बिजनेस स्टैंडर्ड - आरबीआई के हस्तक्षेप पर अर्थशास्त्रियों की नजर!
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, September 26, 2021 06:15 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

आरबीआई के हस्तक्षेप पर अर्थशास्त्रियों की नजर!

अनूप रॉय / मुंबई May 10, 2021

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अनिश्चित तौर पर दो विपरीत लक्ष्यों को संतुलित बना रहा है और अर्थशास्त्रियों ने इन पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। ये लक्ष्य हैं - घरेलू बाजार में आसान वित्तीय स्थिति बनाए रखना, जबकि बाह्य स्थिरता सुनिश्चित करना।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत 'इम्पोसिबल ट्रिनिटी' की त्रि-आयामी स्थिति से गुजर रहा है। आरबीआई स्वतंत्र पूंजी खाते और लचीली विमिय दरों के परिवेश में स्वतंत्र मौद्रिक नीति (घरेलू ब्याज दरें तय करना) पर अमल नहीं कर सकता है। केंद्रीय बैंक के लिए स्थिति अब इसे लेकर और ज्यादा जटिल है कि वित्तीय बाजार की स्थिरता सभी अन्य तीनों लक्ष्यों के विपरीत है। इसलिए एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने इसे 'क्वाड्रीलेमा' नाम भी दिया है।

भवन एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ऐंड रिसर्च के सहायक प्रोफेसर (फाइनैंस) अनंत नारायण ने एक ताजा रिपोर्ट में लिखा है, 'इम्पोसिबल ट्रिनिटी के पहलुओं पर बेहतर ढंग से विचार किए जाने की जरूरत होगी। इन पहलुओं में मौद्रिक नीति, पूंजी प्रवाह और मौद्रिक बाजारों में परस्पर क्रिया शामिल है। ब्याज दरों में अंतर से हमारे मौद्रिक बाजार और व्यापार प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। इसी तरह से, अत्यधिक आरबीआई केंद्रित बाजार हस्तक्षेप से भारी गुप्त लागत को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे बैंकों पर बोझ पड़ सकता है।'

अनंत नारायण ने मौद्रिक नीतिगत ढांचे की तर्ज पर विदेशी एक्सचेंज प्रबंधन ढांचे की वकालत की है। नारायण ने लिखा है, 'आरबीआई के हस्तक्षेप की प्रवृत्ति ने मौद्रिक दरों के निर्धारक के तौर पर पेश किया है, भले ही उसकी नीति या आशय कुछ भी हो।'

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आरबीआई का ज्यादातर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अपारदर्शी है। आरबीआई का कहना है कि वह विनिमय दर की अस्थिरता दूर करने के लिए हस्तक्षेप करता है। देश इस साल फरवरी तक 27 अरब डॉलर के चालू खाता अधिशेष से गुजर रहा था। वित्त वर्ष 2021 में फरवरी तक, भारत का शुद्घ विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) प्रवाह 41 अरब डॉलर था, और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) 36 अरब डॉलर था। 104 अरब डॉलर के नारायण का कहना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा प्रवाह के बावजूद सामान्य संदर्भ में रुपये के मुकाबले डॉलर महज 2 प्रतिशत कमजोर हुआ और यह मार्च 2020 के 75.30 से कमजोर होकर फरवरी 2021 में 73.90 पर था।

यह तब है जब वैश्विक डॉलर सूचकांक 99 से 8.2 प्रतिशत गिरकर 90.0 पर आ गया।

हाजिर बाजार में आरबीआई की 74 अरब डॉलर की डॉलर खरीदारी और वायदा बाजार में अन्य 79 अरब डॉलर खरीदारी इस नरमी की वजह थी। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा कर आरबीआई त्रि-आयामी अनिश्चितता की स्थिति में आ सकता है। वह मौद्रिक दर को स्थिर बनाए रखकर पूंजी प्रवाह अवशोषित कर रहा है। लेकिन ब्याज दरें नीचे बनाए रखकर वह उन्नत देश की ब्याज दर और घरेलू दरों के बीच अंतर घटा रहा है।

ऐक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य ने कहा, 'आरबीआई ने घरेलू ब्याज दरों, हाजिर और रुपया विनिमय दरों, विदेशी मुद्रा प्रवाह में तेजी और घरेलू तरलता के चुनौतीपूर्ण लक्ष्यों का मजबूती के साथ प्रबंधन किया है। ये समस्याएं एक साल से ज्यादा समय से बनी हुई हैं।' भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) समूह में मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोषि का कहना है कि मुद्रास्फीति परिदृश्य अब आपूर्ति संबंधित समस्याओं की वजह से कुछ हद तक अनिश्चित बना हुआ है।

Keyword: आरबीआई, हस्तक्षेप, स्वतंत्र मौद्रिक नीति, मौद्रिक दर,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या खर्च प्रतिबंध हटने से सरकारी व्यय में आएगी तेजी?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.