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रियायतें वापस लेने की तैयारी में अमेरिकी फेडरल रिजर्व

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली June 17, 2021

अमेरिकी फेडरल रिजर्व (अमेरिकी फेड) ने इस साल मुद्रास्फीति के लिए अपने अनुमानों में बदलाव किया है और संकेत दिया है कि उसे वर्ष 2023 के अंत तक दो बार दर वृद्घि का अनुमान है, क्योंकि कोविड से प्रभावित अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौट रही है। इससे भारत समेत उभरते बाजारों में अल्पावधि से मध्यावधि में तेजी की रफ्तार थम सकती है।

हालांकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने इस बारे में कोई तारीख नहीं बताई है कि वह अपने बॉन्ड खरीदारी कार्यक्रम को कब से वापस लेना शुरू करेगा।

वेलेंटिस एडवायजर्स के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ज्योतिरावद्र्घन जयपुरिया का कहना है, 'अमेरिकी फेड ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था तेज गति से बढऩे के साथ राहत योजनाओं को नरम बनाने के बारे में संकेत दिया था। नकदी रियायत जरूरत से ज्यादा है। बुधवार को दिए गए इस संकेत से बाजारों को अमेरिकी फेड की योजनाओं के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए समय मिल गया है।'

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी फेड द्वारा प्रति महीने 120 अरब डॉलर की बॉन्ड खरीदारी में नरमी लाने से अगले कुछ महीनों के लिए राह स्पष्ट होगी। उनका मानना है कि रियायत में कमी लाने के निर्णय से पहले, एफओएमसी यह निर्धारित करेगी कि कमेटी के अधिकतम रोजगार और कीमत स्थिरता लक्ष्यों की दिशा में और कौन से कदम उठाए जाने चाहिए।

राबोबैंक इंटरनैशनल के वरिष्ठ अमेरिकी रणनीतिकार फिलिप मरे ने एक रिपोर्ट में लिखा है, 'इस सप्ताह की बैठक का निष्कर्ष 7 जुलाई को जारी किया जाएगा और इससे फेडरल की रियायतें वापस लेने संबंधित योजनाओं के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकेगी। आंकड़े को लेकर अस्पष्टता फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की नवंबर की बैठक तक दूर नहीं होगी। हालांकि नवंबर में दिसंबर या जनवरी में नरमी संबंधित निर्णय के बारे में बयान आरंभिक चेतावनी से बहुत ज्यादा कुछछ नहीं हो सकता है।'

फिर भी, फेड के संकेत से पता चलता है कि दर वृद्घि अनुमान से पहले हो सकती है। डीबीएस गु्रप रिसर्च की एक रिपोर्ट में कहा गया है, '11 एफओएमसी सदस्य अब 2023 में दो दर वृद्घि की संभावना पर विचार कर रहे हैं, जबकि 7 सदस्य 2022 के शुरू में वृद्घि का अनुमान जता रहे हैं।'

सस्ती पूंजी की आपूर्ति में कमी और ऊंची दरें इक्विटी के लिए नकारात्मक हैं, और इनकी रफ्तार और समय-सीमा के संदर्भ में किसी तरह का नकारात्मक बदलाव खासकर भारत समेत ईएम के इक्विटी बाजारों के पीई मूल्यांकन में कमी ला सकता है। इसके अलावा, इससे दर संवेदी और जिंस क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। गुरुवार को, धातु सूचकांक बीएसई और एनएसई दोनों पर सबसे ज्यादा गिरने वाला सूचकांक रहा।

कई एशियाई बाजारों - निक्केई, सेंसेक्स, हैंग सैंग और कोस्पी गुरुवार के कारोबार में गिरावट का शिकार हुए।

यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक वित्तीय बाजारों को इस तरह की अनिश्चितता का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2013 में भी, अमेरिकी फेड ने कहा था कि वह अपनी बॉन्ड खरीदारी में कमी लाकर अपने ग्रेट रिसेजन इकोनॉमिक स्टिमुलस में कमी लाएगा। इसके परिणामस्वरूप, बॉन्डों में बिकवाली हुई और ट्रेजरी प्रतिफल बढ़ गया।

Keyword: रियायत, अमेरिकी फेडरल रिजर्व, मुद्रास्फीति, संकेत, बॉन्ड,
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