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बैंकों के सामने बढिय़ा प्रदर्शन जारी रखने की चुनौती

बैंकिंग साख
तमाल बंद्योपाध्याय /  June 21, 2021

कमाई का सीजन खत्म हो चुका है। अब वक्त एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था में 7.3 फीसदी गिरावट वाले साल में बैंकों के प्रदर्शन पर गौर करने का है। बीते साल बैंकों का ऋण पोर्टफोलियो सिर्फ 5.6 फीसदी बढ़ा है जो 1965 के बाद का न्यूनतम स्तर है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कर्ज की अदायगी पर छूट दी और कर्ज पुनर्गठन की भी मंजूरी दी। सरकार ने भी बदहाल क्षेत्रों के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के आपात कर्ज के इंतजाम किए। वर्ष 2020-21 में सूचीबद्ध भारतीय बैंकों का शुद्ध लाभ 41,038 करोड़ रुपये से दोगुने से भी ज्यादा 1.03 लाख करोड़ रुपये हो गया।

सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों की हालत तो नहीं सुधरी है लेकिन इस साल उनका समेकित शुद्ध लाभ 32,346 करोड़ रुपये हो गया जो एक साल पहले 9,013 करोड़ रुपये था। बैंकों के विलय के बाद सार्वजनिक बैंकों की संख्या12 ही रह गई है। इनमें से इंडियन ओवरसीज बैंक ने अभी तक मार्च तिमाही के आंकड़े नहीं जारी किए हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब ऐंड सिंध बैंक (पीएसबी) अब भी लाल निशान में बने हुए हैं। इनको छोड़ सारे सार्वजनिक बैंकों ने मुनाफा कमाया है। लाभ कमाने वालों में एक साल पहले तक घाटे में रहे बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक एवं यूनियन बैंक भी शामिल हैं।

वहीं 2020-21 में निजी बैंकों का सम्मिलित शुद्ध लाभ 50,053 करोड़ रुपये से बढ़कर 70,543 करोड़ रुपये हो गया। (इसमें जम्मू कश्मीर बैंक के आंकड़े नहीं हैं।) सभी सूचीबद्ध निजी बैंक मुनाफे में रहे हैं लेकिन इंडसइंड बैंक एवं बंधन बैंक समेत पांच निजी बैंकों के शुद्ध लाभ में कमी आई है।

सभी बैंकों ने परिचालन लाभ कमाया है लेकिन शुद्ध लाभ की तुलना में यह वृद्धि करीब 24 फीसदी है। सार्वजनिक बैंकों ने निजी बैंकों की तुलना में कहीं बेहतर परिचालन लाभ अर्जित किया है। बात जब फंसे कर्ज के लिए वित्तीय प्रावधान करने की आती है तो उलटा रुझान नजर आता है। निजी बैंकों का फंसे कर्ज के लिए प्रावधान 14 फीसदी बढ़कर 75,124 करोड़ रुपये हो गया जबकि सार्वजनिक बैंकों का प्रावधान मामूली गिरावट के साथ 1.51 लाख करोड़ रुपये रहा। चार निजी बैंकों एवं पांच सार्वजनिक बैंकों ने साल भर पहले की तुलना में 2021 में कहीं कम प्रावधान किए हैं। ऐक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया और आईडीबीआई बैंक भी इसमें शामिल हैं। पिछले साल सिर्फ बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, पंजाब नैशनल बैंक और यूनियन बैंक के ही ऋण पोर्टफोलियो में गिरावट रही। बंधन बैंक का ऋण कारोबार 21 फीसदी की दर से बढ़ा तो आईडीएफसी फस्र्ट बैंक एवं कैथलिक सीरियन बैंक की वृद्धि दर 17.5 फीसदी रही। भारतीय स्टेट बैंक का ऋण कारोबार 5 फीसदी से भी थोड़ी कम बढ़ा जबकि एचडीएफसी बैंक की वृद्धि 14 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक की 13.7 फीसदी रही। बंधन बैंक और आईडीएफसी फस्र्ट बैंक दोनों के ही जमा व्यवसाय में एक-तिहाई की बढ़त देखी गई जबकि आरबीएल बैंक का एक-चौथाई और आईसीआईसीआई बैंक एवं कैथलिक सीरियन बैंक का जमा कारोबार पांचवां हिस्सा बढ़ा है। सार्वजनिक क्षेत्र में बैंक ऑफ बड़ौदा और पीएनबी की जमा वृद्धि क्रमश: 2.2 फीसदी और 3.2 फीसदी रही है। किसी भी बैंक की सेहत के लिए अहम फंसे कर्ज की क्या स्थिति रही? सूचीबद्ध 28 बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) 6.9 लाख करोड़ से 10.6 फीसदी बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपये हो गई। सार्वजनिक बैंकों के सकल एनपीए में वृद्धि 11 फीसदी बढ़ी है जबकि निजी बैंकों के मामले में यह 9 फीसदी है। इन फंसे कर्ज के लिए इंतजाम करने के बाद शुद्ध एनपीए करीब चार फीसदी बढ़कर 2.35 लाख करोड़ रुपये हो गया। निजी बैंकों का शुद्ध एनपीए 8.4 फीसदी बढ़ गया जो सार्वजनिक बैंकों के दोगुने से भी अधिक है।

