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31 मार्च तक करें ये काम ताकि नए वित्त वर्ष में रहे आराम

बिंदिशा सारंग /  March 28, 2021

मार्च का महीना रुपये-पैसे के लिहाज से बहुत अहम होता है। कहां से कर बचाना है, कहां चुकाना है और 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष के लिए पैसा कैसे बचाना एवं कहां लगाना है, इसकी उधेड़बुन में ही मार्च बीत जाता है। खास तौर पर आयकर से जुड़े कई मामले आपको इसी महीने में देखने होते हैं।

हालांकि मार्च अब गुजरने वाला है और ज्यादातर लोग कर आदि का निपटारा कर चुके होंगे। फिर भी हम आपको कुछ अहम बिंदु समझा रहे हैं, जिनसे आपको 31 मार्च तक निपट लेना है और अगर इनमें से कुछ भी आपके ध्यान से चूक गया है तो हरकत में आ जाइए वरना आपको जुर्माना भी भुगतना पड़ सकता है।


अग्रिम कर (अंतिम तारीख 15 मार्च)

वित्त वर्ष 2020-21 के लिए अग्रिम कर (अगर आप पर देनदारी बनती है) की चौथी यानी आखिरी किस्त चुकाने की आखिरी तारीख 15 मार्च थी। हालांकि यह तारीख निकल चुकी है मगर जो कर भुगतान से चूक गए हैं, उन्हें ध्यान देना चाहिए। आरएसएम इंडिया के संस्थापक सुरेश सुराणा कहते हैं, 'जिन्होंने अग्रिम कर नहीं चुकाया है, उन पर अब ब्याज का बोझ बढ़ जाएगा। लेकिन राहत की बात यह है कि अनुमानित कर देनदारी अगर 10,000 रुपये से कम है तो अग्रिम कर चुकाने की जरूरत नहीं होती है।'

कर जमा करने में चूक पर आयकर अधिनियम की धारा 234सी के तहत ब्याज लगाया जाता है। नियत तिथि तक किस्त नहीं आई तो ब्याज लग जाता है। चूक वाली हरेक तिमाही में 1 फीसदी प्रतिमाह या उसका अंश बतौर ब्याज लिया जाता है। अगर करदाता अपनी देनदारी का कम से कम 90 फीसदी हिस्सा 31 मार्च, 2021 से पहले चुकाने में नाकाम रहा तो बकाया कर पर 1 अप्रैल से उस तारीख तक ब्याज वसूला जाएगा, जब तक कर निर्धारण नहीं होता है। यह ब्याज आयकर अधिनियम की धारा 234बी के तहत वसूला जाएगा और उसकी दर 1 फीसदी प्रति माह होगी या महीने के किसी एक हिस्से के लिए 1 फीसदी ब्याज वसूला जाएगा।

चार्टर्ड अकाउंटेंसी कंपनी टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज में पार्टनर विवेक जालान समझाते हैं, 'यदि भारत में रहने वाले किसी वरिष्ठ नागरिक (उक्त वित्त वर्ष के दौरान 60 साल या उससे अधिक उम्र वाले) की कारोबार या व्यवसाय से किसी प्रकार की कमाई नहीं होती है तो उसे अग्रिम कर नहीं भरना होगा।'

कंपनियां अपने शेयरधारकों को जो लाभांश देती हैं, उस पर लाभांश वितरण कर (डीडीटी) चुकाने की जिम्मेदारी 31 मार्च, 2020 तक कंपनियों की ही थी। मगर 1 अप्रैल, 2020 के बाद कर जमा कराने की जिम्मेदारी शेयरधारकों की हो गई है। ध्यान रहे कि लाभांश से हुई आय पर अग्रिम कर लाभांश की घोषणा होने अथवा उसका भुगतान होने के बाद ही जमा कराना चाहिए। सुराणा कहते हैं, 'चूंकि लाभांश से होने वाली आय का अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सकता, इसलिए कंपनी की घोषणा के बाद ही सुनिश्चित होता है कि लाभांश आय मिलनी है और कितनी मिलनी है। लाभांश तय होने और घोषणा होने के बाद आय सुनिश्चित हो जाती है और करदाता को उसे साल भर की अपनी अग्रिम कर गणना में शामिल करना पड़ता है।'

