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अमेरिका में दवा कंपनियों के मार्जिन पर मूल्य निर्धारण का दबाव

राम प्रसाद साहू / मुंबई May 05, 2021

अमेरिकी बाजार में दवाओं के मूल्य निर्धारण पर दबाव बढऩे और तगड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण जेनेरिक दवा बनाने वाली भारतीय कंपनियों के मार्जिन पर असर दिख सकता है। इसके अलावा बाजार में नई दवाओं को लॉन्च करने में नरमी, अमेरिकी औषधि नियामक यूएसएफडीए के निरीक्षण एवं मंजूरियों में देरी और बाजार में तगड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण मार्जिन के मोर्चे पर दवा विनिर्माताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं।

अमेरिका में दवाओं के मूल्य पर केंद्रित नैशनल एवरेज ड्रग एक्विजिशन कॉस्ट अथवा एनएडीएसी के आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी से मार्च 2021 के दौरान 75 फीसदी जेनेरिक दवाओं की कीमतों में गिरावट आई जबकि एक साल पहले की समान अवधि में इस श्रेणी की 47 फीसदी जेनेरिक दवाओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी। इससे उजागर होता है कि रिकॉर्ड संख्या में दवाओं की कीमतों में गिरावट आई है।

ताजा लॉन्च को समायोजित न किया जाए तो अप्रैल में जेनेरिक दवा पोर्टफोलियो के मूल्य में 10 फीसदी की गिरावट आई है जबकि मार्च तिमाही में यह आंकड़ा 6 से 8 फीसदी रहा था। घरेलू ब्रोकरेज फर्म के एक विश्लेषक ने कहा कि अमेरिका के जेनेरिक दवा उद्योग में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है और वहां अपस्फीति के संकेत मिल रहे हैं, विशेष तौर पर विरासत वाले पोर्टफोलियो में। उन्होंने कहा कि नई दवाओं के लॉन्च के अभाव में अगले कुछ महीनों के दौरान इसकी स्थिति कहीं अधिक खराब हो सकती है। इससे न केवल मार्च तिमाही में कंपनियों का मार्जिन प्रोफाइल प्रभावित हो सकता है बल्कि चालू तिमाही में भी इसका असर दिख सकता है।

आईआईएफएल रिसर्च का मानना है कि मार्च तिमाही के दौरान मांग परिदृश्य कमजोर रहने के आसार हैं। इस दौरान सर्दी-बुखार के मामलों में भी आमतौर पर नरमी रहती है और अमेरिका में वैकल्पिक सर्जरी अभी भी कोविड-पूर्व स्तर के मुकाबले 20 फीसदी कम है। इसका प्रभाव दवाओं की मांग पर भी दिखेगा।

इनमें से कुछ रुझान बायोकॉन जैसी कंपनियों के मार्च तिमाही के वित्तीय नतीजों पर भी दिखे हैं। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2022 के लिए कंपनी के आय अनुमान में 10 फीसदी की कटौती की है। ऐसा मुख्य तौर पर बायोसिमिलर के लिए मंजूरियों में देरी और विरासत वाली दवाओं के पोर्टफोलियो में तगड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए किया गया है।

वित्त वर्ष 2022 की दूसरी छमाही के दौरान कोविड वैश्विक महामारी का प्रभाव कम होने और नई दवाओं के लॉन्च होने के साथ ही इस दबाव के कम होने के आसार हैं। मोतीलाल ओसवाल इंस्टीट््यूशनल इक्विटीज के तुषार मनुधने के अनुसार, भारतीय दवा कंपनियों के लिए इसका मिलाजुला असर दिखेगा। जटिल जेनेरिक दवा पोर्टफोलियो के साथ सीमित प्रतिस्पर्धा वाली कंपनियों और अनुपालन वाले विनिर्माण संयंत्र वाली कंपनियों के लिए बेहतर वृद्धि और लाभप्रदता दिख सकती है। जबकि कोविड के कारण प्रमुख दवाओं की मंजूरियों में देरी होने से कुल मिलाकर वृद्धि की संभावनाएं सीमित होंगी।

सूचीबद्ध दवा कंपनियों में अरबिंदो फार्मा अमेरिकी बाजार से सबसे अधिक राजस्व अर्जित करती है जबकि उसके बाद कैडिला, डॉ रेड्डीज, ल्यूपिन और सन फार्मा का स्थान है। निकट भविष्य के दबाव को देखते हुए निवेशकों को अधिक मात्रा में निवेश करने के लिए फिलहाल थोड़ा इंतजार करना चाहिए।


देसी यात्रा बीमा योजना के लिए दिशानिर्देश

बीमा नियामक आईआरडीएआई ने मानक देसी पर्यटन बीमा योजना के लिए दिशानिर्देश जारी किया है, जो भारत यात्रा सुरक्षा के नाम से जाना जाएगा। सामान्य व स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को 1 जुलाई, 2021 से ऐसी योजनाओं की पेशकश करनी होगी।

इन योजनाओं के तहत पांच प्लान हैं और कवरेज लाभ आधारित व इनडेमिनिटी आधारित है। नियामक ने कहा, भारत में हालांकि पर्यटन बीमा से जुड़ी कई योजनाएं हैं और हर योजना अलग-अलग है, साथ ही आम लोगों को सही योजना चुनने में मुश्किल हो सकती है। ऐसे में कवरेज के एकसमान विशेषता वाली मानक पर्यटन बीमा योजना तैयार की गई है ताकि यह आम लोगों को आम जरूरतों के लिए उपलब्ध हो सके।     बीएस

Keyword: अमेरिका, दवा कंपनियां, मार्जिन, मूल्य निर्धारण, प्रतिस्पर्धा,
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