बिजनेस स्टैंडर्ड - रेल प्राधिकरण ने 24 भूखंडों से कमाए 1,867 करोड़ रुपये
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, May 15, 2021 07:36 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

रेल प्राधिकरण ने 24 भूखंडों से कमाए 1,867 करोड़ रुपये

त्वेष मिश्र / नई दिल्ली April 05, 2021

रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) ने अब तक 24 भूखंडों की नीलामी से 1,867 करोड़ रुपये का पट्टा प्रीमियम हासिल किया है। इन भूखंडों के लिए कुल आरक्षित मूल्य 1,473 करोड़ रुपये था। फिलहाल आरएलडीए मुद्रीकरण के लिए सात वाणिज्यिक स्थानों और अन्य सात बहुआयामी परिसरों की पेशकश कर रहा है।

मामले के जानकार अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में अशोक विहार भूखंड और चेन्नई में पाड़ी भूखंड अब तक सबसे अधिक रकम दिलाने वाले भूखंड रहे। गोदरेज प्रोपर्टीज ने 1,359 करोड़ रुपये चुकाकर अशोक विहार का भूखंड खरीदा जबकि कपड़े की बड़ी कंपनी पोथीज ने 43 करोड़ रुपये में चेन्नई में पाड़ी का भूखंड अपने नाम किया।    आरएलडीए के प्रतिवेदन के मुताबिक पाड़ी की जमीन वाणिज्यिक उपयोग के लिए उपयुक्त है जबकि अशोक विहार की जमीन का उपयोग वाणिज्यिक, आवासीय और मिश्रित उपयोग के लिए किया जा सकता है।

बिजनेस स्टैंडर्ड के सवालों के जवाब में आरएलडीए ने कहा कि उसके पास फिलहाल 84 वाणिज्यिक आवासीय स्थल, 84 रेलवे कॉलोनी पुनर्विकास कार्य और रेलवे स्टेशनों के 62 पुनर्विकास कार्य हैं। इसके अलावा आरएलडीए 123 बहुआयामी परिसरों का कार्य देख भी देख रहा है जिनमें से 55 को पहले ही पट्टे पर दिया जा चुका है।   

अधिकारी कहते हैं कि आरएलडीए द्वारा मुद्रीकरण किए जाने वाली संपत्तियों का निर्णय रेलवे बोर्ड ने लिया है। आरएलडीए रेलवे की जमीन के विकास के लिए रेल मंत्रालय के तहत एक सांविधिक प्राधिकरण है। विकास योजना के हिस्से के तौर पर प्राधिकरण के चार प्रमुख कार्य हैं- वाणिज्यिक स्थलों को पट्टे पर देना, कॉलोनी का पुनर्विकास करना, स्टेशन पुनर्विकास और बहुआयामी परिसर।

एक अनुमान के मुताबिक पूरे देश में रेलवे के पास करीब 43,000 हेक्टेयर जमीन खाली पड़ी है। आरएलडीए वाणिज्यिक विकास के लिए जमीन 45 वर्ष तक के पट्टे पर और आवासीय विकास के लिए 90 वर्ष तक के पट्टे पर देता है।

आरएलडीए का गठन 2007 में किया गया था। मुकदमेबाजी और कब्जों के कारण आरएलडीए को अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में मुश्किलों से गुजरना पड़ा है। आरएलडीए को राज्य सरकारों के विरोध का भी सामना करना पड़ता है जो नहीं चाहते कि शहरों के बीच स्थित बड़े बड़े आकर्षक भूखंड उनके हाथों से चला जाए।    

जुलाई 2018 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने आरएलडीए द्वारा वाणिज्यिक उपयोग के लिए रेलवे की जमीन के विकास में देरी पर नराजगी जताई थी। उसने सिफारिश की थी कि रेलवे भूमि उपयोग में बदलाव और खुला क्षेत्र आरक्षित करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों से मंजूरी लेने के लिए समय पर कार्रवाई कर सकता है। रेलवे राज्य सरकारों के साथ चर्चा कर जमीन के उपयोग में बदलाव करने पर उसके कानूनी परिणामों का भी परिक्षण कर सकता है।

सीएजी की उस नाराजगी के बाद आरएलडीए के प्रयासों में कुछ तेजी देखी जा रही है।

Keyword: रेल भूमि विकास प्राधिकरण, आरएलडीए, भूखंड, नीलामी,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या देश में दिसंबर तक दो अरब टीकों का उत्पादन संभव है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.