बिजनेस स्टैंडर्ड - सॉफ्टवेयर और सेवा क्षेत्र से परे कैसे मिले सफलता
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, April 18, 2021 07:42 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

सॉफ्टवेयर और सेवा क्षेत्र से परे कैसे मिले सफलता

श्याम पोनप्पा /  March 19, 2021

सॉफ्टवेयर और सेवा क्षेत्र में ऐसे उदाहरण विपुल मात्रा में हैं कि भारतीय कैसे व्यवस्थित तरीके से काम करते हुए चुनौतियों को हल करते हैं, टीम बनाते हैं, संस्थागत ढांचा तैयार करते हैं और बड़े पैमाने पर काम करते हैं। परंतु अन्य क्षेत्रों का क्या? यहां हम बात करेंगे विनिर्माण के विभिन्न पहलुओं की और रुख में बदलाव पर विचार की।

पोस्टमैन जैसी सॉफ्टवेयर क्षेत्र की यूनिकॉर्न (जिसका मूल्यांकन 100 करोड़ डॉलर से अधिक) कंपनी का उदाहरण लीजिए। बेंगलूरु की ऐप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) प्लेटफॉर्म वाली यह कंपनी विभिन्न ऐप को अंतरसक्रिय बनाने का काम करती है। कंपनी के संस्थापक अभियांत्रिकी और प्रबंधन से जुड़े हैं और याहू जैसी एक अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम कर चुके हैं। सन 2009 में शुरुआत के बाद छह वर्षों में कंपनी का मूल्यांकन 200 करोड़ डॉलर हो गया। यह एक उच्च मूल्य वाला सॉफ्टवेयर सेवा उपक्रम है। इस क्षेत्र में भारतीयों को महारत हासिल है। यहां पूंजी की सीमित आवश्यकता है और कई क्षेत्रों के स्थानीय तथा विदेशी बाजारों मसलन बैंकिंग और फाइनैंस, तेल एवं गैस आदि में सीधी पहुंच की सुविधा है। कंपनी की टीम ने भी उपभोक्ताओं पर केंद्रित उत्पाद तैयार करने पर विचार किया और डिजाइन और समस्याओं के हल सुझाने शुरू किए। समय पर पहल करने, विपणन और मजबूत नीति के साथ उसने कौशलपूर्वक क्रियान्वयन आरंभ किया।

इसके विपरीत विनिर्माण क्षेत्र के उपक्रमों के सामने कई समस्याएं रहती हैं। इनमें पूंजी की आवश्यकता, विस्तारित भुगतान अवधि, पूंजी, अधोसंरचना और कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत और परिष्कृत रोजगार को लेकर पूर्वग्रह शामिल है। अपर्याप्त लॉजिस्टिक्स के कारण देरी होती है और तैयार माल बढ़ता जाता है। इससे लागत बढ़ती है। छोटे हुए आपूर्तिकर्ताओं के पास काम करने की पर्याप्त क्षमता नहीं होती। हालांकि लौह अयस्क, बॉक्साइट और कपास जैसे संसाधनों तक उनकी आसान पहुंच होती है। इसके अलावा उनके पास सस्ता श्रम भी मिल जाता है। कुशल श्रम की आवश्यकता वाले क्षेत्रों मसलन औषधि, पूंजीगत वस्तु और वाहन कलपुर्जा क्षेत्र में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि इनके लिए बड़ा घरेलू बाजार उपलब्ध है। इन संभावनाओं का दोहन करने के लिए इन विनिर्माण मूल्य शृंखलाओं को वैश्विक दृष्टि से अव्वल बनने की दिशा में काफी प्रयास और निवेश दोनों करने होंगे। उनके दर्जे का आकलन करते हुए आगे की कुछ राह निकाली जा सकती है।

विनिर्माण की मौजूदा स्थिति

अक्टूबर 2020 में मैकिंजी पब्लिकेशन ने भारत में विनिर्माण से संबंधित एक रिपोर्ट में कहा कि दुनिया के अन्य हिस्सों में जहां कंपनियां कोविड के बाद अपने स्रोत और विनिर्माण की विश्वसनीयता बेहतर करने के लिए उन्हें नए सिरे से तैयार कर रही हैं, वहीं भारत में इन अवसरों का लाभ लेने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी 2006 से 2012 के बीच 9.5 फीसदी की गति से बढ़ा जबकि अगले छह वर्ष में इसमें गिरावट आई और यह 7.4 फीसदी रह गया।

