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तेजस और जेएफ-17 थंडर दो हल्के विमानों की तुलना

दोधारी तलवार
अजय शुक्ला /  May 09, 2021

सन 2001 में पहली उड़ान के बाद स्वदेशी तेजस हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) को दो दशक तक भारतीय वायुसेना के विरोध का सामना करना पड़ा। वायुसेना के निर्णयकर्ता यह कहकर तेजस का विरोध करते रहे कि यह भारत-पाकिस्तान या भारत-चीन सीमा जैसे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम नहीं है। आखिरकार गत वर्ष रक्षा मंत्रालय ने 83 तेजस मार्क 1ए लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया जो मूल विमान का उन्नत संस्करण है। इसके बाद मलेशिया और श्रीलंका समेत अन्य देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।

उधर पाकिस्तानी वायुसेना ने अपने लड़ाकू विमान जेएफ-17 थंडर में पूरा भरोसा जताया। इसे पाकिस्तान और चीन ने मिलकर विकसित किया है। जेएफ-17 को अंतहीन जांच से नहीं गुजरना पड़ा और इसे अच्छी तादाद में पाकिस्तानी वायुसेना में शामिल कर लिया गया है। अब कई अन्य देश (चीन नहीं) इसमें रुचि ले रहे हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार द्वारा 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भरता पर जोर दिए जाने के बाद यह जरूरी है कि हल्के लड़ाकू विमानों को लेकर भारत और पाकिस्तान के रुख की तुलना की जाए और स्वदेशीकरण के सबक लिए जाएं। तेजस को लेकर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विश्व स्तरीय तकनीक अपनाने का लक्ष्य तय किया था। यह जोखिम लिया गया कि सीधे चौथी पीढ़ी का उत्कृष्ट विमान तैयार किया जाए। जानकार मानते हैं कि यह विशुद्घ दंभ का मामला था। मानो: 'हमने कभी विमान नहीं बनाया लेकिन हम सीधे चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाएंगे।' यह जोखिम भरी नीति सफल रही।

उधर, चीन और पाकिस्तान ने कम जोखिम वाली राह अपनाई। वहां चीन द्वारा पहले से विकसित तकनीक इस्तेमाल कर अपेक्षाकृत सस्ता विमान तैयार किया गया और सेना में शामिल भी कर लिया गया। जेएफ-17 काफी हद तक मिग-21 का परिष्कृत रूप है। लड़ाकू विमान तैयार करने में असल दिक्कत तकनीक और जोखिम प्रबंधन की आती है। चूंकि चीन के पास तकनीक थी इसलिए जोखिम बहुत कम था। पाकिस्तानी वायुसेना ने जानबूझकर कम क्षमता वाला लड़ाकू विमान चुना जिसकी प्रदर्शन की कमी को तादाद से ढका जा सके। तेजस परियोजना में चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास का काम डीआरडीओ की एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) को सौंपा गया। इसमें डिजाइन और डिजिटल उड़ान नियंत्रण, हल्की सामग्री से विमान का ढांचा तैयार करना, माइक्रोप्रोसेसर आधारित नियंत्रण और कांच का कॉकपिट शामिल था ताकि पायलट स्मार्ट, डिजिटल कंट्रोल के जरिये अधिक सक्षम बन सकें।

