ऐसा ही चाहेगी लेकिन ट्विटर पर खासतौर से।

भाजपा मुख्यत: इसलिए नाराज है कि ट्विटर ने भाजपा के एक प्रवक्ता की पोस्ट को 'मैनिप्युलेटेड मीडिया' (तोड़मरोड़कर पेश की गई जानकारी) के रूप में सूचीबद्ध कर दिया था। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने आईटी नियम 2021 का हवाला देते हुए कहा कि ट्विटर का मध्यस्थ का दर्जा समाप्त हो गया है और ऐसे में ट्विटर पर अगर कोई व्यक्ति गलत पोस्ट करता है तो इसका जुर्माना कंपनी पर भी लगेगा। यह समय से पहले उठाया गया कदम है। आईटी नियमों के सामने कई तरह की कानूनी चुनौतियां हैं। यह संभव है कि ये नियम अभिव्यक्ति की आजादी और निजता के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रहे हों। ये नियम आईटी कानून पर आधारित हैं और ये मूल आईटी अधिनियम का उल्लंघन करते हैं। जबकि कोई अनुषंगी विधान मूल कानून का अतिक्रमण नहीं कर सकता। यदि आईटी नियमों को संवैधानिक मान लिया जाए तो भी यह न्यायालयों पर निर्भर करेगा कि वे ट्विटर का तकनीकी दर्जा तय करके बताएं कि कंपनी को बतौर मध्यस्थ विधिक बचाव हासिल है या नहीं।

यह दिलचस्प स्थिति है। भाजपा ट्विटर को व्यापक पहुंच का जरिया मानती है। खासतौर पर विदेशों में पहुंच बनाने का। पार्टी और उसके मित्रों तथा करीबियों ने काफी पैसा खर्च करके ऐसे संस्थान बनाए  जो ट्विटर पर संदेश प्रसारित करते हैं। यह संभव है कि दूसरे माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के जरिये संदेश दिया जाए लेकिन ट्विटर इस्तेमाल करने वाले वहां नहीं जाएंगे।

इसे समझने का सबसे आसान तरीका है आंकड़ों पर नजर डालना। ट्विटर के मुताबिक भारत में उसके दो करोड़ से भी कम सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। जबकि दुनिया भर में रोजाना 35.3 करोड़ से अधिक लोग ट्विटर पर आते हैं। इतना ही नहीं ट्विटर के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निजी ट्विटर अकाउंट पर 6.9 करोड़ फॉलोअर हैं। मोदी के फॉलोअरों में बहुत बड़ी तादाद ऐसे लोगों की है जो भारत में नहीं रहते। ट्विटर पर प्रतिबंध लगाना और उसे भारत से कारोबार समेटने को कहना संभव है। चीन, ईरान, उत्तरी कोरिया, तुर्कमेनिस्तान और नाइजीरिया ने ट्विटर पर प्रतिबंध लगा रखा है लेकिन इनमें से कोई स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश की छवि नहीं रखता।

यह भी संभव है कि प्रतिबंध लगने की स्थिति में भारतीय ट्विटर उपयोगकर्ता या उनका बड़ा हिस्सा अन्य माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर चला जाए जहां प्रसारित होने वाले संदेशों पर भाजपा का नियंत्रण अधिक है। लेकिन जाहिर है इसमें अधिक समय लगेगा।

परंतु वैश्विक उपयोगकर्ता ऐसा नहीं करेंगे और उन्हें प्रतिबंध अलोकतांत्रिक लग सकता है। ऐसे में अन्य बहुराष्ट्रीय संस्थान भी सतर्क हो जाएंगे। भारत शायद नहीं चाहेगा कि उसका नाम ऐसे देशों की फेहरिस्त में शामिल हो जिनका जिक्र हमने ऊपर किया है।

उपरोक्त पांच देश न केवल अलोकतांत्रिक हैं बल्कि उनमें एक और बात साझा है। उनमें से कोई वित्तीय सहायता या निवेश नहीं चाहता। कंपनियां चीन में निवेश करती हैं क्योंकि उन्हें आशा होती है कि वे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के अधिशेष से राजस्व और मुनाफा कमा सकेंगी। नाइजीरिया के पास तेल है, र्ईरान के पास तेल है और इसीलिए वह दशकों तक प्रतिबंध झेल सका, उत्तर कोरिया और तुर्कमेनिस्तान की सत्ता एकदम अलग थलग है और दोनों देशों में एक मजबूत शासक का अधिनायकवादी शासन है। यही वजह है कि ये पांचों देश वैश्विक छवि की रत्ती भर चिंता नहीं करते।

देश के सकल घरेलू उत्पाद में व्यापार की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है और ऊर्जा के क्षेत्र में हम घाटे में हैं। यही वजह है कि भारत वैश्विक छवि की चिंता करता है। सन 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर एक नजर डालिए। भारत सन 1990 के बाद से ही लगातार निवेश की तलाश में है। महामारी के कुप्रबंधन के कारण आर्थिक हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं और अगर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश कम होता है तो स्थितियां बहुत खराब हो सकती हैं।

ट्विटर की बात करें तो वह नहीं चाहेगा कि तीसरे सर्वाधिक उपभोक्ताओं वाले बाजार में अपनी पहुंच गंवाए। परंतु फिलहाल भारत से हासिल होने वाला राजस्व नगण्य है। जनवरी-मार्च 2021 में ट्विटर के राजस्व का 30 फीसदी हिस्सा जापान और अमेरिका से बाहर अर्जित हुआ। भारत से हासिल होने वाला राजस्व बहुत मामूली है।

सवाल यह है कि भारत सरकार और ट्विटर में से पहले पीछे कौन हटेगा? दोनों के पास गंवाने के लिए कुछ न कुछ है। समय पर भी विचार करना होगा। यदि ट्विटर पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया जाता है तो भाजपा को अगले चुनाव से पहले अपने संदेश देने के तरीके पर नए सिरे से ध्यान देना होगा और उपयोगकर्ताओं को प्लेटफॉर्म बदलने को कहना होगा। ट्विटर शायद इंतजार करना बेहतर समझे। लेकिन क्या उसके पास ऐसा करने का नैतिक साहस होगा?

Keyword: ट्विटर, विवाद, ट्वीट, मैनिप्युलेटेड मीडिया, अभिव्यक्ति, आईटी अधिनियम,
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