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रोनाल्डो-कोक विवाद ब्रांडों के लिए नया सबक

ध्रुव मुंजाल /  June 20, 2021

पुर्तगाल में पानी को 'एक्वा' कहा जाता है। अचानक इस शब्द ने ब्रांड की दुनिया में जैसे खलबली मचा दी है। दरअसल हुआ यूं कि इस सप्ताह के शुरू में पुर्तगाल की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने यूरोपियन चैंपियनशिप के मौके पर आयोजित संवाददाता सम्मलेन में अपने सामने रखी कोका कोला की दो बोतलें किनारे कर दीं और पानी की बोतल हाथ में ले ली। उनके हाव-भाव से लगा कि वह लोगों को कोका-कोला के बजाय पानी पीने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

रोनाल्डो की मंशा भले ही कोका-कोला को नुकसान पहुंचाने की नहीं रही हो लेकिन इस मामले ने खासा तूल पकड़ लिया है। इस घटना के बाद न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर कोका-कोला को 4 अरब डॉलर की चपत लगने की खबरें आने लगीं और रोनाल्डो के व्यवहार को सीधे तौर पर इसका कारण बताया गया। हालांकि कुछ खबरों में यह भी कहा कि कंपनी का शेयर इस घटना से पहले ही 0.9 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था। यानी कंपनी का बाजार पूंजीकरण पहले ही 2.1 अरब डॉलर तक तक लुढ़क चुका था।

ऐसा हो सकता है कि कंपनी के शेयरों के लुढ़कने में रोनाल्डो का कोई हाथ नहीं हो लेकिन कोका-कोला की बोतलें हटाना ही अपने आप में कोई छोटी-मोटी बात नहीं थी। खासकर इसलिए भी क्योंकि अक्सर फुटबॉल खिलाड़ी चीनी युक्त उत्पादों से जुड़े रहे हैं और शायद ही वे इनसे कभी कन्नी काटते हुए देखे गए हों। संवाददाता सम्मेलन में शीतल पेय परोसा जाना कोई नहीं बात नहीं हैं। हालांकि रोनाल्डो का व्यवहार कोक जैसी दिग्गज कंपनी के लिए निश्चित तौर पर असर डालने वाला है। आखिर, रोनाल्डो छोटे-मोटे खिलाड़ी नहीं हैं और फुटबॉल की दुनिया में उनका बड़ा नाम है। इंस्टाग्राम और ट्विटर पर उनके करीब 40 करोड़ फॉलोअर हैं।

बेंगलूरु स्थित संवाद रणनीति एवं व्यक्तिगत छवि निर्माण सलाहकार कार्तिक श्रीनिवासन कहते हैं, 'इस घटना से कोका-कोला के मजबूत ब्रांड पर भले ही कोई असर न हो लेकिन रोनाल्डो का ऊंचा कद देखते हुए कई लोग उस संवाददाता सम्मेलन में उनके व्यवहार में छिपे 'संदेश' को दोहराने की कोशिश जरूर कर सकते हैं।' हालांकि कुछ लोगों ने रोनाल्डो के इस व्यवहार को दोहरा मानदंड बताया है। रोनाल्डो 2006 में कोक के एक विज्ञापन में दिख चुके हैं और केएफसी के विज्ञापनों से भी उनका वास्ता रहा है। ऐसे में तंदुरुस्ती को अधिक अहमियत देने वाले एक व्यक्ति के तौर पर उन्होंने विज्ञापन के लिहाज से हमेशा सही चयन नहीं किए हैं। कम से कम उनके पूर्व के विज्ञापन अनुबंध तो ऐसा ही संकेत दे रहे हैं। विज्ञापन कंपनी रीडिफ्यूजन के प्रबंध निदेशक संदीप गोयल का कहना है कि इस घटना से शीतल पेय उत्पाद श्रेणी के लिए एक चुनौती पैदा हो गई है। गोयल कहते हैं, 'अगर रोनाल्डो जैसे कद के व्यक्ति द्वारा कोक ब्रांड को दरकिनार करने से शेयर बाजार में कंपनी के शेयर में भूचाल आ सकता है तो निश्चित तौर पर पूरा शीतल पेय खंड के लिए यह एक खतरे की बात है।' अब कार्बन युक्त पेय पदार्थों बनाम प्राकृतिक विकल्पों के बीच चर्चा को लंबे समय तक दरकिनार नहीं किया जा सकता है।

ऐसा नहीं है कि शीतल पेय के खिलाफ 'अभियान' चलाने वाले रोनाल्डो पहले व्यक्ति हैं। इससे पहले भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने 2017 में यह कहते हुए पेप्सी से अपना छह वर्ष पुराना अनुबंध तोड़ लिया था कि वह लोगों को उस उत्पाद का उपभोग करने के लिए नहीं कहेंगे जिसका इस्तेमाल स्वयं वह नहीं करते हैं। पूर्व बैंडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद ने भी लगभग इसी तरह के कारणों का हवाला देते हुए 2000 के शुरू में कोला ब्रांड से स्वयं को अलग कर लिया था।

