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केरल में दोबारा सरकार बनाकर नई परंपरा डाल सकेंगे विजयन!

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  March 05, 2021

क्या वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) केरल की उस राजनीतिक परंपरा को तोड़ पाएगा जिसमें कांग्रेस और माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले गठबंधन बारी-बारी से सत्ता में आते हैं?

अब तक किए गए तमाम सर्वेक्षण यही कह रहे हैं कि एलडीएफ सत्ता में वापस आएगा। इसकी वजहें अलग-अलग हैं लेकिन एक बात समान है और वह है केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को मिल रहा समर्थन। अधिकांश मुख्यमंत्री किसी न किसी तरह के भ्रष्टाचार या घोटाले में उलझते ही हैं और विजयन भी अपवाद नहीं हैं। एसएनसी-लवलीन मामले की अंतिम सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में होनी है। विजयन इस मामले में आरोपित हैं लेकिन निचली अदालतों ने उन्हें बरी कर दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जल्दी सुनवाई कराने का हरसंभव प्रयास किया लेकिन पीठ ने इसके लिए 6 अप्रैल की तारीख तय की है। हालांकि पीठ को इस विषय में जानकारी नहीं थी लेकिन उसी दिन प्रदेश की 140 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। पीठ ने सीबीआई को चेतावनी दी कि पहले के दो आदेश विजयन के पक्ष में हैं इसलिए सर्वोच्च न्यायालय में उन्हें उलटने के लिए बहुत ठोस वजह देनी होगी। अब यह मामला विपक्ष यानी कांग्रेसनीत यूडीएफ और भाजपा के लिए बहुत अधिक राजनीतिक उपयोगिता वाला नहीं रह गया है। यूडीएफ ने यह मामला सीबीआई को सौंपा था और भाजपा की राज्य में मजबूत राजनीतिक पकड़ नहीं है। एसएनसी-लवलीन मामला उस वक्त का है जब विजयन केरल के ऊर्जा मंत्री थे। सन 1995 में भारत सरकार और कनाडा की कंपनी एसएनएसी-लवलीन के बीच जलविद्युत बुनियादी अनुबंध हुआ था। सीबीआई के अनुसार इसके चलते कथित तौर पर राजकोष को 374 करोड़ रुपये की हानि हुई क्योंकि इस अनुबंध में विजयन के 'असामान्य हित' शामिल थे। यदि सर्वोच्च न्यायालय से कोई चौंकाने वाला निर्णय आता है तो भी वह केवल चुनाव के बाद के परिदृश्य पर ही असर डाल पाएगा, न कि चुनाव पर।

बड़ा घोटाला तो वह है जिसमें सोने की तस्करी करने वाले एक गिरोह में एक अफसरशाह के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय को सीधे घसीट लिया गया है। यह अफसरशाह विजयन का दाहिना माना जाता था और हाल में जमानत पर छूटने के पहले वह हिरासत में था। मुख्यमंत्री की जानकारी के बिना यह कैसे संभव था? कहना न होगा कि इस मामले ने विजयन के सक्षम प्रशासन की चमक छीन ली।

एक ताड़ी निकालने वाले के बेटे विजयन खुद हथकरघे के बुनकर रहे हैं। वह धीरे-धीरे आगे बढ़े और उन्हें वाईएस अच्युतानंदन जैसे वरिष्ठों का साथ मिला। पूर्व मुख्यमंत्री अच्युतानंदन ने एक महीने पहले 97 वर्ष की उम्र में राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग की अध्यक्षता छोड़ी है। गत वर्ष विजयन को अपने बाद नंबर दो की हैसियत रखने वाले उद्योग मंत्री ई पी जयराजन को हटाना पड़ा क्योंकि उन पर भाई-भतीजावाद का आरोप था। कई लोग कहते हैं कि सोने की तस्करी वाले मामले में जैसे मुख्यमंत्री की गलती की कीमत एक अफसरशाह को चुकानी पड़ी, वैसे ही खुद को बचाने के लिए विजयन ने जयराजन की बलि दे दी। चाहे जो भी हो लेकिन इससे एलडीएफ का यह दावा मजबूत हुआ है कि वह भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है। उच्च नैतिकता दोबारा चुनाव जीतने में मदद कर सकती है लेकिन शासन भी मायने रखता है। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर अत्यंत खराब प्रदर्शन के बावजूद विजयन सरकार ने अच्छे परिणाम भी दिए हैं। गेल की 444 किलोमीटर लंबी कोच्चि-कोट्टांड-बेंगलूरु-मंगलूरु पाइपलाइन परियोजना (केकेबीएमपीएल) की शुरुआत 2013 में की गई थी। यह परियोजना उत्तर केरल में भूमि अधिग्रहण, धार्मिक समूहों के विरोध और अन्य तमाम राजनीतिक गतिरोधों में अटक गई। कंपनी परियोजना बंद करने की तैयारी में थी क्योंकि एक लंबी अवधि में वह केवल 39 किलोमीटर पाइपलाइन बिछा सकी थी। यह परियोजना कोच्चि स्थित पेट्रोनेट एलएनजी टर्मिनल के भविष्य के लिए बहुत अहम थी। इसकी मदद से केरल तथा दक्षिण भारत के अन्य घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित होती। आखिरकार परियोजना पूरी हुई और इस वर्ष जनवरी में प्रधानमंत्री ने इसका उद्घाटन किया। कोच्चि मेट्रो का परिचालन उनके ही कार्यकाल में शुरू हुआ और उनके ही कार्यकाल में कन्नूर को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मिला। अदाणी समूह के सहयोग वाली विझिंजम सीपोर्ट परियोजना भले ही विलंब से चल रही है लेकिन इसके अक्टूबर 2021 तक तैयार होने की संभावना है। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि राज्य सरकार ने इसे लेकर अपनी आपत्ति वापस ले ली है।

महामारी से निपटने की प्रक्रिया और सबको नि:शुल्क राशन की योजना ने भी लोगों का दिल जीता है। समाज कल्याण पेंशन में इजाफा भी उनके पक्ष में है। कोविड-19 महामारी के दौरान प्रवासी श्रमिकों की समस्या से निपटने की बात करें तो संवेदना सूचकांक पर केरल का प्रदर्शन सबसे अच्छा माना गया। चार वर्ष में राज्य ओखी और निवार चक्रवातों से जूझ चुका है, वहां दो बार बाढ़ आ चुकी है और उसे निपाह तथा कोविड-19 जैसी बीमारियों से जूझना पड़ा है। यदि जनता पिनाराई विजयन को सत्ता में वापस लाती है तो यकीनन उन्होंने कुछ अच्छा किया होगा।

Keyword: केरल, एलडीएफ, राजनीतिक परंपरा, माकपा, गठबंधन, सर्वेक्षण, पिनाराई विजयन,
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