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वृद्धि दर पर ध्यान, रिजर्व बैंक नहीं करेगा रुख में बदलाव

बैंकिंग साख
तमाल बंद्योपाध्याय /  June 01, 2021

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) इस सप्ताह नीतिगत दरों पर विचार करने के लिए बैठक करेगी। चालू वित्त वर्ष में समिति की यह दूसरी बैठक होगी। इससे पहले अप्रैल में हुई बैठक में छह सदस्यीय इस समिति ने एकमत से नीतिगत दरें अपरिवर्तित रखी थी। नीतिगत दरें अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर हैं। कुछ मामूली बदलावों के साथ एमपीसी ने अपना उदारवादी रवैया जारी रखा।

वित्त वर्ष 2020-21 में समिति की आखिरी बैठक तक आरबीआई भविष्य को लेकर अपना रुख स्पष्ट करता रहा था। केंद्रीय बैंक यह लगातार कहता रहा कि आवश्यकता महसूस होने तक वह उदार रवैया जारी रखेगा। अप्रैल में आरबीआई ने कहा कि आर्थिक सुधार में निरंतरता और भविष्य के लिए मजबूत संभावनाएं उभरने तक मौद्रिक नीति उदार बनी रहेगी। उसने आर्थिक आंकड़ों के आधार पर निर्णय कदम उठाने की बात कही। 4 जून को जब एमपीसी की तीन दिनों तक चलने वाली बैठक समाप्त होगी तो आरबीआई से क्या उम्मीदें होंगी? इसका जवाब बिल्कुल सरल है। आरबीआई नीतिगत स्तर पर कोई बदलाव नहीं करेगा। इस समय पूरा ध्यान केवल आर्थिक वृद्धि पर केंद्रित है। अगर महंगाई दर बढ़ती है तो भी आरबीआई के रुख में कोई अंतर नहीं आएगा क्योंकि फिलहाल इस पर फिलहाल ध्यान देने का वक्त नहीं है।

अप्रैल में एमपीसी की बैठक होने के बाद वृहद आर्थिक हालात बद से बदतर हो गए हैं। महंगाई दर लगातार बढ़ रही है और कोविड-19 की दूसरी लहर से अर्थव्यवस्था घायल हो गई है। इस महामारी ने एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को चारों खाने चित कर दिया है। अप्रैल में थोक मूल्य आधारित महंगाई दर 10.49 प्रतिशत के साथ 11 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इससे पहले मार्च में यह 7.39 प्रतिशत थी, जो पिछले आठ महीनों का शीर्ष स्तर था। विश्लेषकों का कहना है कि महंगाई अब भी अपने चरम पर नहीं पहुंची है। थोक महंगाई फरवरी में 4.17 प्रतिशत और जनवरी में 2.03 प्रतिशत थी।

इसके उलट, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अप्रैल में कम होकर 4.29 प्रतिशत हो गई थी, जो मार्च में 5.52 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी इसकी मुख्य वजह थी। यह लगातार पांचवां महीना था जब खुदरा महंगाई केंद्रीय बैंक के महंगाई लक्ष्य के ऊपरी दायरे से नीचे ही रही। आरबीआई खुदरा महंगाई पर नजर रखता है। केंद्रीय बैंक को मार्च 2026 तक महंगाई दर 2 से 4 प्रतिशत के बीच रखनी है। यह 2 प्रतिशत कम या अधिक हो सकती है।

खुदरा महंगाई में कमी जरूर आई है लेकिन गैर-खाद्य, गैर-तेल महंगाई अब भी ऊंचे स्तर पर हैं। इस वर्ष मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान है लेकिन जिंसों के वैश्विक भाव पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि खुदरा महंगाई आने वाले समय में बढ़ेगी। क्या इसका आरबीआई की नीति पर तत्काल कोई असर होगा? इसकी उम्मीद काफी कम है। पिछले सप्ताह आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि खुदरा महंगाई ऊपर-नीचे होती रहेगी लेकिन चालू वित्त वर्ष में यह औसतन 5 प्रतिशत स्तर पर रहेगी। अप्रैल में एमपीसी की बैठक में भी यही बात कही गई थी।

अगर सालाना रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए जून में प्रस्तावित एमपीसी की बैठक के नतीजों का अंदाजा लगाएं तो आरबीआई का मुख्य ध्यान वृद्धि दर पर ही होगा। फरवरी में समाप्त एमपीसी की बैठक से अब तक आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुमान 10.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। कोविड-19 की दूसरी लहर के बावजूद सालाना रिपोर्ट में यह अनुमान बरकरार है, यह अलग बात है कि विश्लेषक लगातार इसमें कमी आने का अंदेशा जताने लगे हैं। क्या वृद्धि अनुमान कम करने से पहले आरबीआई और इंतजार करना चाहेगा या इसे कम कर 9.5 से 10 प्रतिशत कर देगा? मुझे लगता है कि आरबीआई अगस्त में होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक तक इंतजार करेगा।

आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट में चालू वर्ष में उदारवादी नीति के अनुरूप वित्तीय तंत्र में पर्याप्त नकदी बहाल रखने की बात कही है। केंद्रीय बैंक ने द्वितीयक बाजार में सरकारी प्रतिभूति क्रय कार्यक्रम (जी-सैप 1.0) के बॉन्ड प्रतिफल पर हुए 'सकारात्मक प्रभाव' पर भी गौर किया है। पिछले कुछ महीनों से 10 वर्ष की सरकारी प्रतिभूति पर प्रतिफल 6 प्रतिशत से नीचे रहा है। ऐसे में जी-सैप का दूसरा चरण भी शुरू होने ही वाला है और आरबीआई 1 लाख करोड़ रुपये मूल्य के बॉन्ड की खरीदारी करेगा। एक प्रश्न यह भी है कि क्या महामारी की दूसरी लहर से बैंकों के ऋण खातों पर दबाव कम करने के लिए आरबीआई कुछ उपाय करेगा? आरबीआई ने मई के पहले सप्ताह में कुछ उपायों की घोषणा की थी लेकिन और कदम उठाए जाने की जरूरत है। सितंबर आते आते बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता पर दबाव बढ़ सकता है लेकिन आरबीआई तब भी इंतजार करेगा क्योंकि वित्त मंत्रालय ने आपात ऋण गारंटी योजना (ईएलजीएस) की अवधि बढ़ा दी है।

मौद्रिक नीति से इतर नियामकीय उपाय किए जा सकते हैं लेकिन मेरे मन में यह जिज्ञासा है कि आरबीआई इस वर्ष के लिए 10.5 प्रतिशत का वृद्धि अनुमान बरकरार रखेगा। अगर हां तो यह वित्तीय प्रणाली से अतिरिक्त नकदी कब निकालना शुरू करेगा? आरबीआई की सालाना रिपोर्ट में 'मौद्रिक नीति परिचालन' अध्याय के अंत में कहा गया है कि उदारवादी रवैया बरकरार रखते हुए मूल्य स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाले सभी कारकों से नीतिगत स्तर पर निपटने के लिए तैयार रहना होगा। हालांकि 'वित्तीय बाजार एवं विदेशी मुद्रा विनिमय प्रबंधन' पर सालाना रिपोर्ट में हालात पर नजर रखते हुए मौद्रिक प्रोत्साहन धीरे-धीरे समेटने की बात कही गई है। मुझे नहीं लगता कि तीसरी तिमाही से पहले आरबीआई इस दिशा में कोई कदम उठाएगा। जहां तक नीतिगत दरें बढऩे की बात है तो अगले वर्ष का इंतजार करना होगा।

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