हालांकि रोनाल्डो का व्यवहार अधिक असर डालने वाला है। कोका-कोला यूरो 2020 के छह प्रायोजकों में एक है और रोनाल्डो किसी भी तरह व्यक्तिगत रूप से इस कंपनी से नहीं जुड़े हैं। प्रतिस्पद्र्धा में भाग लेने वाली टीमों एवं खिलाडिय़ों को उस अनुबंध का पालन करना होता है जो उनके संगठन टूर्नामेंट के आयोजक यूएफा के साथ करते हैं। इसमें एक शर्त है संवाददाता सम्मेलन में भाग लेना। इस संवाददाता सम्मेलन में चारों ओर प्रायोजक ब्रांडों के प्रतीक चिह्न दिखते हैं।

श्रीनिवासन कहते हैं, 'अगर किसी अनुबंध का पालन करना कानूनी तौर पर अनिवार्य है तो उस स्थिति में यूएफा या कोक  रोनाल्डो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की हिम्मत जुटानी होगी।' वह कहते हैं कि रोनाल्डो जैसे अत्यधिक लोकप्रिय खिलाड़ी का जाने-अनजाने में किया कोई भी व्यवहार कंपनी पर भारी असर छोड़ सकता है। फिलहाल कोका-कोला ने कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद का पेय पदार्थ पीने का अधिकार है। गोयल का मानना है कि इस घटना के बाद बड़े टूर्नामेंटों के लिए प्रायोजन अनुबंध करने का तरीका बदला सकता है। गोयल कहते हैं कि खिलाडिय़ों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'खिलाड़ी टूर्नामेंट में खेलने के लिए तो राजी हो सकते हैं लेकिन प्रतियोगिता के नियमों से बंधे रहने से इनकार कर सकते हैं।'

यह बात ब्रांडों के लिए चिंताजनक है। कोक के मामले में रोनाल्डो ने जाने-अजनाने में ही दूसरे खिलाडिय़ों के लिए एक मिसाल पेश कर दी है। बुधवार को फ्रांस की फुटबॉल टीम के खिलाड़ी पॉल पोगबा ने हाइनकेन की बोतल सामने से हटा दी जो संवाददाता सम्मेलन के दौरान टेबल पर रखी गई थी। यह भले ही गैर-अल्कोहल उत्पाद था लेकिन पोगबा इस्लाम को मानते हैं और इस धर्म में शराब पीना वर्जित है। गोयल कहते हैं, 'सोशल मीडिया की दुनिया में किसी ब्रांड के खिलाफ बगावत भी उतना ही असर डालता है जितना उस ब्रांड के पक्ष में प्रचार।'

उदाहरण के लिए पोगबा की स्थिति दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी हाशिम अमला की तरह है। अमला ने एक जमाने में बियर ब्रांड कास्टल लागर्स का लोगो अपनी जर्सी पर लगाने से मना कर दिया था। दूसरे मुस्लिम खिलाडिय़ों जैसे राशिद खान से लेकन मोइन अली तक ने ऐसा ही किया था। संवाददाता सम्मेलन में रोनाल्डो की प्रतिक्रिया एक झटके में आई थी लेकिन सलाहकारों का कहना है कि ब्रांडों को सोच समझ कर खिलाडिय़ों या किसी हस्ती के साथ अनुबंध करना चाहिए। खासकर, जब कोई पदार्थ स्वास्थ्य की दृष्टि से अनुकूल नहीं माना जाता है तो यह बात और अधिक मायने रखती है। श्रीनिवासन कहते हैं कि पेप्सी ने बॉलीवुड कलाकार टाइगर श्रॉफ के साथ अनुबंध किया है, लेकिन यह तालमेल सही नहीं है क्योंकि श्रॉफ अपने फिटनेस के लिए जाने जाते हैं। पेप्सी ने रोनाल्डो के प्रतिद्वंद्वी रहे लियोनल मैसी के साथ भी करार किया है। एक ब्रांड मैनेजर ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'एथलीट भी बड़ी रकम मिलने पर स्वास्थ्य एवं फिटनेस से जुड़े आदर्श को दरकिनार कर विभिन्न ब्रांडों का विज्ञापन करते हैं। ऐसा हमेशा से होता रहा है।' इतना ही नहीं, मशहूर हस्तियां अब अधिक सतर्क हो गई हैं। गोयल कहते हैं, 'अनुबंध पर हस्ताक्षर करते समय वे भली-भांति जानते हैं कि उन्हें केवल उत्पाद का प्रचार करना है, न कि उसके प्रति वफादारी दिखानी है।' हालांकि रोनाल्डो का मामला थोड़ा अलग दिखता है। वह इनमें भी कुछ भी करने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। यह अपने आप में एक अलग ही उदाहरण है।

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