बिजनेस स्टैंडर्ड - कोविड महामारी से पहले के मुकाबले कुछ जगह यातायात और उत्सर्जन कम
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कोविड महामारी से पहले के मुकाबले कुछ जगह यातायात और उत्सर्जन कम

सचिन मामबटा और कृष्ण कांत /  March 02, 2021

कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी से कारोबारियों के कारोबार पर अभी कोई असर नहीं पड़ा है। लोग अब भी काम और अन्य वजहों से घर से बाहर निकल रहे हैं। रेलवे की माल ढुलाई में भी बढ़ोतरी हो रही है और बिजली उत्पादन भी पहले से अधिक है। बिज़नेस स्टैंडर्ड आवाजाही, प्रदूषण स्तर, भारतीय रेलवे की माल ढुलाई, यातायात और बिजली उत्पादन के आंकड़ों पर नजर रखता है ताकि वर्ष 2020 में शुरू हुई कोविड-19 महामारी के बाद सुधार की साप्ताहिक रफ्तार का पता लगाया जा सके। आम तौर पर आधिकारिक आंकड़े कुछ देरी से जारी होते हैं। दुनिया भर में विश्लेषक भी ऐसे ही संकेतकों पर नजर रख रहे हैं ताकि अर्थव्यवस्था का ताजा हाल मालूम किया जा सके। विश्व के विभिन्न देशों ने महामारी को नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन लगाए थे, जिससे आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती आ गई थी। भारत में इस समय कोविड के मामले बढ़ रहे हैं। महामारी ट्रैकर कोविड19इंडिया डॉट ओआरजी के आंकड़े दर्शाते हैं कि मामलों का सात दिन का चल औसत 2020 मे इसके सबसे निचले स्तर करीब 10,000 मामलों से लगभग 40 फीसदी अधिक है।

बिजली उत्पादन 28 फरवरी को समाप्त सप्ताह में करीब पांच फीसदी अधिक था। जब लॉकडाउन अपने चरम पर था, उस समय उत्पादन करीब 30 फीसदी घट गया था। भारतीय रेलवे ने 28 फरवरी को समाप्त सात दिन की अवधि में 12.8 फीसदी माल की अधिक ढुलाई की। माल ढुलाई से आमदनी में 11.6 फीसदी इजाफा हुआ। ये आंकड़े जनवरी के आखिर में 6 से 9 फीसदी के बीच थे। सर्च इंजन गूगल सभी देशों में लोकेशन डेटा पर नजर रखता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि लोग महामारी के दौरान कैसा व्यवहार कर रहे हैं। यह श्रेणीवार यात्रा के आंकड़े मुहैया कराता है, लेकिन ये थोड़ी देरी से आते हैं। ताजा आंकड़े 23 फरवरी तक के हैं। कार्यस्थलों पर जाने का स्तर सामान्य समय के मुकाबले 86 फीसदी है। यह पार्क के लिए 88 फीसदी, सबवे जैसे ट्रांजिट स्टेशनों के लिए 95 फीसदी है। उत्सर्जन के मामले में दिल्ली और मुंबई में फर्क नजर आता है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड नाइट्रोजन ऑक्साइड के स्तरों पर नजर रखता है, जो औद्योगिक गतिविधियों और वाहनों से निकलती है। दिल्ली में उत्सर्जन 28 फरवरी को समाप्त सप्ताह में पिछले साल के इसी सप्ताह के मुकाबले 30 फीसदी अधिक था। इस अवधि में मुंबई में उत्सर्जन 97 फीसदी कम रहा। मुंबई में मामले बढ़ रहे हैं। फरवरी के आखिर में रोजाना हजार से अधिक मामले आ रहे थे। इसकी पुष्टि यातायात जाम के आंकड़ों से भी होती है। वैश्विक लोकेशन तकनीक कंपनी टोमटोम इंटरनैशनल के आंकड़ों से पता चलता है कि मुंबई में सोमवार सुबह यातायात जाम एक महीने पहले के मुकाबले कम था। यह 1 मार्च को सुबह 9 बजे सामान्य समय के मुकाबले 50 फीसदी कम था। दिल्ली में यातायात जाम 37 फीसदी कम है।

Keyword: उत्सर्जन, दफ्तर, कार्यस्थल, प्रदूषण, माल ढुलाई, आर्थिक संकेतक,
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