बिजनेस स्टैंडर्ड - थीमेटिक फंडों को न दें तरजीह
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थीमेटिक फंडों को न दें तरजीह
फंड विश्लेषण
बीएस /  04 20, 2009

मैं 42 साल का हूं और मैंने 2005 से निवेश शुरू किया है। हालांकि म्युचुअल फंड में मेरे निवेश ने दो साल में मुझे अच्छा रिटर्न दिया है लेकिन मैंने अपनी यूनिट बनाए रखी।

मैगजीन और वेबसाइटों पर कई लेखों ने मुझे प्रभावित किया, जिनकी सलाह है कि इक्विटी में निवेश लंबे समय के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन अब मुझे लगता है कि कहीं मैंने अपनी यूनिट नहीं बेच कर गलती तो नहीं की?

मैं अब भी डीएसपीबीआर टाइगर और कोटक ऑपर्चुनिटीज में दस हजार की एसआईपी जारी रखे हूं और एसबीआई टैक्स गेन में 8000 और एचडीएफसी टैक्ससेवर में 5000 रुपए का निवेश कर रहा हूं।

मैं अभी अगले पांच साल तक अपना निवेश बनाए रखना चाहता हूं और उस समय अपने निवेश का पचास फीसदी निकालना चाहता हूं क्योकि तब मुझे कुछ व्यक्तिगत कारणों से उस पैसे की जरूरत होगी। बाकी का पैसा मैं अपने रिटायरमेंट तक रखना चाहता हूं जो 13 साल बाद है और तब तक के लिए हमारा लक्ष्य दो करोड़ रुपए  का है। कृपया सुझाव दें।

  -  श्रीनिवास रामगिरि

पहले तो हम आपको यह बता दें कि निवेश में बने रहना आपकी कोई गलती नहीं थी। अगर आपको लगता है कि आपको 2007 के आखिर में निकल जाना चाहिए था, जब बाजार ओवरवैल्यूड था तो यही तब भी लागू होता था जब सेंसेक्स 9000 पर या फिर 13000 पर था।

आकलन

आपके पोर्टफोलियो में 16 फंड हैं, जिनके पास कुल 272 शेयर हैं, इनमें व्यक्तिगत होल्डिंग वाले शेयर भी शामिल हैं।
आपके पास आठ फंड हैं जो लार्ज कैप आधारित हैं।
आपके पास थीम आधारित तीन फंड हैं।
चार फंडों की रेटिंग तीन स्टार से कम है जो कमजोर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न दर्शाता है।

हल:

इस भीड़ भाड़ से बाहर निकलें

शायद ठीक तरह से पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई करने के लिए आपने फंड खरीदने में अति उत्साह दिखाया। लिहाजा, आपका मौजूदा पोर्टफोलियो एक दर्जन डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंडों, तीन टैक्स सेविंग फंडों, एक बैलेन्स्ड फंड और दो डायरेक्ट स्टॉक निवेश का समागम बन गया है। लेकिन ज्यादा फंड का मतलब डाइवर्सिफिकेशन नहीं होता। यही नहीं, इससे आपको हर महीने ज्यादा स्टेटमेंट देखने-समझने की समस्या भी होती होगी।

कुछ फंड खत्म कर दीजिए

थीमेटिक फंडों से छुटकारा पा लीजिए। जो फंड एक खास सेक्टर या थीम पर आधारित होते है, उन्हें कोर पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाने के बजाए, पेरिफरल होल्डिंग के रूप में रखना चाहिए। कमजोर रेटिंग वाले फंडों को रखने की भी कोई जरूरत नहीं है। आपने क्लोज एंडेड इक्विटी फंडों में भी निवेश किया है जिनका कोई पुराना प्रदर्शन का इतिहास नहीं है और इन फंडों से आपको बचना चाहिए।

आकलन

पोर्टफोलियो के 272 शेयरों में से 246 का आवंटन एक फीसदी से भी कम है।
रिलायंस पेट्रोलियम में आवंटन 13 फीसदी।
आपके पोर्टफोलियो का झुकाव एनर्जी सेक्टर की ओर है और इसमें आपका 29 फीसदी आवंटन है।

हल:

आवंटन में कोई झुकाव नहीं हो

जब रिलायंस पेट्रोलियम और रिलायंस इंडस्ट्रीज का विलय हो जाएगा तब केवल एक शेयर का आवंटन बहुत ज्यादा हो जाएगा। आपको यह ध्यान रखना जरूरी है कि आपके पोर्टफोलियो का झुकाव किसी एक कंपनी या सेक्टर की ओर नहीं हो।

आकलन

ज्यादातर निवेश 2005 में, 2007 की आखिरी छमाही में और 2008 के शुरू में किए गए।

हल:

