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छोटे उद्यमों से खरीद लक्ष्य से ज्यादा

रामवीर सिंह गुर्जर / नई दिल्ली March 28, 2021

सूक्ष्म, लघु व मझोले उपक्रम (एमएसएमई) के लिए सरकारी खरीद नीति फायदेमंद साबित हो रही है। इस नीति के तहत केंद्रीय मंत्रालय/विभाग/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के लिए अपनी कुल खरीद का 25 फीसदी हिस्सा एमएसएमई से खरीदना अनिवार्य है। हालांकि इस नीति को लागू करते समय वर्ष 2012 में खरीद का अनिवार्य लक्ष्य 20 फीसदी ही था। एमएसएमई सरकारी नीति की सफलता का अंदाजा इसी लगाया जा सकता है कि एमएसएमई से सरकारी खरीद का आंकड़ा लक्ष्य की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा पहुंच गया है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान कोरोना काल में भी इस नीति के तहत निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा खरीद एमएसएमई से की। उद्यमियों के मुताबिक इस नीति के लागू होने से पहले कुल सरकारी खरीद का 10 फीसदी हिस्सा भी एमएसएमई से नहीं खरीदा जाता था।  

एमएसएमई मंत्रालय से प्राप्त आंकडों के अनुसार वर्ष 2020-21 में अब तक केंद्रीय मंत्रालय/ विभाग/ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की कुल सरकारी खरीद 1,03,623 करोड़ रुपये हो चुकी है। इसमें से 31,724 करोड़ रुपये की खरीद एमएसएमई से की गई, जो कुल खरीद का 30.60 फीसदी हिस्सा हैै। जबकि एमएसएमई से खरीद का लक्ष्य 25 फीसदी था। इस तरह इस वित्त वर्ष एमएसएमई से सरकारी खरीद लक्ष्य से 20 फीसदी ज्यादा हो रही है। वर्ष 2020-21 के दौरान सरकारी खरीद से 1,37,396 एमएसएमई लाभान्वित हुए। सबसे ज्यादा पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय एमएसएमई से खरीद करता है। इसके बाद उर्जा, रक्षा, भारी उद्योग व सार्वजनिक उपक्रम व इस्पात मंत्रालय समेत अन्य मंत्रालय/विभाग/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भी बड़े स्टार पर एमएसएमई से खरीद करते हैं।

 वर्ष 2019-20 के दौरान 1,57,671 एमएसएमई से 39,631 करोड़ रुपये की सरकारी खरीद की गई, जो कुल खरीद का 30.17 फीसदी हिस्सा थी।  

चैंबर आफ इंडियन माइक्रो, स्मॉल ऐंड मीडियम इंटरप्राइजेज के अध्यक्ष मुकेश मोहन गुप्ता कहते हैं कि एमएसएमई के लिए बनी सरकारी नीतियों में शायद ही कोई नीति सरकारी एमएसएमई खरीद नीति जितनी सफल रही हो। इस नीति के तहत लक्ष्य से भी ज्यादा खरीद होने से एमएसएमई को काफी लाभ मिल रहा है। इस नीति के बनने से पहले सरकारी विभाग एमएसएमई से सरकारी खरीद को अहमियत नहीं देते थे और काफी कम खरीद करते थे।

Keyword: छोटे उद्यम, एमएसएमई, सरकारी खरीद नीति, सार्वजनिक उपक्रम,
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