बिजनेस स्टैंडर्ड - टीके से जुड़ी विफलता
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, May 13, 2021 05:13 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

टीके से जुड़ी विफलता

संपादकीय /  April 11, 2021

महामारी की दूसरी लहर पूरे देश में जोर पकड़ रही है। संक्रमण के नये मामलों की तादाद रोजाना 1.50 लाख का स्तर पार कर चुकी है। सर्वाधिक प्रभावित महाराष्ट्र समेत कई राज्यों की शिकायत है कि टीकों की कमी हो गई है। इस बीच भारत ने टीकों का निर्यात भी रोक दिया है जिससे अन्य देशों में संकट उत्पन्न हो गया है। माना जा रहा था कि भारत पूरी दुनिया को टीका मुहैया कराएगा। सरकार ने वादा भी यही किया था। बीते महीने के दौरान भी यह बात बार-बार दोहराई गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय विभिन्न राज्य सरकारों पर दोषारोपण करने में समय गंवा रहा है। टीकाकरण मेंं यह देरी भारत सरकार के रस्मी अहंकार और निजी क्षेत्र को लेकर उसकी तिरस्कार की भावना से हो रही है।

टीके की प्रतीक्षा कर रहे हर भारतीय को सरकार से एक प्रश्न तो पूूछना ही चाहिए: आपके खरीद के ऑर्डर कहां हैं? अन्य देशों में सरकारों ने टीका निर्माताओं से संपर्क किया और उन्हें टीका खरीदने की गारंटी वाले ऑर्डर दिए। अमेरिका मेंं तो फाइजर के टीके के प्रभावी और सुरक्षित होने की पूरी जानकारी होने के पहले ही सरकार ने 10 करोड़ टीके खरीदने का ऑर्डर दे दिया था और 50 करोड़ अन्य टीकों की खरीद का विकल्प भी रखा था। यही प्रक्रिया अन्य कंपनियों के साथ दोहराई गई। यूरोप और अन्य देशों ने भी ऐसा ही किया। कई देशों ने भारतीय टीका निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को भी टीकों के ऑर्डर दिए। भारत सरकार ने क्या किया? उसने शुरुआती 10 करोड़ टीकों के लिए कीमत कम रखने को लेकर बातचीत की। इसके बाद ठहराव आ गया क्योंकि सरकार ने खरीद ऑर्डर पर हस्ताक्षर ही नहीं किए थे। आखिरकार एसआईआई को ऑर्डर मिला लेकिन केवल 1.1 करोड़ खुराक का। सरकार जितने टीके खरीदना और लगाना चाहती है उसके लिए भुगतान करने में उसे क्या दिक्कत है? अब यदि एसआईआई के पास पर्याप्त धनराशि नहीं है तो वह अचानक इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन कैसे बढ़ाएगी?

इसने सरकार की एक और विफलता को जन्म दिया और वह है सही समय पर पर्याप्त क्षमता तैयार करना। यह स्पष्ट नहीं है कि सन 2020 में भारत सरकार ने भारतीय टीका निर्माताओं को उत्पादन बढ़ाने में कोई आर्थिक मदद की या नहीं। बिल गेट्स फाउंडेशन जैसे स्रोतों से पैसा जरूर आया। राजनेता और अफसरशाह शायद यह सोचते रहे कि एसआईआई जैसी निजी कंपनियां सरकार का ही हिस्सा हैं। इस भीषण महामारी के अवसर पर सरकार टीका उत्पादन को सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ सकती क्योंकि वह क्षमता बढ़ाने में निजी कंपनियों के साथ सहयोग नहीं करना चाहती।

सरकार की अंतिम विफलता है कीमत निर्धारण। एसआईआई के अदार पूनावाला ने बार-बार कहा है कि कंपनी भारत सरकार को शुरुआती 10 करोड़ टीके अत्यधिक रियायती दर पर देने को तैयार हुई क्योंकि उसे आशा थी कि इसके बाद उसे खुली बिक्री करने का अवसर मिलेगा और इससे आने वाली राशि का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी निवेश में किया जाएगा। यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार ने इस समझौते का मान रखा या नहीं।  यदि देश के शहरों में अस्पतालों में बिस्तर कम हैं तो इसलिए कि जिस समय संवेदनशील लोगों को टीके लगाए जाने थे वह समय गंवा दिया गया। भारत को गर्मियां अपर्याप्त टीकों के साथ बितानी होंगी क्योंकि सरकार अब तक यह नहीं समझ पाई है कि निजी उपक्रम कैसे काम करते हैं। नतीजा सामने है: अमेरिका ने जहां यह कहा है कि अगले दो सप्ताह में वहां सभी वयस्कों को टीके लगने शुरू हो जाएंगे, वहीं भारत अभी भी टीकाकरण के लिए 45 वर्ष की उम्र सीमा समाप्त करने को राजी नहीं है।

Keyword: टीके, विफलता, महामारी, दूसरी लहर, संक्रमण, गारंटी, ऑर्डर, सीरम,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कोरोना महामारी का फल कारोबार पर पड़ा है असर?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.