नियमित और अनुशासित रहें

एसआईपी के साथ रहें। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको बाजार को टाइम करने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि आप अलग अलग समय और स्तर पर खरीदारी कर रहे होते हैं जिससे आपकी लागत को औसत करने में मदद मिलती है। यही नहीं, आप बाजार के उतार-चढ़ाव की चिंताओं से भी मुक्त रहते हैं।

आकलन

आपके पास काम का फिक्स्ड आय आवंटन नहीं है।
आपके पोर्टफोलियो में ग्यारह फीसदी फिक्स्ड इनकम में बांड और कैश के जरिए निवेश है।

हल:

अपना डेट आवंटन बढ़ाएं-

एक पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट (फिक्स्ड इनकम) का मिश्रण होना चाहिए। चूंकि आपको अगले पांच साल में इसका एक बडा हिस्सा निकाल लेना है, लिहाजा आपको अच्छा खासा डेट एलोकेशन करना चाहिए। इक्विटी निवेश लंबी अवधि के लिए होता है, पांच साल से ज्यादा। इस समय से पहले पैसा चाहिए हो तो निवेश फिक्स्ड रिटर्न वाली योजनाओं में करना चाहिए क्योकि इनमें जोखिम कम रहता है। फिक्स्ड इनकम वाले एलोकेशन वोलेटैलिटी यानी उतार चढ़ाव को भी कुछ हद तक रोक लेते हैं।

आकलन

रिटायरमेंट पर दो करोड़ के आपके लक्ष्य को देखते हुए आपका मौजूदा 33,000 रुपए प्रति माह का एसआईपी में एलोकेशन कम है।

हल:

अपने एसआईपी को बढ़ाएं

आपके मौजूदा निवेश की वैल्यू 22.3 लाख रुपए है और आपकी 33,000 की एसआईपी की वैल्यू 13 साल में 1.78 करोड़ रुपए होगी। लिहाजा, यह आपके लक्ष्य से 22 लाख रुपए कम होगी। हर महीने अच्छे इक्विटी फंडों में 40,000 रुपए का निवेश आपके रिटायरमेंट के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा।

अगर आप इतना एसआईपी नहीं झेल सकते हैं तो आप बोनस जैसे अचानक आए पैसे को भी निवेश करने की सोचें। ऊपर दिया गया आकलन सालाना दस फीसदी के रिटर्न को ध्यान में रखकर किया गया है। सारे पोर्टफोलियो संबंधित आंकड़े 9 अप्रैल 2009 के हैं।

क्या किया जाना चाहिए

1- रिटायरमेंट के लिए आपके नए पोर्टफोलियो में छह फंड होने चाहिए, जो आप नीचे दिए गए विकल्पों में से चुन सकते हैं।

दो डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड: मैगनम कॉन्ट्रा, एचडीएफसी टॉप 200, डीएसपीबीआर इक्विटी
दो टैक्स सेविंग फंड: एचडीएफसी टैक्ससेवर, मैगनम टैक्सगेन, सुंदरम बीएनपी परिबास टैक्ससेवर
एक आक्रामक इक्विटी फंड: कोटक ऑपर्चुनिटीज डीडब्ल्यूएस इन्वेस्टमेंट ऑपर्चुनिटीज
एक इनकम फंड: कोटक फ्लेक्सी डेट, कैनरा रोबैको इनकम

2- इक्विटी: डेट का एलोकेशन तय करें। आप अपना डेट आवंटन हर तीन साल में दस फीसदी बढ़ाने की सोच सकते हैं।

3- एक बार इक्विटी: डेट का आवंटन तय हो जाने के बाद इस आवंटन को बरकरार रखने के लिए सालाना रीबैलेंसिंग करते रहें। जैसे जैसै अपना लक्षित समय करीब आने लगे, इक्विटी बेचना शुरू करें और उसको डेट में तब्दील करते रहें।

4-रीबैलेंसिंग करते समय लगने वाले टैक्स का ध्यान रखें। शेयरों और इक्विटी म्युचुअल फंडों में लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता और इनकम फंड में यह शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स से कम होता है।

5-जैसे जैसे रिटायरमेंट करीब आए, धीरे धीरे फिक्स्ड इनकम की ओर बढ़ें। लेकिन रिटायर होने के बाद भी यह जरूरी है कि आप कुछ पैसा इक्विटी फंडों में रखें ताकि आपका पोर्टफोलियो नेगेटिव रिटर्न देना न शुरू कर दे।

6-जैसी की आपकी योजना है कि आप पचास फीसदी निवेश पांच साल बाद निकाल लेंगे, यहां यह जरूरी है कि आप तय कर लें कि आपको कितनी रकम निकालनी है। आंकड़ा तय होने के बाद एक अलग पोर्टफोलियो बनाएं जिसमें ज्यादा पैसा फिक्स्ड इनकम के लिए आवंटित किया गया हो।

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