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'समुद्र का तापमान बढऩे से आ रहा चक्रवात'

रमणी रंजन महापात्र /  06 02, 2021

बीएस बातचीत

भारत में 'साइक्लोन मैन' के नाम से मशहूर भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र सटीक आकलन में विश्वास रखते हैं। रमणी रंजन महापात्र को दिए साक्षात्कार में आईएमडी प्रमुख ने मॉनसून, वर्षा वितरण और अरब सागर में चक्रवात उठने की बढ़ती घटनाओं पर बात की। प्रस्तुत हैं संपादित अंश:

आईएमडी के अनुसार दक्षिण पश्चिम मॉनसून का आगमन अब 3 जून तक होगा। हालांकि मौमस का अनुमान लगाने वाली एक निजी संस्था ने राज्य में मॉनसून के दस्तक देने की घोषणा कर दी है। अनुमानों में यह अंतर क्यों है?

केरल में अमूमन मॉनसून 1 जून को दस्तक दे देता है। यह चार से पांच दिन पहले आ सकता है या इतनी देरी भी हो सकती है। लिहाजा अगर बारिश 3 जून से भी शुरू होती है तो यह देरी नहीं मानी जाएगी। आईएमडी का अनुमान पूरी तरह वैज्ञानिक आकलन और खास मानदंडों पर आधारित है। आईएमडी मॉनसूनी हवाओं की ताकत का अंदाजा उनकी चाल एवं वातावरण में उनकी मौजूदगी से लगाता है। हम मॉनसून के प्रभाव का निर्धारण बादल छाने और केरल में बारिश के आधार पर करते हैं। ये सभी शर्तें पूरी होने पर ही मॉनसून के औपचारिक आगमन की घोषणा की जाएगी। पहले हमने 31 मई को मॉनसून आने का अंदाजा लगाया था लेकिन बाद में सभी मानदंडों और प्रारूपीय अनुमानों का विश्लेषण करने के बाद इसे संशोधित कर 3 जून कर दिया। हम नजरें बनाए हुए हैं। सभी शर्तें अनुकूल रहीं तो मॉनसून आने की घोषणा कर दी जाएगी।


आईएमडी ने कहा है कि इस वर्ष भारत में वर्षा दीर्घ अवधि के औसत का 101 प्रतिशत रहेगी। देश में वर्षा का वितरण कैसा रहेगा?

आईएमडी ने अपने संशोधित अनुमान में मॉनसून संबंधी पूर्वानुमानों को लेकर कई नई पहल की है। आईएमडी के इतिहास में पहली बार देश के सभी हिस्सों में वर्षा के वितरण का अनुमान लगाया गया है। अनुमान का पहला चरण 16 अप्रैल को जारी हुआ था जिसमें वर्षा वितरण का जिक्र किया गया था। दूसरे अनुमान में हमने पूरे देश में वर्षा वितरण का आकलन दिया। हमने उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी भाग में सामान्य वर्षा का अनुमान व्यक्त किया है। पूर्वोत्तर भारत में वर्षा का स्तर सामान्य से कम रहेगा जबकि मध्य भारत में सामान्य से अधिक बारिश होगी। मध्य भारत में कृषि एवं जल संसाधन के लिहाज ये यह अच्छी बात होगी। मध्य भारत में ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात आते हैं जहां कृषि पूरी तरह बारिश पर निर्भर होती है। इस तरह, पहली बार हमने वर्षा पर निर्भर रहने वाले क्षेत्रों के लिए अनुमान व्यक्त किए हैं। मध्य भारत के अलावा राजस्थान और झारखंड भी मॉनसूनी बारिश पर निर्भर हैं। एक दूसरी पहल करते हुए आईएमडी ने जून में वर्षा का अनुमान जताया है। जून में बारिश सामान्य रह सकती है।


15 दिन में देश के पश्चिमी और पूर्वी तटों पर दो चक्रवाती तूफान आ चुके हैं। पश्चिम बंगाल की खाड़ी में चक्रवात आते रहते हैं लेकिन अरब सागर में भी इन घटनाओं में तेजी आई है। इसकी क्या वजह है?