तेजस लड़ाकू विमान की चौथी पीढ़ी इसकी युद्धक क्षमता बढ़ाती है और इसे सुरक्षित बनाती है। डिजाइनिंग के 90 फीसदी प्रयास प्राय: प्रबंधन की विफलता के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में तेजस भारतीय वायुसेना के बेड़े का सबसे उन्नत विमान था। यहां तक कि ऐसे ही डिजाइन वाला मिराज 2000 भी तीसरी पीढ़ी का विमान है। तेजस की चौथी पीढ़ी की एक और बेहतरी हल्की सामग्री के इस्तेमाल की है। विमान के कुल वजन का 45 फीसदी कंपोजिट मटीरियल का है। अपने कम वजन के कारण तेजस अधिक भार ले जाने में सक्षम है और उसकी हमलावर शक्ति अधिक है। इसके विपरीत जेएफ-17 एल्युमीनियम एलॉय का बना है। यह तेजस से करीब एक टन भारी है और कम ईंधन तथा हथियार ले जा सकता है। तेजस के डिजाइन में एक समस्या इसलिए थी क्योंकि आरंभ में इसे वायुसेना में मिग-21 की जगह लेने के लिए तैयार किया जा रहा था। चूंकि मिग 21 को मैक 2 यानी 2,500 किमी प्रति घंटे की गति के लिए तैयार किया गया था इसलिए तेजस को 1.8 मैक की गति दी गई। परंतु उन्होंने तयशुदा एयर इन्टेक का चयन किया जो 1.4 मैक की गति के लिए ही पर्याप्त होता है। उच्च गति के लिए चलायमान इन्टेक की जरूरत होती है। तेजस का तयशुदा एयर इन्टेक इसकी ताकत 30-40 फीसदी कम करता है लेकिन फिर भी यह 1.2 से 1.4 मैक की गति प्रदान करता है जिस पर अधिकांश लड़ाइयां लड़ी जाती हैं। कम गति से ईंधन बचता है। जब मिग-21 ने 2 मैक की गति पकड़ी और अचानक परिचालन रद्द करना पड़ा तो उसके पास अगले मिशन के लिए ईंधन नहंी बचा। उसे वापस ईंधन लेने बेस पर लौटना पड़ा। तेजस मार्क 2 के साथ ऐसी स्थिति नहीं होगी। तेजस और जेएफ-17 दोनों के इंजन चुनने में दिक्कत हुई। तेजस में डीआरडीओ का कावेरी टर्बोफैन इंजन लगना था लेकिन देरी होने पर एडीए ने जनरल इलेक्ट्रिक के एफ-404 का चयन किया। चीन में जेएफ-17 बनाने वालों ने रूसी आरडी-93 का चयन किया क्योंकि इसकी कीमत कम है और ईंधन की खपत भी कम होती है। लेकिन यह इंजन पर्याप्त शक्ति नहीं पैदा करता। उसकी ताकत तेजस मार्क 2 से काफी कम है। माना जा रहा है कि जेएफ-17 को चीन के डब्ल्यूएस-13 इंजन के साथ उन्नत बनाया जाएगा। परंतु अभी इसे लेकर काफी अनिश्चितता है।

उच्च प्रदर्शन वाला इंजन अपनाने के लिए विमान के बुनियादी ढांचे में तब्दीली करनी होगी। उच्च क्षमता वाले इंजन का वजन भी अधिक होगा ऐसे में विमान का संतुलन बिगड़ सकता है और ईंधन खपत भी बढ़ सकती है। ऐसे में अक्सर इंजन बदलने के बाद प्रदर्शन निराशाजनक हो जाता है।

तेजस चौथी पीढ़ी की तकनीक के साथ हल्के बहुउपयोगी लड़ाकू विमान के रूप में उभरा है। चूंकि इसका डिजाइन तैयार करना भारत के हाथ में है इसलिए इसके विभिन्न संस्करण आसानी से तैयार हो सकते हैं। मिसाल के तौर पर नौसैनिक लड़ाकू विमान या लड़ाकू प्रशिक्षु विमान। इसे जरूरत के मुताबिक तब्दील कर निर्यात भी किया जा सकता है। इसके विपरीत जेएफ-17 तीसरी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है जिसमें एक सीमा से अधिक तब्दीली संभव नहीं है। इसमें अच्छी बात यह है कि इसकी लागत कम है और डिजाइन के जोखिम नहीं हैं। ऐसे में यह हवाई जंग के लिए सस्ता और विश्वसनीय विमान है। जैसा कि एक चीनी विश्लेषक ने कहा, 'जेएफ-17 आज का विमान है और तेजस आने वाले कल का।'

Keyword: तेजस, जेएफ-17 थंडर, हल्के विमान, उड़ान, एलसीए, वायुसेना, डीआरडीओ,
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