बिजनेस स्टैंडर्ड - सौर उपकरणों पर शुल्क से चिंता
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सौर उपकरणों पर शुल्क से चिंता

श्रेया जय / नई दिल्ली March 11, 2021

वित्त वर्ष 2022 से सौर सेल एवं मॉड्यूल के आयात पर प्रस्तावित 40 फीसदी मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) लगाए जाने से बिजली दरों में 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट (किलोवाट प्रति घंटा) की वृद्धि हो सकती है। हालांकि इस शुल्क को वित्त मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया जाना अभी बाकी है लेकिन उद्योग सौर बिजली की दरों में तेजी आने की आशंका से चिंतित है। उनका मानना है कि इससे घरेलू विनिर्माण में भी कोई उल्लेखनीय मदद नहीं मिलेगी।

देश में औसत सौर बिजली की औसत दर लगभग 2.5 रुपये प्रति यूनिट है। यदि सौर उपकरणों के आयात पर प्रस्तावित सीमा शुल्क लगाया गया तो यह 3 रुपये के स्तर को पार कर सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दूसरी छमाही के दौरान जिन परियोजनाओं के लिए निविदा जारी किए गए हैं उन पर भी मूल सीमा शुल्क लागू हो सकता है क्योंकि उनकी डिलिवरी अगले साल होगी। चीन और मलेशिया से आयातित सौर गियर पर पहले से ही 14.5 फीसदी का सुरक्षा शुल्क लगाया गया है। यह इस साल जुलाई में खत्म हो जाएगा।

एएमपी एनर्जी इंडिया के सीईओ एवं एमडी पिनाकी भट्टाचार्य ने कहा कि सौर उपकरणों के आयात पर प्रस्तावित मूल सीमा शुल्क लगाए जाने से 2022 तक 175 गीगावॉट के लक्ष्य हासिल करने की रफ्तार सुस्त पड़ जाएगी। उन्होंने कहा, 'हालांकि इससे काफी हद तक अनिश्चितता दूर होगी लेकिन दरें काफी अधिक हैं और इससे डिस्कॉम एवं अन्य खरीदारों के लिए सौर बिजली की लागत बढ़ जाएगी। इससे भारत में अन्य उद्योगों की विनिर्माण लागत बढ़ में भी इजाफा होगा। विनिर्माताओं को अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद करने के लिए सरकार को विनिर्माताओं को प्रत्यक्ष विनिर्माण सब्सिडी प्रदान करनी चाहिए। इससे इस क्षेत्र को काफी मदद मिलेगी।'

नवीन एवं नवीकरणनीय ऊर्जा मंत्रालय ने भी प्रस्तावित सीमा शुल्क के बारे में पहले से ही जानकारी दे दी है ताकि सौर बिजली परियोजनाओं के लिए बोली लगाने वालों और देश भर की निविदा एजेंसियों को उसका ध्यान रखने में मदद मिल सके। मंत्रालय ने एक नोटिस में कहा है, 'देश भर में नवीकरणनीय ऊर्जा परियोजनाओं को कार्यान्वित करने वाली सभी एजेंसियों और निविदा एजेंसियों को सूचित किया जाता है कि वे उपरोक्त (बीसीडी) अनुमान का ध्यान रखें और अपने बोली दस्तावेज में उन प्रावधानों को शामिल करें ताकि इस जीएम के बाद बोली जमा कराने की अंतिम तिथि वाली सभी बोलियों के लिए शुल्क दरों में उसे समायोजित किया जा सके। इस प्रकार की सभी बोलियों में उपरोक्त अनुमान के अनुसार बीसीडी को लागू करने को कानून में बदलाव नहीं माना जाएगा।'

हालांकि भारत में आयातित सौर पैनल की लागत पहले से ही काफी अधिक है। चीन में सीसे की किल्लत के कारण भारत में आयातित सौर पैनल की लागत को बढ़ा दिया है। चीन में आयातित सीसे की कीमतों में तेजी आने के कारण उससे बने तैयार सौर पैनल की लागत पर असर पड़ा है। भारत में आयातित सौर मॉड्यूल की लागत में पिछले साल जून के बाद करीब 22 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है।

भारत अपनी सौर सेल एवं मॉड््यूल की करीब 90 फीसदी मांग को आयात के जरिये पूरा करता है और उसमें भी करीब 80 फीसदी आयात चीन से किया जाता है। घरेलू सौर उपकरण विनिर्माता ग्सास पैनल का आयात करते हैं और उनका सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश चीन है। उद्योग के आकलन के अनुसार, पिछले छह महीनों के दौरान सौर मॉड्यूल ग्लास की कीमतों में 150 फीसदी से अधिक का इजाफा हो चुका है।

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