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सार्वजनिक-निजी भागीदारी से ही स्वास्थ्यसेवा ढांचे में सुधार संभव

बीएस संवाददाता /  May 14, 2021

 कोविड-19 की तीसरी लहर की आशंका के बीच देश के चिकित्सा बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर विस्तार करने की तैयारी के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को एक साथ आना होगा जिनमें अस्पताल और चिकित्सा उपकरणों से इतर भी कई पहलू शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को न केवल महामारी से जुड़े अपने बल्कि दूसरे देशों के अनुभव से भी सबक लेने की जरूरत है। इसके साथ ही भविष्य की जरूरतों का भी पूर्वानुमान लगाना होगा। दवाओं, चिकित्सा उपकरणों के लिए आपूर्ति शृंखला तंत्र को ठीक करने से लेकर कच्चे माल का इंतजाम करने के अलावा वायरस की मौजूदा प्रवृत्ति और भविष्य में इसका क्या असर होगा, इससे जुड़े वैज्ञानिक विश्लेषण करने से भी भारत को अपनी तैयारी थोड़ी और बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
बुनियादी समस्या पर हो ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में महामारी की किसी भी लहर या किसी अन्य महामारी की तैयारी के लिए, महामारी के पहले के दौर में स्वास्थ्य सेवा तंत्र में मौजूद कमियों को समझना जरूरी है। भारत को प्रति 1,000 लोगों पर 1.35 बेड की मौजूदा क्षमता से कम से कम तीन गुना बेड की जरूरत है। मोटे अनुमानों के मुताबिक, मौजूदा एक लाख आईसीयू बेड की तात्कालिक जरूरत के मुकाबले चार लाख बेड की जरूरत है। छोटे नर्सिंग होम और अस्पतालों के बंद होने से यह क्षमता और कम हो गई है। उद्योग के अनुमान के मुताबिक, पिछले साल सरकारी अस्पतालों में करीब 8 लाख और प्राइवेट अस्पतालों में करीब 9 लाख बेड थे।

एसोसिएशन ऑफ  हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के महानिदेशक गिरधर ज्ञानी ने कहा, 'हमने इस क्षमता में कुल मिलाकर करीब 30 प्रतिशत का इजाफा किया है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है, खासतौर पर अगर आप छोटे शहरों और कस्बों की बात करते हैं तब।' ज्ञानी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत के दौरान कहा था कि वह मझोले और छोटे शहरों कस्बों में 3,000 से 100 बेड वाले अस्पताल देखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, 'मेरी जानकारी में ऐसे अस्पतालों पर काम नहीं हुआ। राज्य सरकारों को इस पर काम करना था।' हालांकि प्राइवेट अस्पताल मांग देखते हुए अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं। उदाहरण के लिए, फोर्टिस हेल्थकेयर ने चेन्नई में 250 बेड जोड़े हैं और वह अगले एक साल में अपने नेटवर्क में 300 बेड और जोडऩे की योजना बना रही है। मणिपाल हॉस्पिटल्स ने पिछले एक साल में अपने मौजूदा नेटवर्क के भीतर 15 फीसदी और बेड जोड़े हैं जिससे कुल बेड की तादाद 7,300 बेड हो गई है।

उजाला सिग्नस समूह अस्पताल के संस्थापक निदेशक शुचिन बजाज ने कहा, 'हम ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में मौजूद हैं जहां दूसरी लहर का असर लोगों पर बड़े पैमाने पर पड़ा है। हम अगले कुछ महीनों में अपने सभी 15 अस्पतालों में ऑक्सीजन संयंत्र लगाएंगे। उम्मीद है कि तीसरी लहर से पहले ही ये सब हो जाएगा।'

पश्चिम बंगाल में पिछले एक महीने में बेड की क्षमता दोगुनी से ज्यादा कर दी है और आईसीयू के साथ-साथ गंभीर मरीजों के लिए विशेष बेड का बड़ा संकट है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, देश में वेंटिलेटर की तादाद बढ़ाकर दो लाख तक करने की थी जबकि इस वक्त 40,000 इनवेसिव वेंटिलेटर ही काम कर रहे हैं। एक प्रमुख वेंटिलेटर निर्माता ने नाम न बताने की शर्त पर बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि पहली लहर के दौरान पीएम केयर फंड के जरिये 60,000 वेंटिलेटर का ऑर्डर दिया गया था लेकिन पिछले साल पहली लहर खत्म होने के बाद केवल 10,000 वेंटिलेटर ही खरीदे गए। ट्राइविट्रॉन और मैक्स वेंटिलेटर जैसे वेंटिलेटर निर्माता अपनी क्षमता का विस्तार कर रहे हैं।

तीसरी लहर का मुकाबला करने का एक निश्चित तरीका युद्धस्तर पर टीके लगाना भी है जैसा कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने किया है और चुनौती यह भी है कि टीके की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही बढ़े हुए जीन अनुक्रमण के माध्यम से म्यूटेशन पर नजर रखी जाए। मैक्सहेल्थकेयर के निदेशक (आंतरिक मामले) रोमे टिक्कू का कहना है, 'आप अपनी सुरक्षा के स्तर को कम नहीं कर सकते। बच्चों से जुड़ी बीमारियों के विभागों को अब ज्यादा सावधान रहना होगा क्योंकि अगली लहर में बच्चों पर ज्यादा असर पड़ेगा।'

प्रशिक्षित कर्मचारी

अस्पतालों को इस बात की चिंता है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की कमी होगी। सरकार ने हाल ही में कोविड से जुड़ी ड्यूटी के लिए मेडिकल इंटर्न को नियुक्त करने की घोषणा की है और हल्के लक्षण वाले कोविड मरीजों की देखभाल करने के लिए अंतिम वर्ष के एमबीबीएस छात्रों की सेवाएं लेने की घोषणा भी की गई है। हालांकि उद्योग को लगता है मौजूदा 75,000 एमबीबीएस स्नातकोत्तर सीटों की संख्या के आधे से भी थोड़े कम हैं। 2014 के बाद से यह अनुपात नहीं बदला है। ज्ञानी ने कहा, 'हमें मध्यम स्तर के विशेषज्ञों के लिए और अधिक पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को प्रोत्साहित करने और हर अस्पताल को एक शिक्षण अस्पताल में तब्दील करने की जरूरत है ताकि विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार हो सकें।' विशेषज्ञों ने प्रशिक्षित मेडिकल कर्मचारियों की तात्कालिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए नर्सिंग स्टाफ, लैब तकनीशियनों और डॉक्टरों के लिए क्रैश कोर्स की भी सिफारिश की है। 

मणिपाल ग्रुुप ऑफ  हॉस्पिटल्स के एमडी दिलीप होसे ने कहा, 'हमें स्वास्थ्य पेशेवरों की एक अगली कतार तैयार करनी होगी जो थोड़े कम गंभीर मरीजों की देखभाल करने में सक्षम होंगे जबकि पहले से ही अनुभवी लोग गंभीर मरीजों की देखभाल करेंगे।'

(साथ में रुचिका चित्रवंशी, सोहिनी दास, ईशिता आयान दत्त और विनय उमरजी)
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