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नई तकनीक पर फर्राटा भरेगा एक्सप्रेसवे

मेघा मनचंदा / जयपुर 03 19, 2021

हरियाणा के सोहना से निर्माणाधीन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की तरफ बढ़ें तो नजारा बिल्कुल आम निर्माण परियोजना स्थल जैसा है। जहां-तहां कीचड़ मलबे के ढेर लगे हैं और निर्माण कार्य में जुटे मजदूर आसपास बैठकर भोजन करते दिख रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच एक बात आपका ध्यान खींच सकती है और वह है निर्माण सामग्री एवं तकनीक। इस परियेाजना में एकदम नई सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे एक्सप्रेसवे की उम्र बढ़ जाएगी।

इस परियोजना में इस्तेमाल होने वाले बिटुमन (गाढ़े तारकोल) की गुणवत्ता के कारण एक्सप्रेसवे ज्यादा समतल तो होगा ही, लंबे समय तक टिका भी रहेगा। यह एक्सपे्रसवे परियोजना दिल्ली और मुंबई के बीच अहम संपर्क मार्ग साबित हो सकती है। यह देश का पहला का एक्सपे्रसवे है, जिसमें पर्पेचुअल पेवमेंट डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक के कारण एक्सप्रेसवे को बार-बार मजबूत करने की जरू रत नहीं होगी और इससे कभी आवागमन में खलल भी नहीं आएगा।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों ने यह तकनीक ईजाद की है। अमूमन 30 वर्षों के बाद राजमार्गों को नए सिरे से मजबूत बनाना पड़ता है। यह जरूरत खत्म करने के लिए एनएचएआई के लोग लंबे समय से इस तकनीक की खोज में जुटे थे। एनएचएआई के एक अधिकारी ने कहा, 'अब इसकी जरूरत नहीं होगी और नवीकरण पर खर्च भी 4-5 साल के बजाय एक दशक बाद करना होगा। इस निर्माण तकनीक से लागत कम होगी और परिचालन तथा रखरखाव का समय भी बच पाएगा।'

एनएचएआई के लिए काम करने वाली एक कंपनी एप्को इन्फ्राटेक के इंजीनियर विवेक तिवारी ने कहा कि वे स्टोन मास्टिक अस्फाल्ट (एसएमए) तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसमें बड़ी मात्रा में बिटुमन का इस्तेमाल किया जाता है। तिवारी ने कहा, 'इससे सड़क परिचालन के लिए आसान बन जाती है और यह ज्यादा टिकाऊ भी हो जाती है। सड़क बनाने की लागत जरूर बढ़ जाती है मगर सड़क लंबी टिकी रहती है तो फायदा ही होता है।' बिना किसी असुविधा के वाहनों को फर्राटा लगाने में मदद के लिए एक और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस बारे में एनएचएआई अधिकारी ने कहा, 'किसी भी निर्माण कार्य में वह जगह सबसे अहम होती है जहां जोड़ होता है और इसे मजबूत करने के लिए हमने इस बार लेजर तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसकी मदद से सड़क  यातायात के लिए सुगम हो जाएगी और कहीं भी ऊबडख़ाबड़ रास्ता नहीं मिलेगा।'

एप्को इन्फ्राटेक दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हरियाणा में दो हिस्से तैयार कर रही है। कंपनी का कहना है कि आधा काम निपट भी चुका है। 1,250 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे में कुल 46 हिस्से होंगे और विभिन्न ठेकेदारों को दो या इससे अधिक हिस्सों के निर्माण के ठेके दिए गए हैं। केसीसी बिल्डकॉन को भी इस एक्सप्रेसवे के लिए ठेके मिले हैं। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद तकनीक का असर दिखना शुरू हो जाएगा और यातायात सुगम हो जाएगा। 8 लेन वाला यह एक्सप्रेसवे देश के पांच राज्यों से होकर गुजरेगा।

केसीसी बिल्डकॉन के एक इंजीनियर ने कहा, 'हम यातायात प्रबंधन प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें उपग्रहों की मदद ली जाएगी।'दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना 48 उप-परियोजनाओं के तहत पूरी की जा रही है। इनमें 17 हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (वडोदरा-मुंबई खंड) और 31 ईपीसी मॉडल (दिल्ली-वडोदरा खंड) के तहत तैयार की जा रही हैं। यह एक्सप्रेसवे परियोजना मार्च 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस नई परियोजना पर 87,500 करोड़ रुपये लागत आने का अनुमान है, इनमें भूमि अधिग्रहण पर 20,600 करोड़ रुपये भी शामिल है।
Keyword: नई तकनीक, सोहना, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, सामग्री, बिटुमन, तारकोल,
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