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बैंक सहन करें चक्रवृद्घि ब्याज की देनदारी : सरकार

निकुंज ओहरी / नई दिल्ली April 20, 2021

वित्त मंत्रालय ने अनौपचारिक तौर पर बैंकों को ग्राहकों से वसूले गए चक्रवृद्घि ब्याज की रकम को लौटाने या उसे समायोजित करने को कहा है। मंत्रालय ने बैंकों को यह निर्देश सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय के आलोक में दिया है जिसमें ऋणस्थगन वाले खातों के लिए वसूले गए ब्याज पर ब्याज की रकम को लौटाने का आदेश दिया गया था।

इस मामले से अवगत एक अधिकारी ने कहा कि बैंकों से रकम लौटाने या खातों की भविष्य की देनदारी में समायोजित करने को कहा गया है। इसके दायरे में सरकार की ओर से 2 करोड़ रुपये तक के ऋणों के लिए घोषित योजना की तरह ऋणस्थगन की सुविधा लेने वाले अथवा नहीं लेने वाले सभी खाते आएंगे।

हालांकि, बैंक सामूहिक तौर पर भारतीय बैंक संघ के माध्यम से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सरकार दोनों को प्रतिवेदन देने पर विचार कर रहे हैं। ऋणदाताओं के प्रतिनिधि निकाय ने पिछले महीने सरकार से संपर्क कर कर्जदारों को छह महीने के लिए चक्रवृद्घि ब्याज और साधारण ब्याज के अंतर की अनुग्रह अदायगी के अनुदान की गुंजाइश को बढ़ाने के लिए कहा था ताकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कारण अतिरिक्त रिफंड को कवर किया जा सके।

अधिकारी ने कहा कि सरकार ने अनुमानित तौर पर करीब 8,000 करोड़ रुपये के चक्रवृद्घि ब्याज माफी के लिए बैंकों को रकम की भरपाई करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है।

इक्रा लिमिटेड में फाइनैंशियल सेक्टर रेटिंग्स के उपाध्यक्ष और क्षेत्र प्रमुख अनिल गुप्ता के मुताबिक इस 8,000 करोड़ रुपये में निजी बैंकों की हिस्सेदारी मोटे तौर पर 37 फीसदी है सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी 60 फीसदी है।

बैंकों को अप्रैल में अगली किस्त में दंडात्मक ब्याज को समायोजित करना है। ऋणदाताओं ने अपने बही खातों को दबावग्रस्त होने का हवाला देकर भारतीय बैंक संघ से वित्तीय सेवाएं विभाग को एक और प्रतिवेदन देने का अनुरोध किया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 23 मार्च को आदेश दिया था कि बैंक पिछले वर्ष महामारी के दौरान ऋणस्थगन की राहत लेने वाले खातों के लिए ब्याज पर ब्याज की वसूली नहीं कर सकते हैं और इस प्रकार से वसूली गई रकम को निश्चित तौर पर ऋण खाता की अगली किस्त में लौटाया जाना चाहिए।

पिछले महीने बिजनेस स्टैंडर्ड ने खबर दी थी कि संभव है कि सरकार ग्राहकों को ब्याज पर ब्याज की रकम को लौटाने के लिए 8,000 करोड़ रुपये के बिल का भुगतान नहीं करे। इसकी वजह है कि सरकार अतिरिक्त बोझ नहीं उठा सकती है क्योंकि उसने पहले ही 2 करोड़ रुपये तक के छोटे ऋणों के लिए राहत की घोषणा कर रखी है। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक ग्राहकों से वसूले गए चक्रवृद्घि ब्याज को लौटाने का दायित्व पूरी तरह से उसी पर नहीं है।

अक्टूबर, 2020 में सरकार ने 2 करोड़ रुपये से कम की रकम वाले ऋणों के लिए चक्रवृद्घि ब्याज माफ करने की योजना घोषित की थी जिसमें शिक्षा, आवास, वाहन, उपभोक्ता टिकाऊ सामान ऋणों, एमएसएमई को दिए गए ऋणों, क्रेडिट कार्ड का बकाया सहित अन्य ऋण शामिल थे।

Keyword: बैंक, चक्रवृद्घि ब्याज, देनदारी, निर्देश, सर्वोच्च न्यायालय,
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