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गूगल 2.5 करोड़ डॉलर से करेगी सशक्तीकरण

पीरजादा अबरार /  March 08, 2021

प्रौद्योगिकी दिग्गज गूगल महिलाओं और लड़कियों के लिए गूगल डॉट ओआरजी इम्पैक्ट चैलेंज की शुरुआत कर रही है जिसके तहत यह भारत और दुनिया भर में उन गैर-लाभकारी और सामाजिक संगठनों को 2.5 करोड़ डॉलर का कोष वितरण करेगी जो महिलाओं और लड़कियों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए कार्य कर रहे हैं। गूगल ने सोमवार को इस बात की भी घोषणा की कि वह ग्रामीण भारत में 10 लाख महिला उद्यमियों की मदद करेगी। यह अपने 'इंटरनेट साथी' कार्यक्रम से सीख के आधार पर एक वेब प्लेटफॉर्म - 'वीमन विल' की भी शुरुआत कर रही है। इसे ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए सामुदायिक समर्थन, संरक्षण और तेजी लाने वाले कार्यक्रमों के द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा।

'भारत के लिए गूगल' कार्यक्रम के आभासी संस्करण - वीमन विल में गूगल और अल्फाबेट के मुख्य कार्याधिकारी सुंदर पिचाई ने कहा कि इंटरनेट साथी कार्यक्रम की सफलता ने दिखाया है कि डिजिटल साक्षरता और उस तक पहुंच किस तरह महिलाओं को अपनी पूरी क्षमता हासिल करने अपनी आजीविका में सुधार करने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि इस सफलता के आधार पर हम कारोबारी शिक्षण, उपकरण और संरक्षण के माध्यम से गांवों में 10 लाख महिलाओं की उद्यमी बनने में मदद करने की घोषणा कर रहे हैं।

अंग्रेजी और हिंदी में उपलब्ध इस वीमन विल प्लेटफॉर्म को खास तौर पर उद्यमशीलता तलाशने की इच्छुक महिलाओं के लिए तैयार किया गया है।

कारोबार में रुचि के साथ तालमेल, किसी उद्यम के प्रबंधन और विकास के लिए इसे बढ़ावा देने के लिए 'कैसे करें' पाठ्यक्रम के माध्यम से यह प्लेटफॉर्म उन महिलाओं को मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करेगा, जो सिलाई, सौंदर्य सेवाओं, होम ट्यूशन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे मौजूदा शौक या प्रतिभा को कुछ आय में तब्दील करना चाहती हैं। शुरुआत में यह प्लेटफॉर्म अन्य महिलाओं को इस संसाधन का लाभ उठाने और अपनी उद्यमशीलता का सफर शुरू करने के लिए 2,000 इंटरनेट साथियों के साथ काम करेगा।

पिचाई ने कहा कि हमारा हमेशा यही मानना रहा है कि सबके लिए अवसर का विस्तार करने का सबसे अच्छा तरीका है महिलाओं के हाथों में तकनीक लाना। उन्होंने कहा कि वे इसका उपयोग न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए ही करेंगी, बल्कि अपने परिवारों और समुदायों के लिए (भी) करेंगी।

आईआईटी-खडग़पुर के पूर्व छात्र और तमिलनाडु के मूल निवासी पिचाई ने उस पुराने वक्त की याद ताजा की कि किस तरह उनकी मां घुमाने वाले फोन का इस्तेमाल करने के लिए पड़ोसियों को बुलाया करती थीं। कभी-कभार ऐसा लगता था कि जैसे पूरा पड़ोस ही हमारे लिविंग रूम में हो।

वर्ष 2017 में उन्होंने खडग़पुर के बाहर एक गांव में इंटरनेट साथी कार्यक्रम के तहत अन्य महिलाओं से मुलाकात की। वे मोबाइल फोन से रौब जमा रही थीं। इन महिलाओं ने और महिलाओंं को प्रशिक्षित करने के लिए अन्य गांवों की यात्रा की थी। उन्होंने उनसे किसी एक ऐसी चीज का नाम बताने को कहा जिससे उनके गांव में सबसे बड़ा परिवर्तन आ सकता हो और उनका जवाब था - वाई-फाई। उन्होंने अपने फोन का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग सर्च दिखाई - सिलाई पर यूट्यूब वीडियो खोजने से लेकर फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए कीटनाशक का उपयोग करने तक की सर्च। एक अन्य महिला ने यह बात साझा की कि प्रवासी श्रमिक बेटे को वीडियो कॉल करने में सक्षम होने से किस तरह उसकी जिंदगी बदल गई।

पिचाई ने कहा कि ये कहानियां इस बात की जोरदार ढंग से तस्दीक करती हैं कि प्रौद्योगिकी कैसे बेहतरी के लिए जीवन को बदलने में मदद कर सकती है। और इसके बदले में इन महिलाओं ने हमारे उत्पादों को बेहतर बनाने में मदद की है। उदाहरण के लिए उन्होंने यह दिखाया है कि किस तरह वॉयस सर्च भोजन - पूरी के साथ स्थान - पुरी को लेकर उलझन में पड़ गया जिसने में सुधार करने के लिए प्रेरित किया।

इंटरनेट साथी भारत के डिजिटल लिंग भेद को कम करने में मदद कर रहा है। अपने छह साल के सफर में टाटा ट्रस्ट्स के साथ इस संयुक्त प्रयास ने तीन करोड़ से ज्यादा महिलाओं को प्रभावित किया है। यह कार्यक्रम 3,00,000 गांवों में महिलाओं को डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए तैयार किया गया था। गूगल ने कहा कि इसे संभव बनाने के लिए इंटरनेट साथी नामक 80,000 से अधिक महिला प्रशिक्षकों ने अपनी हिम्मत और दृढ़ता का परिचय दिया है।

टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष रतन टाटा ने कहा कि हमने जो हासिल किया है, उसका आभार करने के लिए वह पिचाई की सराहना करते हैं।

Keyword: महिला सशक्तीकरण, गूगल डॉट ओआरजी, इम्पैक्ट चैलेंज, इंटरनेट साथी, वीमन विल,
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