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बड़े ठेके की बोली से विदेशी फर्में होंगी बाहर!

निकुंज ओहरी / नई दिल्ली March 02, 2021

केंद्र सरकार के कई मंत्रालय उन क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को बड़े आकार के ठेके देने से परहेज कर रहे हैं जिनमें घरेलू स्तर पर पर्याप्त विनिर्माण क्षमताएं मौजूद हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को इसकी जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने यह कदम  उठाया है।

इससे पहले सरकार ने 200 करोड़ रुपये तक मूल्य की खरीदारी में वैश्विक निविदाएं नहीं मंगाने की हिदायत दी थी। इसे आगे जारी रखते हुए अब नीति आयोग ने औपचारिक तौर पर केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों को बड़े आकार के खरीद सौदों में भी विदेशी कंपनियों को बाहर रखने का अनौपचारिक निर्देश जारी कर दिया है। नीति आयोग ने सरकारी विभागों से कहा है, 'जिन क्षेत्रों में घरेलू स्तर पर विनिर्माण की क्षमता मौजूद है वहां विदेशी कंपनियों को आमंत्रित करना उचित नहीं है।' अधिकारी ने कहा कि कुछ मंत्रालयों ने नीति आयोग की सलाह का क्रियान्वयन भी शुरू कर दिया है।  

अधिकारी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में अपने देश में ही विनिर्माण हो सकता है और पर्याप्त क्षमता वाली देसी कंपनियां मौजूद हैं उनमें अनावश्यक रूप से वैश्विक निविदाएं जारी करने से बचना ही  मुनासिब होगा।

अधिकारी ने कहा कि नीति आयोग ने इस विषय पर सभी मंत्रालयों के साथ चर्चा की है। अधिकारी ने कहा कि आयोग ने महत्त्वपूर्ण विनिर्माण वाले क्षेत्रों से संबंधित कुछ सरकारी विभागों को पत्र लिखे हैं और उन्हें वैश्विक कंपनियों के बजाय देसी कंपनियों को तरजीह देने के लिए कहा है।

अधिकारी ने कहा, 'अगर यह योजना पूरी तरह प्रभावी की जाती है तो इसके लिए एक नीतिगत बयान जारी करना होगा और सामान्य वित्त नियमों (जनरल फाइनैंस रूल्स) की आवश्यकता होगी।'

वर्ष 2020 में वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाले व्यय विभाग ने 200 करोड़ रुपये तक के सौदों में विदेशी कंपनियों को ठेके दिए जाने से रोकने के लिए जीएफआर, 2017 के नियम 161 (5) में संशोधन किया था। स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों को राहत देने के लिए यह कदम उठाया गया था।फिलहाल सरकार जीएफआर में बदलाव नहीं करना चाहती है। अधिकारी ने कहा, 'अगर पूंजी एवं लागत पर किसी तरह के असर के बिना भारतीय विनिर्माताओं से खरीदारी की जा सकती है तो सरकारी विभागों को आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाने के लिए केवल स्थानीय कंपनियों को ही ठेके देने चाहिए।'

विभिन्न मंत्रालयों को अनौपचारिक तौर पर इन दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए बता दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि सरकार ने औपचारिक तौर पर ऐसा इसलिए नहीं कहा है कि क्योंकि इससे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों और जीएफआर का उल्लंघन होगा। अधिकारी ने कहा, 'स्थानीय उद्योगों को अधिक धार देने और उन्हें अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। जिन क्षेत्रों में घरेलू स्तर पर क्षमताएं मौजूद नहीं हैं उनमें विदेशी कंपनियों को ठेके देने से कोई गुरेज नहीं है।'

 

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