पिछले एक वर्ष में पांच चक्रवात आए हैं। इनमें चार बंगाल खाड़ी से शुरू हुए थे और एक अरब सागर में उठा था। आम तौर पर चक्रवात मॉनसून के बाद अक्टूबर और दिसंबर के बीच अधिक आते हैं। हालांकि मई में भी चक्रवात आते हैं और कोई आश्चर्य की बात नहीं है। वास्तव में मॉनसून से पहले एक महीने में चक्रवात आने की आशंका सर्वाधिक होती है। वर्ष 1990 के बाद अरब सागर में तीक्ष्ण चक्रवात उठने की घटनाओं में तेजी आई है। हालांकि बंगाल की खाड़ी में ऐसी बात नहीं दिखी है। इससे निष्कर्ष निकलता है कि यहां भीषण चक्रवातों की संख्या न तो बढ़ रही और न कम हुई है। जलवायु परिवर्तन से होने वाले असर का अध्ययन करने वाले अंतराष्ट्रीय विशेषज्ञों की एक समिति ने अरब सागर में चक्रवात उठने की घटनाओं में तेजी के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार बताया है। हम इससे सहमत हैं, लेकिन पूरे विश्वास के साथ नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि अब तक अध्ययन से जो नतीजे आए हैं वे परस्पर विरोधी बातें बता रहे हैं। इनके अलावा अरब सागर में उठने वाले चक्रवातों की संख्या काफी कम रही है। हालांकि अध्ययनों में यह सामने आया है कि समुद्र के सतह का तापमान बढ़ रहा है और सागर में उष्णता बढ़ रही है। ये कारक चक्रवातों के प्रचंड होने के लिए अनुकुल होते हैं।


चक्रवात 'यास' के तट से टकराने की सटीक जगह को लेकर अलग-अलग खबरें आ रही हैं। इस पर आप क्या कहन चाहेंगे?

आईएमडी ने इस संबंध में अपने अनुमान में कभी संशोधन नहीं किया। हमने कहा था कि चक्रवाती तूफान यास पारादीप और उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट में सागर द्वीप के बीच बालासोर के करीब से गुजरेगा। तूफान के आगे बढऩे की गति और दिशा पर नजर रखने वाले संकेतक ने हमेशा बालासार के ठीक दक्षिण में इसके तट से टकराने का संकेत दिया था। तूफान जैसे ही नजदीक आया हमने इसकी सटीक जगह का अनुमान दे दिया और कहा कि यह धामरा और बालसोर के बीच से होकर गुजरेगा और यही हुआ। इस तरह, हमने कभी अपने अनुमान में संशोधन नहीं किया। समस्या इसलिए आ रही है क्योंकि इन दिनों हर कोई मौसम का पूर्वानुमान लगाने लगा है। यह वजह थी कि कुछ लोग भ्रामक अनुमानों के कारण उलझन में पड़ गए। जिन लोगों को पर्याप्त विशेषज्ञता हासिल नहीं है या चक्रवात के आने के बारे में अनुमान लगाने का औपचारिक अधिकार नहीं है वे भी लोकप्रियता के लिए पूर्वानुमान लगाते रहते हैं। इससे मीडिया में उन्हें सुर्खियां भी मिल जाती हैं।


चक्रवाती तूफानों के दौरान समुद्री जल के गांवों तक पहुंचने की घटनाएं बढ़ गई हैं। इसकी क्या वजह है और राज्यों को इससे कैसे निपटना चाहिए?

चक्रवात यास प्रचंड चक्रवाती तूफान था। तूफान जब तट की तरफ बढ़ रहा था तो हमने अपने पूर्वानुमान में कहा था कि समुद्र में चार मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं। जिस दिन चक्रवात तट पर पहुंचा उस दिन पूर्णिमा थी और इस वजह से समुद्र में लहरें और तेज उठने लगीं। जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का सतह बढ़ रहा है जिससे चक्रवात के तट पार करने के समय ज्वार-भाटा तेज हो जाता है।

Keyword: समुद्र, तापमान, चक्रवात, भारतीय मौसम विभाग, मृत्युंजय महापात्र,
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