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सेबी की सख्ती से एमएफ लाभांश पर लग सकता है ब्रेक

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई April 24, 2021

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के लाभांश पर सख्ती से संबंधित नए नियमों (1 अप्रैल से प्रभावी) से फंड हाउस कम बार लाभांश घोषित करने या ऐसी घोषणाओं को समाप्त करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

नए मानकों को फंड हाउसों द्वारा दिए जाने वाले लाभांश को समेकित आय विवरण में आय वितरण (एनएवी में वृद्घि) और पूंजी वितरण (समान रूप से रिजर्व) के तौर पर अलग दिखाने की जरूरत है।

इससे फंड हाउसों के लिए स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के लिए परिचालन एवं अनुपालन संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है जिससे टीडीएस असमानता और निवेशकों के साथ विवादों को बढ़ावा मिल सकता है।

एक फंड हाउस के कार्याधिकारी ने कहा, 'आप लाभांश घोषणाओं को कम करने का अनुमान जता सकते हैं। फंड हाउस के तौर पर हम लाभांश घोषणा के लिए बाध्य नहीं हैं और इसलिए इस साल यह नहीं किया जा रहा है।'

लाभांश योजनाएं बजट 2020 में लाभांश को निवेशकों के हाथ में कर योग्य बनाए जाने के बाद से निवेशकों के लिए कम लोकप्रिय रह गई हैं। उन्होंने कहा कि सेबी की लाभांश संबंधित नई सख्ती से फंड हाउसों के लिए लाभांश घोषित करना आकर्षक नहीं रह जाएगा।

मिरई ऐसेट मैनेजमेंट के मुख्य कार्याधिकारी स्वरूप मोहंती का मानना है कि एमएफ द्वारा लाभांश की घोषणाएं इस साल काफी कम रह सकती हैं, क्योंकि नए  लाभांश नियमों का पालन परिचालन के नजरिये से एक जटिल प्रक्रिया साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि समस्या इससे जुड़ी हुई है कि बैलेंस्ड हाइब्रिड फंडों में पिछले दो वर्षों में ऐसे उत्पादों के तौर पर गलत तरीके से बिक्री हुई थी जो लगातार लाभांश मुहैया करा सकते हैं।

मोहंती ने कहा, 'कई निवेशक इससे अनभिज्ञ थे कि उनकी आय लाभांश के तौर पर उन्हें लौटाई गई। नई व्यवस्था के तहत निवेशक इससे अवगत होंगे कि वापस मिलने वाली रकम पूंजी का हिस्सा है।'

वैल्यू रिसर्च के आंकड़े के अनुसार, 31 मार्च 2021 तक लाभांश योजनाओं की राशि 3.98 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही।

विश्लेषकों का मानना है कि नए लाभांश नियम सिस्टमैटिक विड्रावल प्लांस (एसडब्ल्यूपी) को उन निवेशकों के लिए ज्यादा लोकप्रिय बनाएंगे जिन्हें नियमित आय की जरूरत हो, क्योंकि ये आय घोषणा और भुगतान के समय कर गणना की जरूरत से अलग हैं।

एक वितरक अमोल जोशी ने कहा, 'हमने कुछ समय से लाभांश योजनाओं के मुकाबले ग्रोथ योजनाओं का समर्थन किया है। हमने उन निवेशकों के लिए लाभांश प्लान के मुकाबले एसडब्लयूपी का भी सुझाव दिया है जिन्हें आय की जरूरत है, क्योंकि निवेशक ऐसी योजनाओं से जरूरत से संबंधित पूंजी का प्रबंधन कर सकते हैं। इसके अलावा, इक्विटी योजनाओं से एसडब्ल्यूपी के तहत बिकवाली 1 लाख रुपये तक के लिए कर मुक्त है, यदि वे दीर्घावधि पूंजी लाभ हासिल करते हैं।'

एसडब्ल्यूपी योजना निवेशकों को नियमित तौर पर निकाली जाने वाली रकम के निर्धारण और समय की अनुमति प्रदान करती है, जिस पर उन्हें उसे निकालने की जरूरत होती है।

म्युचुअल फंडों द्वारा वितरित आय निवेशकों के हाथ में कर योग्य है और इस पर टीडीएस कटता है। यदि म्युचुअल फंड निवेशकों को वितरित पूंजी पर टीडीएस नहीं काटते हैं तो कुल कर संग्रह घट सकता है जिससे सरकार के लिए राजस्व नुकसान को बढ़ावा मिल सकता है।

एमएफ उद्योग ने इस संबंध में कर विश्लेषकों से परामर्श किया है और उन्हें सलाह दी गई है कि पूंजी वितरण को कर अधिकारियों द्वारा अलग अलग तरीके से परिभाषित किया जा सकता है और इससे निवेशकों के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

Keyword: सेबी, एमएफ लाभांश, ब्रेक, सख्ती, नए नियम, टीडीएस,
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