वित्त विधेयक 2021 (जिसे अब संसद की मंजूरी मिल चुकी है) में लाभांश आय के संबंध में अग्रिम कर भुगतान की आवश्यकता में ढील देने की बात है क्योंकि यह आय इस तरह की है कि इस पर अग्रिम कर देनदारी की सही गणना की ही नहीं जा सकती।


टीडीएस या टीसीएस संग्रह (31 मार्च)

कर विभाग ने कोविड-19 महामारी के दौरान करदाताओं और कर संग्रह करने वालों को राहत देने के लिए वित्त वर्ष 2021 की पहली और दूसरी तिमाहियों के लिए स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) रिटर्न या स्टेटमेंट जमा कराने की अंतिम तिथियां बढ़ा दी थीं। विकास मित्तल ऐंड एसोसिएट्स में पार्टनर विकास मित्तल बताते हैं, 'अगर कर कटौती करने वाले या संग्रह करने वाले बढ़ाई गई समयावधि तक रिटर्न या स्टेटमेंट नहीं देते हैं तो उन पर विलंब शुल्क लगाया जाएगा। जुर्माना एक लाख रुपये तक हो सकता है। इसलिए विलंब शुल्क या जुर्माने से बचना है तो बेहतर यही होगा कि बढ़ाई गई समयसीमा तक या उससे पहले ही रिटर्न एवं स्टेटमेंट सौंप दिए जाएं।'


विवाद से विश्वास योजना (31 मार्च)

कर संबंधी विवादों को कम करने और जल्द से जल्द निपटाने के लिए सरकार विवाद से विश्वास योजना लाई है। इसे 2020 के बजट में पेश किया गया था। इसका मकसद अटके आयकर मामले निपटाना है ताकि अटका हुआ कर राजस्व सरकार को जल्द से जल्द मिल सके। इस योजना के तहत घोषणापत्र जमा कराने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 मार्च, 2021 कर दी गई है।

गुप्ता कहते हैं, 'जिन लोगों पर विवादास्पद कर मामले हैं और जो लंबे मुकदमों में फंसना नहीं चाहते हैं, वे इस योजना के तहत 31 मार्च, 2021 तक या उससे पहले योजना का फायदा उठा सकते हैं। इस अंतिम तिथि के बाद किए गए किसी भुगतान पर विवादित कर राशि की 10 फीसदी रकम और देनी पड़ेगी।'

करोड़ों लोगों के लिए मार्च का महीना कर बचत के लिए गहमागहमी करने और व्यस्त रहने का महीना है। मगर ऊपर समझाई गई बातों को बिल्कुल भी नहीं भूलें ताकि 1 अप्रैल से किसी भी प्रकार के तनाव के बगैर नए वित्त वर्ष की शुरुआत कर सके।


पैन से आधार जोड़ें (31 मार्च)

स्थायी खाता संख्या (पैन) को आधार क्रमांक से जोडऩे की आखिरी तारीख भी 31 मार्च ही है। अगर इस तारीख तक आप पैन को आधार से नहीं जोड़ते हैं तो आपका पैन काम करना बंद कर देगा। पहले इसकी आखिरी तारीख पिछले साल की 30 जून थी मगर कोरोनावायरस महामारी और उसके कारण हुए लॉकडाउन को देखते हुए उसे बढ़ाकर 31 मार्च, 2021 कर दिया गया। क्लियरटैक्स के मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता ने कहा, 'पैन को आधार से नहीं जोड़ा गया तो पैन काम करना बंद कर देगा। मान लिया जाएगा कि पैन दिया ही नहीं गया है।' इसके अलावा आयकर विभाग 10,000 रुपये जुर्माना भी लगा देगा। गुप्ता बताते हैं, 'बैंक खाते में एक निश्चित मात्रा में नकदी जमा कराने, अचल संपत्ति की खरीदफरोख्त करने, बैंक खाता या डीमैट खाता खोलने, धन भेजने आदि के लिए पैन का ब्योरा देना जरूरी होता है। अगर यह निष्क्रिय हो गया तो आधार से जोडऩे के बाद ही यह दोबारा चालू होगा।'