कुल मिलाकर, 12 बैंकों के सकल एनपीए में कमी आई जबकि 13 बैंकों के शुद्ध एनपीए में गिरावट आई। एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्सिस बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ इंडिया के सकल एनपीए एवं शुद्ध एनपीए दोनों में ही कमी आई है। ऋण पोर्टफोलियो के प्रतिशत के तौर पर सिर्फ तीन निजी बैंकों के सकल एनपीए में गिरावट आई है, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंक इसे नीचे लाने में सफल रहे। कुछ बैंकों ने बहुत ज्यादा सुधार दिखाया है। मसलन, यूको बैंक का सकल एनपीए 16.77 फीसदी से घटकर 9.59 फीसदी पर आ गया। एसबीआई भी अपने सकल एनपीए को 6.15 फीसदी से 4.98 फीसदी पर लाने में सफल रहा। बंधन बैंक, आईडीएफसी फस्र्ट बैंक और इंडियन बैंक का सकल एनपीए तो बढ़ गया। वैसे छह बैंकों का सकल एनपीए अब भी दो अंक में बना हुआ है। फंसे कर्ज के लिए पैसे अलग रखे जाने के बाद 10 निजी बैंकों का शुद्ध एनपीए बढ़ गया जबकि सार्वजनिक क्षेत्र में सिर्फ इंडियन बैंक के साथ ऐसा हुआ। वहीं आईडीबीआई बैंक और पंजाब ऐंड सिंध बैंक के शुद्ध एनपीए में कमी आई है। सूचीबद्ध बैंकों में से सिर्फ पीएनबी और सेंट्रल बैंक का ही शुद्ध एनपीए 5 फीसदी से अधिक रहा है।

सरकार ने 24 मार्च, 2020 को जब कोविड महामारी पर काबू पाने की मंशा से बेहद सख्त लॉकडाउन लगाया था तो किसी ने भी भारतीय बैंकिंग जगत के इतने अच्छे प्रदर्शन के बारे में नहीं सोचा होगा। आरबीआई की जनवरी में आई वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट (एफएसआर) में अनुमान लगाया गया था कि सितंबर 2021 तक बैंकों का सकल एनपीए सितंबर 2020 के 7.5 फीसदी की तुलना में 13.5 फीसदी तक पहुंच सकता है। अगर दबाव बहुत ज्यादा रहा तो फिर यह 14.8 फीसदी भी हो सकता है। बैंक मार्च तक सुधार का सिलसिला जारी रख सकते हैं लेकिन सभी बैंक महामारी की दूसरी लहर का असर नहीं झेल पाएंगे। अगली एफएसआर रिपोर्ट इसी महीने आने वाली है। देखते हैं कि आरबीआई का हालात के बारे में क्या आकलन है?
(लेखक बिज़नेस स्टैंडर्ड के सलाहकार संपादक, लेखक एवं जन स्मॉल फाइनैंस बैंक के वरिष्ठ परामर्शदाता हैं)

Keyword: बैंक, प्रदर्शन, चुनौती, आरबीआई, कर्ज पुनर्गठन, पीएसबी, एनपीए,
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