बिजनेस स्टैंडर्ड - सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे डीएचएफएल के वधावन
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, July 31, 2021 11:23 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे डीएचएफएल के वधावन

सुब्रत पांडा / मुंबई June 01, 2021

दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) के पूर्व प्रवर्तक कपिल वधावन ने नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के मुंबई के पीठ के आदेश पर रोक लगाने वाले अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है। एलसीएलटी के मुंबई पीठ ने अपने आदेश में लेनदारों की समिति (सीओसी) को वधावन के सुलह प्रस्ताव पर विचार करने का निर्देश दिया था।

वधावन परिवार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में मौजूद रश्मिकांत ऐंड पार्टनर्स के पार्टनर रोहन दक्षिणी ने कहा, 'हम एनसीएलएटी के आदेश पर रोक लगाने और एनसीएलटी के आदेश को बहाल करने के लिए कह रहे हैं। हमारी दलील यह है कि हमने एक सुलह प्रस्ताव दिया है जो सफल बोलदाता की पेशकश के मुकाबले 50,000 करोड़ रुपये अधिक है।'

दक्षिणी ने कहा, 'इसलिए सीओसी को कम से कम हमारे प्रस्ताव की वाणिज्यिक व्यवहार्यता पर गौर करना चाहिए। यदि उन्हें यह व्यवहार्य न लगे तो वे इसे अस्वीकार कर सकते हैं। लेकिन उन्हें महज तकनीकी आधार पर इसे खारिज नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें एक बड़ी रकम की पेशकश की गई है।' उन्होंने कहा, 'दिलचस्प है कि जब यह मामला एनसीएलएटी में था तो एनसीएलटी की उस बात पर गौर नहीं किया गया कि सीओसी के 65 फीसदी सदस्यों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि पूर्व प्रवर्तकों ने किस प्रकार का सुलह प्रस्ताव रखा है।'

वधावन ने दिसंबर में कंपनी के प्रशासक को लिखे एक पत्र में दोहराया था कि लेनदारों के 91,158 करोड़ रुपये के पूरे मूलधन बकाये का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने अपने पत्र में कहा था कि डीएचएफएल के बहीखाते अनुसार उसके पास करीब 9,062 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं जिनका इस्तेमाल छोटे निवेशकों के बकाया ऋण एकमुश्त पुनर्भुगतान और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) की अदायगी में किया जा सकता है।

लेनदारों की समिति, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) से पीरामल समूह की समाधान योजना को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। पीरामल समूह ने 12,700 करोड़ रुपये के एकमुश्त नकद भुगतान के साथ 37,250 करोड़ रुपये के भुगतान की पेशकश की है।

Keyword: सर्वोच्च न्यायालय, डीएचएफएल, कपिल वधावन, एनसीएलटी,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार का खर्च घटने से जीडीपी पर पड़ेगा असर?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.