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गो एयर आईपीओ: दीर्घावधि में मुनाफे की उम्मीद कर सकते हैं निवेशक

देवांशु दत्ता / मुंबई May 16, 2021

गो एयरलाइंस (गो एयर) ने 3,600 करोड़ रुपये जुटाने के लक्ष्य के साथ हाल में डीआरएचपी पेश किया है। कंपनी ने स्वयं को 'गो फस्र्ट' के तौर पर रीब्रांड किया है। यह एयरलाइन वाडिया परिवार के सदस्यों द्वारा प्रवर्तित है जिनका बॉम्बे डाइंग और वाडिया समूह की कई अन्य कंपनियों में भी नियंत्रण है।

वाडिया परिवार की निवेश कंपनी गो इन्वेस्टमेंट्स की गो एयर में 73.3 प्रतिशत हिस्सेदारी है। गो इन्वेस्टमेंट्स में परिवार के सदस्यों का 100 प्रतिशत स्वामित्व है। गो एयर में शेष हिस्सेदारी अन्य समूह कंपनियों की है। लेकिन गो इन्वेस्टमेंट्स द्वारा निर्गम पूर्व 22.56 प्रतिशत चुकता पूंजी बैंक ऑफ बड़ौदा, बीएनपी पारिबा और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के ऋणदाता कंसोर्टियम को गिरवी रखी गई है। 2019-20 तक, गो एयर ने घरेलू विमानन क्षेत्र में अपनी करीब 10.8 प्रतिशत बाजार भागीदारी होने का दावा किया था। जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल कर्ज अदायगी, या बकाया उधारियों के भुगतान में किया जाएगा और इस उद्देश्य के लिए 2,015 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। 

शेष राशि का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। एयरलाइन ने 144 एयरबस ए320 नियो विमान की डिलिवरी के ऑर्डर दिए हैं। उसे 46 एयरबस ए320 नियो विमान मिल चुके हैं और 2021 से 98 ए320 नियो की डिलिवरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है।

एयरलाइन में निवेश करने का तर्क अब विपरीत है। यात्रा में कमी आई है। पिछला वित्त वर्ष खराब रहा, और राजस्व अप्रैल-2019-मार्च 2020 के 7,258 करोड़ रुपये से घटकर अप्रैल-दिसंबर 2020 की 9 महीने की अवधि के लिए 1,438 करोड़ रुपये रह गया। लॉकडाउन से विमानन क्षेत्र कई महीने तक ठप रहा। नुकसान पिछले तीन वित्त वर्षों में बढ़ गया है।

इन हालात को देखते हुए कोई निवेशक दीर्घावधि में ही तेजी की उम्मीद कर सकता है। पुन: निर्धारित वित्तीय विवरण में संकेत दिया गया है कि राजस्व 2017-18 के 4,601 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,258 करोड़ रुपये (2019-20) हो गया। क्या गो एयर अर्थव्यव्यवस्था सुधरने पर उस वृद्घि दर में लौट सकती है? 1,962 करोड़ रुपये (दिसंबर 2020) की कमजोर नेटवर्थ के साथ बैलेंस शीट पर दबाव बना हुआ है। बकाया कर्ज 1,839 करोड़ रुपये है जिसमें 986 करोड़ रुपये का दीर्घावधि ऋण भी शामिल है। मौजूदा देनदारी मौजूदा परिसंपत्तियों के मुकाबले 4,363 करोड़ रुपये तक ज्यादा पहुंच गई है। मुख्य जोखिम में निश्चित तौर पर महामारी का प्रभाव शामिल है।
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