इसके अलावा 2018 में शीर्ष 1,000 विनिर्माण कंपनियों में से करीब 700 का प्रतिफल उनकी पूंजीगत लागत से कम रहा। जबकि जिन क्षेत्रों का प्रतिफल बेहतर रहा उनमें सन 2016 से 2020 के बीच निवेश में इजाफा हुआ था। रिपोर्ट के लेखकों का सुझाव है कि भारत में विनिर्माण क्षेत्र की बड़ी शक्ति बनने की क्षमता है, बशर्ते कि वह वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र विकसित कर ले। रिपोर्ट के अनुसार यह तभी हो सकता है जब तगड़ी संभावना वाले 11 क्षेत्रों में उचित कौशल और तकनीक हासिल की जा सके जो उत्पादकता बढ़ाने और पूंजी जुटाने में मददगार हो। अनुमान है कि औद्योगिक नीति में उचित बदलाव और समुचित प्रतिक्रिया वाले विनिर्माण के साथ सात वर्ष में मूल्य शृंखला को दोगुना किया जा सकता है। इस दौरान रोजगार भी बढ़ेगा।

विनिर्माण मूल्य शृंखला की संभावना पर मतभेद

रिपोर्ट में भारत की उच्च संभावना वाली विनिर्माण मूल्य शृंखला को परिपक्व, स्थापित लेकिन कमजोर और उभरती श्रेणियों में विभक्त किया गया है। परिपक्व मूल्य शृंखला में औषधि, वाहन कलपुर्जा और वाहन तथा रसायन आदि उन क्षेत्रों को शामिल किया गया है जहां घरेलू बाजार और निर्यात को आसानी से बढ़ाया जा सकता है। दूसरी श्रेणी के क्षेत्रों में ऐसी कमियां हैं जिन्हें दूर करके ही निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा की जा सकती है। मसलन खाद्य प्रसंस्करण कंपनियां बहुत छोटी हैं और उन्हें गुणवत्ता और लागत प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता है। यहां एक अन्य उदाहरण है वैमानिकी और रक्षा क्षेत्र में पर्याप्त तकनीकी उन्नति का अभाव। तीसरी श्रेणी उभरती मूल्य शृंखला की है जहां सेमीकंडक्टर और सौर तकनीक में एशियाई देश पीछे हैं लेकिन निवेश और तकनीक इनका विकास कर सकती है। इसके संभावित बाजार हैं कम कार्बन वाली तकनीक मसलन ऊर्जा भंडारण, हाइड्रोजन उपकरण, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन, ड्रोन और लिथियम आयन बैटरी आदि।

अब तमाम विपरीत हालात में विनिर्माण की सफलता पर विचार करें। मोटरसाइकिल उद्योग में भारतीय विनिर्माण बहुत तेजी से प्रगति कर रहा है। बजाज ऑटो ने 20 वर्ष पहले अपनी शोध एवं विकास टीम तैयार की और बढिय़ा डिजाइन और उत्पाद तैयार किए। टीवीएस मोटर्स ने भी ऐसा ही किया। सन 2005 में जब देश में चीनी मोटरसाइकिल आईं तो डर था कि देश में मोटरसाइकिल निर्माण खत्म हो जाएगा। परंतु खराब गुणवत्ता और उच्च शुल्क दरों के कारण चीनी मोटरसाइकिल पिछड़ गईं। इसके बाद बजाज ने अफ्रीकी बाजार का रुख किया जहां उसकी बेहतर गुणवत्ता वाली मोटरसाइकिल जापानी मोटरसाइकिलों से सस्ती थीं। अब बजाज और टीवीएस अफ्रीका में अव्वल हैं। वहां कोई चीनी उत्पाद नहीं है। दक्षिण अमेरिका में भी यही दोहराया गया। यूरोप में केटीएम सबसे आगे है और उसमें बजाज की 48 फीसदी हिस्सेदारी है। वैश्विक बाजार में तीन भारतीय कंपनियों हीरो, बजाज और टीवीएस का रसूख है। प्रश्न यह है कि टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, औषधि और अन्य उद्योगों में यह क्यों नहीं दोहराया गया? देश वही, श्रम कानून वही, बुनियादी ढांचा भी वही, कुछ अलग है तो वो हैं उद्यमी और शायद सीमित दृष्टिकोण और सरकारी मदद की कमी।

मूल्य शृंखला का विकास

मूल्य शृंखला के विकास की बात करें तो 11 में से छह, अनुमानित लाभ के 80 फीसदी के लिए उत्तरदायी हैं: रसायन और पेट्रोकेमिकल्स, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर्स, पूंजीगत वस्तुएं और मशीनी उपकरण, लौह अयस्क और इस्पात तथा वाहन और स्वचालित घटक।

कुल मिलाकर दो पहलू सामने आते हैं: पहला, उच्च उत्पादकता की आवश्यकता और दूसरा, पूंजी की उपलब्धता का इकलौती बड़ी बाधा होना। यहां सरकार, कारोबार, राजनीति और नागरिकों को मिलकर बेहतर नतीजे हासिल करने होंगे।

Keyword: सॉफ्टवेयर, सेवा क्षेत्र, विनिर्माण क्षेत्र, पोस्टमैन, यूनिकॉर्न, एपीआई प्लेटफॉर्म,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अमेरिका को कच्चे माल के निर्यात पर हटानी चाहिए पाबंदी?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.