पैन को आधार से जोडऩे की अंतिम तिथि सबसे पहले 31 अगस्त, 2017 थी। उसे बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2017 और उसके बाद 31 मार्च, 2018 तथा बाद में 31 मार्च, 2019 किया गया था। पिछला विस्तार 31 मार्च, 2021 तक किया गया है और अंतिम तिथि को और आगे बढ़ाए जाने की संभावना नहीं है। जालान कहते हैं, 'जब तक पैन को आधार से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक कर विभाग रिटर्न की प्रोसेसिंग नहीं करेगा। इसलिए पैन को आधार से जोडऩा जरूरी है।'


आयकर रिटर्न (31 मार्च)

वित्त वर्ष 2019-20 के लिए विलंबित या संशोधित रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 मार्च है। एनए शाह एसोसिएट्स में पार्टनर गोपाल बोहरा बताते हैं, 'वित्त वर्ष 2019-20 के लिए विलंबित या संशोधित रिटर्न 31 मार्च के बाद नहीं भरे जा सकते हैं। इसलिए ऐसे सभी करदाता, जिन्होंने अभी तक अपने रिटर्न नहीं भरे हैं, उन्हें निर्धारित ब्याज एवं विलंब शुल्क सहित अपने रिटर्न जल्द से जल्द भरने चाहिए।' अगर आपने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए निर्धारित तिथि तक रिटर्न नहीं भरा तो आप उस वित्त वर्ष के लिए संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाएंगे। बोहरा ने कहा, 'भरे जा चुके रिटर्न में किसी तरह का सुधार भी 31 मार्च से पहले ही किया जा सकता है।'

आयकर अधिनियम कर विभाग को अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद धारा 119(2)(बी) के तहत व्यापक अधिकार सौंप देता है। इसके तहत विभाग को अवधि खत्म होने के बाद भी किसी तरह की छूट, कटौती, रिफंड या अन्य प्रकार की राहत के दावे अथवा आवेदन को स्वीकार करने का अधिकार है। सुराणा समझाते हैं, 'इस तरह करदाता देर हो जाने पर कर प्राधिकरण के पास दरख्वास्त डाल सकता है और उससे माफी मांग सकता है। हो सकता है कि विभाग उसके मामले की पड़ताल कर उसे देर से रिटर्न ददाखिल करने की इजाजत दे दे।' विशेषज्ञों की राय तो यही है कि इस मामले में और देर नहीं करनी चाहिए। गुप्ता बताते हैं, 'कोई व्यक्ति वित्त वर्ष 2019-20 के लिए विलंबित रिटर्न 31 मार्च, 2021 तक भर सकता है। लेकिन देर से रिटर्न भरने के एवज में उसे जुर्माना चुकाना होगा। जिन करदाताओं की कर योग्य आय पांच लाख रुपये से कम है, उन्हें केवल 1,000 रुपये का जुर्माना भरना होगा। उससे अधिक कर योग्य आय वाले लोगों के लिए जुर्माना 10,000 रुपये तक हो सकता है।'


जमा करें 15जी और 15एच

  • फॉर्म15जी और फॉर्म 15एच एक वित्त वर्ष के लिए हैं वैध
  • ये फॉर्म हर साल वित्त वर्ष की शुरुआत में ही जमा करें
  • इससे सुनिश्चित होगा कि बैंक ब्याज से हुई आपकी आय पर किसी भी तरह का टीडीएस नहीं काटेंगे
  • कोविड-19 महामारी के कारण वित्त वर्ष 2020-21 के लिए कर प्राधिकरणों ने 15जी और 15एच की वैधता बढ़ाकर 30 जून, 2020 तक कर दी थी
  • अगर आप वित्त वर्ष 2020-21 के लिए फॉर्म जमा कराना भूल गए हैं तो हो सकता है कि बैंक ने पहले ही टीडीएस काट लिया हो
  • ऐसे मामले में आप टीडीएस वापस पाने यानी रिफंड के लिए आयकर रिटर्न भर सकते हैं
  • नया वित्त वर्ष नजदीक है, इसलिए बैंक में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए फॉर्म 15जी और 15एच जमा कराना न भूलें
  • फॉर्म 15एच 60 साल से अधिक उम्र के लोगों यानी वरिष्ठ नागरिकों के लिए है, जबकि फॉर्म 15जी हर किसी के लिए है

स्रोत : कर वेबसाइट और बैंंकबाजार

Keyword: जुर्माना, अग्रिम कर, टीडीएस, टीसीएस संग्रह, विवाद से विश्वास योजना,
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